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जीरे ने कम की धनिए की महक, इन वजहों से 40 फीसदी तक चढ़ गए भाव

महंगाई की वजह से भारतीय खानों को स्वादिष्ट बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले धनिया की महक कम हो सकती है.

April 11, 2019 8:13 AM
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महंगाई की वजह से भारतीय खानों को स्वादिष्ट बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले धनिया (Coriander) की महक कम हो सकती है. पिछले साल धनिया 50 रुपये प्रति किग्रा के भाव पर बिक रहा था जो इस साल 40 फीसदी तक बढ़कर 70 रुपये प्रति किग्रा पर पहुंच गया है. इस साल देश में इसका उत्पादन कम हुआ है. ऐसा नहीं है कि सिर्फ भारत में ही धनिए का उत्पादन कम हुआ है. इस साल यूक्रेन, बुल्गारिया और रूस जैसे देशों में 50 फीसदी धनिया कम उत्पादित हुआ. इसके कारण धनिए का वैश्विक उत्पादन 40 फीसदी तक गिर सकता है और इसमें महंगाई बनी रह सकती है. किसी भी चीज की कीमतों का उसके उत्पादन से सीधा संबंध होता है लेकिन उसके उत्पादन को प्रभावित करने वाले कई कारक होते हैं.

Coriander उत्पादन में भारी गिरावट

केडिया कमोडिटी के हेड अजय केडिया का कहना है कि देश भर का दो-तिहाई धनिया मध्य प्रदेश और राजस्थान में होता है. देश का 54 फीसदी धनिया राजस्थान में और 17 फीसदी मध्य प्रदेश में होता है. इस साल राजस्थान में 10-15 फीसदी और मध्य प्रदेश में 10 फीसदी धनिया का बुवाई क्षेत्र कम हुआ है. बुवाई क्षेत्र में सबसे अधिक गिरावट गुजरात में आई है. इसके पहले तक गुजरात में 6.9 फीसदी धनिए का उत्पादन होता था.

गुजरात में करीब 55 फीसदी बुवाई क्षेत्र कम हुआ है. धनिए पर मौसम की भी मार पड़ी है. इस साल राजस्थान और गुजरात में कम बारिश और प्रतिकूल मौसम की परिस्थितियों से उत्पादन प्रभावित हुआ है. केडिया के अनुमान के मुताबिक इस साल राजस्थान से उत्पादन में 50 फीसदी तक की गिरावट हो सकती है. इसके अलावा तीनों राज्यों में ठंडी हवाओं से धनिए की क्वालिटी पर भी फर्क पड़ सकता है.

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जीरे के प्रति आकर्षण से घटा बुवाई क्षेत्र

तीनों राज्य में बुवाई क्षेत्र में भारी गिरावट की मुख्य वजह किसानों का जीरे की खेती के प्रति बढ़ता आकर्षण है. पिछले साल किसानों को जीरे में फायदा दिखा तो उन्होंने धनिए की बजाय जीरे की बुवाई अधिक क्षेत्र में करने का फैसला किया. इसकी वजह से धनिया का उत्पादन कम हुआ. गुजरात में जीरे की खेती के कारण धनिया का उत्पादन 40 फीसदी तक कम हो सकता है.

दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है भारत

भारत धनिया का दुनिया में सबसे बड़ा उत्पादक, उपभोक्ता और निर्यातक है. हर साल यहां करीब 4 लाख टन धनिए का उत्पादन होता है और पिछले दस साल से यह आंकड़ा 3-5 लाख टन के बीच रहा है. भारत से हर साल करीब 30-45 हजार टन धनिया का निर्यात होता है और सबसे अधिक निर्यात मलेशिया, यूएई, सऊदी अरब, नेपाल, दक्षिण अफ्रीका, ब्रिटेन और पाकिस्तान को होता है.

भारत में धनिया के सबसे बड़े उपभोक्ता मसाला बनाने वाली कंपनियां हैं और वे करीब उत्पादन की करीब 50 फीसदी अकेले खपत करती हैं. मसाला कंपनियों की तरफ से इसकी मांग सबसे अधिक अप्रैल से जून के बीच होती है.

पिछले साल की तुलना में भारी गिरावट

अजय केडिया ने बताया 2019-20 की प्रोविजनिंग पर बताया कि घरेलू खपत पिछले साल 6.50 लाख टन की तुलना में बढ़कर 6.70 लाख टन हो गया और निर्यात पिछले साल 55 हजार टन की तुलना में इस साल 60 हजार टन हुआ. इसी प्रकार घरेलू खपत और निर्यात पिछले साल 7.05 लाख टन की तुलना में इस साल 7.30 लाख टन रहा जबकि धनिए की कुल सप्लाई पिछले साल के 11.98 लाख टन की तुलना में इस साल 10.78 लाख टन रही.

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