सर्वाधिक पढ़ी गईं

सोलर एनर्जी और ईवी की तेज डिमांड से चढ़ा कॉपर, निवेशकों के लिए मुनाफा कमाने का मौका

कॉपर प्राइसेज को इकोनॉमिक बैरोमीटर माना जाता है और यह इकोनॉमिक एक्टिविटी को लेकर संकेत देता है.

February 26, 2021 7:46 AM
copper price going up and solar energy electric vehicles ev infra expenditure supporting price up investors may earn profit in copper commodityकॉपर की खपत लगातार बढ़ रही है और मांग के मुताबिक उसकी आपूर्ति नहीं है.

कोरोना महामारी से प्रभावित हुई इकोनॉमी अब धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रही है और चीन इसकी एग्रेसिव खरीदारी कर रहा है. दुनिया भर में कॉपर स्टॉक सीमित है और इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. इन सब कारणों से इसके भाव लगातार ऊपर चढ़ रहे हैं. एक्सपट्र का कहना है कि कॉपर आउटलुक की बात करें तो अभी मौजूदा लेवल से और तेजी आती दिख रही है. ऐसे में निवेशकों के लिए मुनाफे का अवसर बन रहा है. कॉपर प्राइसेज को इकोनॉमिक बैरोमीटर माना जाता है और यह इकोनॉमिक एक्टिविटी को लेकर संकेत देता है.

कमोडिटी एक्सचेंज पर MCX पर 31 मार्च 2021 एक्सपायरी वाले कॉपर के भाव 731.80 रुपये चल रहे हैं. इसके भाव में जिस तरह से तेजी देखने को मिल रही है, कुछ दिनों में कॉपर 760-780 रुपये तक का लेवल दिखा सकता है. कॉपर के महंगे होने का आम लोगों पर असर पड़ेगा क्योंकि यह इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों में कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे में कॉपर के महंगे होने पर लोगों को इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों को खरीदने में अधिक खर्च करना पड़ सकता है. इसके अलावा गाड़ियों के भाव में भी तेजी देखने को मिल सकती है.

चीन की एग्रेसिव खरीदारी ने बढ़ाए भाव

कॉपर की भाव बढ़ाने में चीन की बड़ी भूमिका है. एंजेल ब्रोकिंग के वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटीज एंड रिसर्च) अनुज गुप्ता के मुताबिकचीन न सिर्फ एग्री कमोडिटीज की एग्रेसिव खरीदारी कर रहा है बल्कि बेस मेटल्स की भी खरीदारी एग्रेसिव तरीके से कर रहा है. 2020 की पहली तिमाही में दुनिया भर में लॉकडाउन लगाए जाने से पहले ही इसके भाव गिरना शुरू हो गए थे क्योंकि इसके प्रमुख उपभोक्ता चीन और अन्य देशों से इसकी मांग में 15 फीसदी की गिरावट आई थी. हालांकि जुलाई 2020 में चीन ने खरीदारी शुरू की और सालाना आधार पर कॉपर के आयात में 38 फीसदी अधिक आयात किया.

सोलर एनर्जी और ईवी ने बढ़ाई कॉपर की मांग

दुनिया भर में इस समय जीवाश्म ईंधन के विकल्प के तौर पर इलेक्ट्रॉनिक गाड़ियों को बढ़ावा दिया जा रहा है. दुनिया भर के कई देशों ने इसके लिए एक टाइमलाइन निर्धारित कर दिया है कि उस समय तक सभी गाड़ियों को इलेक्ट्रिक कर देना है. इलेक्ट्रिक गाड़ियों में पेट्रोल-डीजल वाली गाड़ियों की तुलना में करीब चार गुना कॉपर प्रयोग होता है. इसके अलावा दुनिया भर में ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत के रूप में सोलर और पवन ऊर्जा पर जोर दिया जा रहा है. इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में कॉपर का इस्तेमाल बढ़ रहा है. इन सब वजहों से कॉपर की खपत बढ़ी है और इसके भाव मजबूत हो रहे हैं.

कोरोना के कारण बदल गई परिस्थिति

पिछले साल कोरोना महामारी के कारण दुनिया भर में लॉकडाउन लगाना पड़ा. इसके कारण सभी आर्थिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई. गुप्ता के मुताबिक अनलॉक की प्रक्रिया शुरू होने के बाद धीरे-धीरे कारोबार शुरू हुआ और फैक्ट्रीज से कॉपर की मांग बढ़ी. इसके अलावा कोरोना के मामले कुछ जगहों पर बढ़ रहे हैं तो इसकी स्टॉकिंग भी शुरू हो गई है. कोरोना के कारण कई लोगों ने सार्वजनिक परिवहन की बजाय निजी वाहनों को प्रमुखता देना शुरू किया है तो गाड़ियों की मांग में बढ़ोतरी के आसार दिख रहे हैं. ऐसे में कॉपर की खपत बढ़ेगी लेकिन मांग के मुताबिक इसका उत्पादन नहीं है.

इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते खर्च से कॉपर को मजबूती

दुनिया भर की सरकारें कोरोना महामारी के चलते प्रभावित हुई अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए खर्च बढ़ा रही हैं. इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाया जा रहा है. इससे न सिर्फ इकोनॉमी को बूस्ट अप मिलेगा बल्कि रोजगार की समस्या को भी सुलझाने में मदद मिलेगी. हालांकि इससे कॉपर की खपत में भी तेजी आएगी और इसके भाव को मजबूती मिलेगी.

कॉपर के उत्पादन से अधिक खपत

इंटरनेशनल कॉपर स्टडी ग्रुप (ICSG) की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल नवंबर 2020 में रिफाइंड कॉपर में 77 हजार टन की गिरावट रही थी जबकि अक्टूबर 2020 में 1.45 लाख टन की गिरावट. जनवरी से नवंबर 2020 में 5.89 लाख टन कॉपर की शॉर्टेज रही जबकि उसके पिछले साल जनवरी से नवंबर 2019 में यह आंकड़ा 4.27 लाख टन था. आईसीएसजी की मासिक बुलेटिन रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक रिफाइंड कॉपर आउटपुट नवंबर 2020 में 21.2 लाख टन था जबकि खपत 22 लाख टन की थी. इसके अलावा नवंबर के अंत में रिफाइंड कॉपर का वैश्विक स्टॉक 12.65 लाख टन रहा जबकि अक्टूबर के अंत में 13.29 लाख टन रहा. इंटरनेशनल कॉपर स्टडी ग्रुप के मुताबिक 2021 में कॉपर माइन प्रोडक्शन में 4.5 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है लेकिन मांग के मुताबिक आपूर्ति में कमी से कॉपर के भाव में गिरावट की उम्मीद नहीं की जा सकती है.

Get Business News in Hindi, latest India News in Hindi, and other breaking news on share market, investment scheme and much more on Financial Express Hindi. Like us on Facebook, Follow us on Twitter for latest financial news and share market updates.

  1. बिज़नस न्यूज़
  2. कारोबार बाजार
  3. सोलर एनर्जी और ईवी की तेज डिमांड से चढ़ा कॉपर, निवेशकों के लिए मुनाफा कमाने का मौका

Go to Top