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कंपनियों को CSR फंड हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करने की छूट, कोरोना से जंग में मदद मिलने की उम्मीद

केंद्र सरकार ने कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (CSR) के तहत किए जाने वाले खर्च का दायरा बढ़ाकर एक महत्वपूर्ण पहल की है.

Updated: May 05, 2021 6:03 PM
Companies spending on health infra for COVID care will be considered as CSR work says governmentकेंद्र सरकार के फैसले के मुताबिक Covid care के लिए हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर सेटअप करने में कंपनियां जो खर्च करेंगी, उसे सीएसआर के तहत माना जाएगा.

केंद्र सरकार ने आज यानी बुधवार 5 मई को कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (CSR) के तहत कंपनियों द्वारा किए जाने वाले खर्च को लेकर  एक अहम फैसला किया है. सरकार के फैसले के मुताबिक Covid care के लिए हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर सेटअप करने में कंपनियां जो खर्च करेंगी, उसे सीएसआर के तहत माना जाएगा. कॉरपोरेट अफेयर्स मिनिस्ट्री का यह स्पष्टीकरण उस स्पष्टीकरण के हफ्तों बाद आया है जिसके तहत केंद्रीय मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि मेकशिफ्ट हॉस्पिटल्स और अस्थाई कोविड केयर फैसिलिटीज स्थापित करने में जो भी खर्च होगा, उसे कंपनी कानून के तहत सीएसआर एक्टिविटी माना जाएगा.
एक निश्चित श्रेणी की मुनाफा कमाने वाली कंपनियों को एक साल में सीएसआर के तहत एक निर्धारित राशि खर्च करनी होती है. यह निर्धारित कंपनी के पिछले तीन साल के औसतन सालाना नेट प्रॉफिट के कम से कम 2 फीसदी के बराबर होती है.

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इन सब पर खर्च कर सकेंगी कंपनियां

केंद्रीय मंत्रालय द्वारा जारी बयान के मुताबिक अगर कोई कंपनी कोविड केयर के हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करती है; मेडिकल ऑक्सीजन जेनेरेशन व स्टोरेज प्लांट, ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर्स के मैन्यूफैक्चरिंग व सप्लाई, वेंटिलेटर्स, सिलिंडर्स और अन्य मेडिकल एक्विपमेंट के लिए खर्च करती है जिससे कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई में मदद मिलती हो, तो उस खर्च को सीएसआर फंड्स के तहत खर्च माना जाएगा. इसके संबंध में मंत्रालय कंपनी कानून में बदलाव कर रही है और इसे लेकर बुधवार को एक सर्कुलर जारी किया है.

सीएसआर के तहत प्रॉफिट का 2% राशि खर्च करने का प्रावधान

मंत्रालय द्वारा सर्कुलर के मुताबिक निजी कंपनियों समेत सरकारी कंपनियां भी सीएसआर फंड्स के इस्तेमाल से प्रत्यक्ष रूप से या अन्य कंपनी के साथ साझेदारी कर इस प्रकार की एक्टिविटीज या प्रोजेक्ट्स शुरू कर सकती हैं. जिन कंपनियों की सालाना नेटवर्थ कम से कम 500 करोड़ रुपये या सालाना इनकम 1000 करोड़ रुपये या सालाना प्रॉफिट 5 करोड़ रुपये का हो, उनके लिए 3 साल के औसत मुनाफे का कम से कम 2 फीसदी हिस्सा सीएसआर पर खर्च करना जरूरी है. यह कानून सिर्फ भारतीय कंपनियों पर ही नहीं, बल्कि भारत में कारोबार कर रही विदेशी कंपनियों पर भी लागू होता है. इसके अलावा यह खर्च भारत में ही करना होता है. यानी कि विदेशों में किए गए सामुदायिक लाभ के कार्य को सीएसआर का हिस्सा नहीं माना जाएगा.

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