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कोरोना वैक्सीन की उम्मीद ने बढ़ाई कॉटन की डिमांड, 24 महीने के टॉप पर भाव; महंगे हो सकते हैं कपड़े

कॉटन की डिमांड बढ़ने के कारण इसके भाव में अभी गिरावट की उम्मीद नहीं की जा सकती है.

December 12, 2020 7:35 AM
cotton price on peak since january 2019 on mcx increased by weather corona lockdown effectएमसीएक्स पर कॉटन के भाव इस समय पिछले 24 महीनों के शिखर पर चल रहे हैं.

कॉटन की कीमतों में तेजी का दौर है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर कॉटन के भाव इस समय पिछले 24 महीनों के शिखर पर चल रहे हैं. अमेरिकी कॉटन (ICE Cotton) भी मई 2019 के बाद से रिकॉर्ड भाव पर हैं. इसका असर आम लोगों पर भी पड़ेगा क्योंकि कॉटन का इस्तेमाल सभी करते हैं. इससे न सिर्फ कपड़े बनते हैं बल्कि बेडशीट, तौलिये भी बनते हैं जिनका हर कोई इस्तेमाल करता है. इस समय एमसीएक्स पर कॉटन 20 हजार के करीब ट्रेड हो रहा है. इसके पहले पिछले साल जनवरी में कॉटन के भाव इसी के आसपास थे. कॉटन में तेजी की सबसे बड़ी वजह कोरोना महामारी के कारण उपजी परिस्थितयां हैं.

वैक्सीन की खबरों ने बढ़ाई कॉटन की बिक्री

कोरोना वैक्सीन आने की खबरों को लेकर सभी को यह उम्मीद है कि जल्द ही आर्थिक रिकवरी संभव है. ऐसे में प्राकृतिक फाइबर के तौर पर आइस कॉटन की मांग तेजी से बढ़ी है और इस समय यह पिछले डेढ़ साल के शिखर पर है. पिछले साल मई में यह 73 सेंट पर ट्रेड हो रहा था और इस समय भी इसके भाव 73 सेंट के करीब चल रहे हैं. इसके जल्द ही आगे बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं.

केडिया कमोडिटी के निदेशक अजय केडिया के मुताबिक डिमांड बढ़ने के कारण इसके भाव में अभी गिरावट की उम्मीद नहीं की जा सकती है. यह आगे भी 70 सेंट्स के ऊपर बना रह सकता है. इसकी मांग वैश्विक स्तर पर बढ़ रही है. इसके अलावा एमसीएक्स पर भी इसका भाव 20 हजार के ऊपर बने रहने की उम्मीद है. ऐसे में निवेशकों के लिए अभी भी इससे मुनाफा कमाने का मौका है.

उत्पादन में भी गिरावट का अनुमान

इस साल भारी बारिश के कारण कॉटन की क्रॉप प्रभावित हुई है. कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) ने सत्र 2020-21 (1 अक्टूबर 2020 से शुरू) में 356 लाख बेल्स उत्पादन का अनुमान लगाया है जबकि पिछले सत्र 2019-20 में यह आंकड़ा 360 लाख बेल्स था. एक बेल्स में 170 किग्रा होते हैं.

कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) ने इसका प्रॉक्यूरमेंट बढ़ा दिया है और अब यह अपने 450 केंद्रों में 390 केंद्रों से सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 5825 रुपये प्रति कुंतल पर इसका खरीद कर रहा है. सरकार ने इस सत्र (अक्टूबर 2020 से सितंबर 2021) के लिए रॉ कॉटन (कपास) के लिए इसकी एमएसपी 5850 रुपये प्रति कुंतल निर्धारित किया है.

अजय केडिया के मुताबिक भारतीय कॉटन इस समय 40 हजार प्रति कैंडी के भाव से बिक रहा जबकि दुनिया भर में अन्य कॉटन उत्पादक अपनी कैंडी को 41 हजार के भाव से बिक्री कर रहे हैं. इस वजह से भारतीय कॉटन को प्राइस एडवांटेज मिला हुआ है.

लॉकडाउन खुलने के बाद एकाएक बढ़ी डिमांड

एंजेल ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट (एनर्जी एवं करेंसी) अनुज गुप्ता के मुताबिक कॉटन में तेजी का सबसे बड़ा कारण इसकी बढ़ती मांग है. चीन इसकी एग्रेसिव खरीदारी कर रहा है. इसके अलावा कोरोना महामारी के कारण पिछले छह-सात महीनों में टेक्सटाइल बिजनेस कमजोर रहा या यूं कह सकते हैं कि लोगों ने कपड़ों की खरीदारी नहीं की है. अब जैसे-जैसे बाजार बढ़ रहा है और वैक्सीन के आने की उम्मीद से लोग खरीदारी बढ़ा रहे हैं तो एकाएक इसकी डिमांड बढ़ गई है. अनुज गुप्ता के मुताबिक अगले कुछ महीनों में ही इसके भाव 22 हजार प्रति बेल का भी लेवल दिखा सकते हैं.

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