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अच्छी बारिश की उम्मीद में फिसली कमोडिटी की कीमतें, मानसून पर निर्भर करेगा आगे का भाव

मौसम विभाग (IMD) ने मानसून के अपने पहले अनुमान में दक्षिण पश्चिम मानसून के सामान्य होने की बात कही है.

Published: April 19, 2019 11:33 AM
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मौसम विभाग (IMD) ने मानसून के अपने पहले अनुमान में दक्षिण पश्चिम मानसून के सामान्य होने की बात कही है. यह अनुमान स्काईमेट के अनुमान के ठीक विपरीत है. स्काईमेट ने जून से सितंबर तक सामान्य से कम बारिश का अनुमान लगाया था. आईएमडी के अनुमान के बाद कमोडिटी भाव में तेजी से गिरावट आई है. हालांकि यह गिरावट कम तक बनी रहती है, यह मानसून पर निर्भर करेगा. इसके पहले स्काईमेट के अनुमान में अल नीनो की आशंका जताई गई थी. आईएमडी के पूर्वानुमान के बाद Commodity Price में गिरावट को लेकर फाइनेंसियल एक्सप्रेस ने एक्सपर्ट से बातचीत कर यह जानने की कोशिश की कि यह स्थिति कब तक बनी रहेगी.

बारिश के अनुमान के बावजूद दालों में मजबूती

ब्रोकरेज फर्म एंजेल ब्रोकिंग के डिप्टी वॉयस प्रेसिडेंट अनुज गुप्ता ने बताया कि आईएमडी के पूर्वानुमान के बाद कमोडिटी भाव दबाव में आ गए हैं. इसकी वजह से भाव गिर रहे हैं और यह गिरावट लगातार बनी रह सकती है. सरसों ग्वार, कॉटन और सोयाबीन जैसे कमोडिटी के भाव गिर चुके हैं और आगे भी यह स्थिति बनी रह सकती है. हालांकि अनुज गुप्ता ने यह भी बताया कि आईएमडी के पूर्वानुमान के बावजूद दालों के भाव में गिरावट नहीं आ सकती है. इसकी मुख्य वजह यह है कि दाल का उत्पादन कम हुआ है. जीरे ने कम की धनिए की महक, इन वजहों से 40 फीसदी तक चढ़ गए भाव

मई अंत तक Commodity Price पर स्थिर संकेत

केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया ने बातचीत में कहा कि IMD ने अपने पूर्वानुमान में मानसून के सामान्य रहने की बात कही है लेकिन अभी अगले महीने मई के अंत तक आईएमडी एक बार फिर से मौसम का पूर्वानुमान जारी करेगा. केडिया के मुताबिक आईएमडी के दूसरे पूर्वानुमान के बाद ही कमोडिटी भाव में उतार-चढ़ाव पर कुछ पक्के तौर पर कहा जा सकेगा.

उन्होंने बताया कि सिर्फ स्काईमेट ने ही अल नीनो का पूर्वानुमान नहीं किया है बल्कि ऑस्ट्रेलिया के मौसम विभाग ने भी यह अनुमान जारी किया है कि जुलाई-अगस्त में दक्षिण-पूर्व एशिया में अल नीनो का प्रभाव बन सकता है.

IMD के अगले पूर्वानुमान तक भाव पर बना रहेगा दबाव

अजय केडिया ने बताया कि आईएमडी के पूर्वानुमान का असर धनिया, हल्दी और कॉटन जैसे कमोडिटी के भाव पर पड़ा है. हालांकि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहेगी, यह नहीं कहा जा सकता है. आईएमडी के अगले पूर्वानुमान के बाद इनके भाव में एक बार फिर उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. खाद्य तेलों की कीमतों में गिरावट, इन वजहों से आगे भी बनी रह सकती है नरमी

अल नीनो के प्रभाव से मानूसन कमजोर

प्रशांत महासागर में सतह के गर्म होने से अल नीनो प्रभाव बढ़ता है और इसके कारण भारत, दक्षिण पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया में सूखे की संभावना बनती है. अल नीनो का अमेरिका, खाड़ी देशों और ब्राजील में ठीक उल्टा प्रभाव पड़ता है और वहां खूब बारिश होती है. अल नीनो के मजबूत होने से भारत को 2014 और 2015 में सूखा झेलना पड़ा था.

अल नीनो के असर से मानसून कमजोर होता है जिससे बारिश कम होती है. अल नीनो के मजूबत होने से खरीफ सीजन की बुवाई शुरुआती दो महीनों में कमजोर हो जाती है जिसके कारण उत्पादन होने की आशंका बनती है. स्काईमेट का अनुमान है कि इस साल देश में 94 फीसदी बारिश होगी जबकि आईएमडी का अनुमान है कि इस साल 96-104 फीसदी मानसूनी बारिश हो सकती है.

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