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त्योहारों में मसालों का बिगड़ा स्वाद! नई आवक के बाद ही नरम होंगे हल्दी, काली मिर्च, जीरा, लाल मिर्च और धनिया के दाम

कोरोना महामारी के चलते बढ़ी ​​डिमांड से इस साल अच्छे उत्पादन के बावजूद मसालों के दाम नहीं गिरे.

October 30, 2020 7:52 AM
corona played role to increase spices rate while production upहमारी रसोई में मसालों की भूमिका बहुत महत्त्वपूर्ण है. भारतीय खानों के स्वादिष्ट होने की एक बड़ी वजह मसाले भी हैं.

बेहतर उत्पादन के बावजूद कोरोना महामारी में तेजी से बढ़ी डिमांड के चलते त्योहारी सीजन के दौरान मसालों की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं. अमूमन पारंपरिक मसलों में हल्दी, लाल मिर्च, काली मिर्च, धनिया और जीरा की मांग रहती है. हल्दी को छोड़कर इस साल अन्य दूसरे मसालों का उत्पादन भी अच्छा हुआ है. बीते सत्र में उत्पादन बेहतर रहा था. बाजार के जानकार मान रहे हैं कि कोरोना महामारी के दौरान पारंपरिक मसालों की औषधि मांग तेजी से बढ़ी है. इसके चलते अभी भाव तेज बने हुए हैं. हालांकि, नई फसल आने के बाद काली मिर्च, ​जीरा, धनिया और लाल मिर्च की कीमतें नीचे आ सकती हैं.

जीरा: सीमित मांग से संभले भाव

  • जीरा की मांग के बावजूद भाव पांच साल के निचले स्तर आ गए थे. हालांकि पिछले कुछ दिनों में इसकी कीमतों में बढ़ोतरी हुई है. रिसर्च फर्म केडिया एडवायजरी के डायरेक्टर अजय केडिया का कहना है, इस सत्र अप्रैल से मार्च 2020-21 में जीरे के उत्पादन में 10 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान है और इस बार 4.4 लाख टन जीरा मार्केट में आ सकता है. उत्पादन अधिक होने के कारण इसके भाव नीचे आए लेकिन सीमित मांग ने इसके भाव को अधिक नीचे नहीं गिरने दिया.
  • दुनिया का 80 फीसदी जीरा भारत में उत्पादित होता है और भारत में भी सबसे अधिक जीरा गुजरात में पैदा होता है. इस बार गुजरात में पिछले साल के मुकाबले 40 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 4.88 लाख हेक्टेअर में इसकी बुवाई हुई थी. 2019-20 सत्र में गुजरात में जीरे का उत्पादन बढ़कर 3.88 लाख टन होने का तीसरा अग्रिम अनुमान है.
  • लॉकडाउन के बाद इसकी निर्यात मांग तेजी से बढ़ी है. चीन, यूएई और वियतनाम में भी भारतीय जीरे की मांग बढ़ी है. इसके अलावा यूरोप से भी भारतीय जीरे की मांग बढ़ने की उम्मीद में इसके भाव अधिक नहीं टूट रहे हैं. सीरिया में 25 से 30 फीसदी तक की जीरे की फसल बर्बादी ने भारतीय जीरे पर दबाव बढ़ाया है. जीरा इस समय 14,400 के भाव पर ट्रेड कर रहा है. इसके भाव कुछ महीनों में 15,000 तक जा सकते हैं. भाव में नरमी की उम्मीद अगली क्रॉप आने पर ही की जा सकती है.

हल्दी: मानसून ने बढ़ाए भाव

  • हल्दी इस समय 5950 के भाव पर है और इसके भाव बढ़ने की एक वजह यह है कि इस बार निजामाबाद और मराठावाड़ा क्षेत्रों में बुवाई क्षेत्र में गिरावट आई है जिसकी फसल अगले साल आने वाली है. इस बार हल्दी के बुवाई क्षेत्र में कुल 15-20 फीसदी की गिरावट आई है.
  • इसके बुवाई क्षेत्र में गिरावट की एक वजह पिछले कुछ वर्षों में इसके बेहतर दाम न मिल पाने की वजह से किसानों का रुख दूसरी फसलों की तरफ हो जाना रहा है. किसान कॉटन और सोयाबीन की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं. इसके अलावा देश में सबसे अधिक आंध्र प्रदेश में, करीब 40 फीसदी, हल्दी उत्पादित होती है और इस बार मानसून ने इसकी फसल खराब की है.
  • किसानों के दूसरी फसल की तरफ रुख करने, उत्पादन में गिरावट और कोरोना महामारी के चलते इम्यूनिटी बूस्टर के तौर पर इसका प्रयोग बढ़ने जैसे कारणों की वजह से मांग के मुताबिक हल्दी की आपूर्ति नहीं है. इस कारण से हल्दी के भाव बढ़े हैं.
  • 15-20 रुपये किलो मिलने वाली कच्ची हल्दी आज 50-60 रुपये में मिल रही है. अजय केडिया के मुताबिक हल्दी तीन महीने के भीतर 6500 के स्तर को पार कर सकता है और छह महीने के भीतर 7200 के स्तर को छू सकता है. अगली क्रॉप आने के बाद ही हल्दी के भाव में गिरावट की उम्मीद की जा सकती है.
  • स्पाइस बोर्ड ऑफ इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक 2019-20 में देश में 9.4 लाख टन हल्दी का उत्पादन हुआ था जबकि 2018-19 में 9.6 लाख टन हल्दी का उत्पादन हुआ था.

धनिया: अधिक उत्पादन के बावजूद भाव नहीं गिरे

  • धनिया इस समय 6800 के भाव पर है. स्पाइस बोर्ड ऑफ इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक इस बार धनिया का उत्पादन अधिक हुआ है, इसके बावजूद इसके भाव बढ़े हैं. धनिया का मुख्य इस्तेमाल खाने में सूखे मसाले के तौर पर होता है और अनलॉक की प्रक्रिया में इसकी मांग तेजी से बढ़ी है.
  • स्पाइस बोर्ड ऑफ इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक 2019-20 में 7.6 लाख टन धनिया के उत्पादन का अनुमान है जो पिछली बार 2018-19 में 6.01 लाख टन उत्पादन से बहुत अधिक है.
  • फेस्टिव सीजन के चलते मसाला बनाने वाली कंपनियां धनिया की खरीदारी बढ़ा रही हैं जिससे धनिया के भाव को मजबूती मिल रही है. इस समय धनिया 6750 के भाव पर है.
  • एंजेल ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट (एनर्जी एवं करेंसी) अनुज गुप्ता का कहना है कि जिस तरह से धनिया की खपत बढ़ी है, उससे जल्द ही यह 7200 का स्तर छू सकता है. इसकी अगली क्रॉप अगले साल आने पर ही इसके भाव में नरमी की उम्मीद की जा सकती है.

लाल मिर्च: अभी और रहेगा तीखा

  • कोरोना महामारी को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के कारण लंबे समय तक मसालों की मांग लगभग स्थिर रही लेकिन अब जब अनलॉक हुआ है तो एकाएक मांग तेजी से बढ़ी है. इसकी वजह से बढ़े उत्पादन के बावजूद भाव में गिरावट नहीं आई है. लाल मिर्च 8000 रुपये प्रति कुंतल के भाव पर हैं.
  • लाल मिर्च की मांग इसलिए अधिक है क्योंकि स्वाद बढ़ाने के लिए इसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होता है.
  • अनुज गुप्ता का कहना है कि इनके भाव में नरमी की उम्मीद अभी नहीं की जा सकती है और अगली क्रॉप आने पर ही इसके भाव नीचे आ सकते हैं. लाल मिर्च का तीखापन अभी बढ़ सकता है और यह 9500 के लेवल को पार कर सकता है, हालांकि भाव में नरमी आने पर यह 7000 तक का स्तर छू सकता है.
  • इस बार लाल मिर्च के उत्पादन में अधिक बढ़ोतरी नहीं कही जा सकती. इस वजह से भी इसके भाव बढ़े हैं. स्पाइस बोर्ड ऑफ इंडिया की वेबसाइट पर दिए गए आंकड़ों के मुताबिक 2019-20 में लाल मिर्च के उत्पादन का अनुमानित आंकड़ा करीब 17 लाख टन है जबकि पिछले 2018-19 में यह करीब 16 लाख टन था.
  • लाल मिर्च का सबसे अधिक उत्पादन आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में होता है. इसमें से आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में इस बार मौसम की भी मार पड़ी है.

काली मिर्च: काढ़े ने बढ़ाया तेवर

  • कोरोना महामारी के कारण लोगों की प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाने को लेकर जागरुकता बढ़ी है. इसके लिए उन्होंने काढ़े का इस्तेमाल शुरू किया. इसमें अन्य चीजों के साथ काली मिर्च का भी इस्तेमाल होता है. इसकी वजह से न सिर्फ भारत में, बल्कि दुनिया भर में काली मिर्च का इस्तेमाल बढ़ा है.
  • काली मिर्च का बेस प्राइस 28 हजार के आस-पास है लेकिन इस समय रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद यह करीब 32 हजार के करीब भाव पर है. काली मिर्च अपने सामान्य भाव से अभी करीब 4 हजार अधिक है.
  • अनुज गुप्ता का मानना है कि इसमें अभी और तेजी देखने को मिल सकती है और यह यह 35 हजार का लेवल पार कर सकता है. हालांकि अगली क्रॉप आने पर इसके भाव में नरमी की उम्मीद की जा सकती है. इसके अलावा मांग में नरमी आने पर यह 30 हजार के लेवल तक गिर सकता है.
  • सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2018-19 में 48 हजार टन काली मिर्च के उत्पादन का आकलन है. इसकी तुलना में इस बार 2019-20 में 61 हजार टन काली मिर्च के उत्पादन का अनुमान है. काली मिर्च का सबसे अधिक उत्पादन कर्नाटक और केरल में होता है.

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