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कोरोना वायरस का साया! बड़ी गिरावट की ओर क्रूड, 4 रुपये तक सस्ते हो सकते हैं पेट्रोल-डीजल

चीन में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों से दुनियाभर के बाजारों में अनिश्चितता की स्थिति बन गई है.

January 28, 2020 9:07 AM
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Crude Prices Falling: चीन में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों से दुनियाभर के बाजारों में अनिश्चितता की स्थिति बन गई है. सोमवार को इसका असर घरेलू और ग्लोबल बाजारों में कमजोरी के रूप में देखने को मिली है. वहीं, वायरस आउटब्रेक के चलते चीन में अचानक डिमांड कम होने से क्रूड भी 5 दिनों में 6 डॉलर से ज्यादा टूटकर 58.50 डॉलरा प्रति बैरल के स्तर पर आ गया है, जो करीब 2 महीने का निचला स्तर है. एक्सपर्ट का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर जब भी वायरस अटैक के मामले आए हैं, क्रूड में बड़ी गिरावट रही है. अगर वायरस के मामले में बढ़ते हैं तो क्रूड वापस 55 से 56 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ सकता है. इससे आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल के भाव भी 4 रुपये प्रति लीटर तक गिर सकते हैं.

चीन में 2700 से ज्यादा मामले

बता दें कि चीन में कोरोना वायरस के अबतक 2700 से भी ज्यादा मामले आ चुके हैं. वहीं, इस मामले में अबतक 80 के करीब डेथ के मामले सामने आ चुके हैं. चीन के अलावा यूएस में भी इसके 5 मामले कंफर्म हो चुके हैं. इसके अलावा सिंगापुर, कनाडा, जापान, मलेशिया, दक्षिण कोरिया, आस्ट्रेलिया, फ्रांस और वियतनाम में भी मामले आए हैं.

कमोडिटी निवेशकों का सेंटीमेंट बिगड़ा

एक्सपर्ट का कहना है कि बता दें कि चीन दुनिया में कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा कंज्यूमर देश है, जहां कोरोना वायरस का प्रकोप होने के कारण कई शहरों में सार्वजनिक परिवहन बंद कर दिया गया है. इस वजह से अचानक वहां कच्चे तेल की मांग में गिरावट आई है. ग्लोबली देखें तो परचेजिंग पावर पैरिटी में चीन की ग्लोबल इकोनॉमी में हिस्सेदारी 19 फीसदी है जो 2003 में 9 फीसदी थी. इस वजह से चीन में क्रूड की डिमांड कम होने से कीमतों को बड़ा झटका लगा है. वहीं, कोरोना वायरस के चलते चीन की अर्थव्यवस्था पर भी निगेटिव असर पड़ेगा, जिससे इक्विटी के साथ ही कमोडिटी निवेशकों का भी सेंटीमेंट खराब हुआ है.

55 से 56 डॉलर तक टूट सकता है क्रूड

केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया का कहना है कि कमोडिटी के मामले में चीन दुनिया का सबसे बड़ा कंज्यूमर देश है. पिछले दिनों जिस तरह से चीन में कोरोना वायरस का साया पड़ा है, क्रूड से लेकर बेस मेटल और एग्री प्रोडक्ट मसलन काटन और सोया की कीमतों में गिरावट आई है. चीन में अचानक से कच्चे तेल की डिमांड गिर गई है. जिसके चलते डिमांड और सप्लाई का बैलेंस बिगड़ा है और कीमतों में बड़ी गिरावट आ गई. अगले कुछ दिन भी यही माहौल रहा तो क्रूड 55 से 56 डॉलर प्रति बैरल जा सकता है.

सस्ता होगा पेट्रोल और डीजल

इस महीने की बात करें तो उपरी स्तरों से पेट्रोल और डीजल में करीब 2 रुपये प्रति लीटर तक गिरावट आ चुकी है. एंजेल ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटी एंड करंसी) अनुज गुप्ता का कहना है कि कोरोना वायरस की वजह से चीन में परिवहन व कारोबार पर असर पड़ा है. जिससे कच्चे तेल की मांग कमजोर हो गई है. आगे मांग और गिरने की आशंका है, जिसके चलते निवेशक भी डरे हैं. इसी वजह से क्रूड में बड़ी गिरावट आई है जो जारी रह सकती है. ऐसा हुआ तो उसी अनुपात में पेट्रोल और डीजल के दाम भी कम होंगे. केडिया का कहना है कि पेट्रोल और डीजल में 3 से 4 रुपये प्रति लीटर कमी आ सकती है.

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