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China GDP Slowdown Impact on India: चीन की सुस्त इकोनॉमी से भारत को भी लग सकता है झटका? जानिए क्यों बढ़ रही है चिंता

China GDP Slowdown Impact on India: चीन की जीडीपी ग्रोथ में सुस्ती का असर भारत पर भी पड़ सकता है क्योंकि भारत का सबसे अधिक द्विपक्षीय कारोबार चीन के साथ है.

Updated: Oct 19, 2021 12:00 PM
india chinaBagchi said India keeps a constant watch on all developments having a bearing on its security. (File)

China GDP Slowdown Impact on India: सितंबर महीने में इंडस्ट्रियल उत्पादन अनुमान से कम होने के चलते चीन की जीडीपी ग्रोथ पिछली तिमाही में सुस्त हुई है. चीन के नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक जुलाई-सितंबर 2021 तिमाही में चीन की जीडीपी ग्रोथ महज 4.9 फीसदी रही. चीन की ग्रोथ सुस्त होने का भारत समेत दुनिया भर की इकोनॉमी पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है जो कोरोना महामारी के झटकों से उबरने की कोशिश कर रही है.

चीन सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक इस साल 2021 के शुरुआती नौ महीनों में भारत और चीन के बीच के द्विपक्षीय कारोबार में 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है और भारत के कॉमर्स मिनिस्ट्री द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल-जुलाई 2021 में भारत का सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार चीन रहा. इसके बाद अमेरिका, यूएई, सऊदी अरब और सिंगापुर के साथ द्विपक्षीय कारोबार हुआ. चीन की अर्थव्यवस्था में सुस्ती से महामारी के झटके से उबर रही इकोनॉमी की रफ्तार के अलावा आपसी कारोबार को लेकर भी चिंता खड़ी हो रही है.

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चीन के साथ भारत का बढ़ा है कारोबार

इस साल के शुरुआती नौ महीनों यानी जनवरी-सितंबर 2021 में भारत ने चीन से 6850 करोड़ डॉलर (5.14 लाख करोड़ रुपये) का आयात किया जोकि पिछले साल 2020 की समान अवधि की तुलना में 52 फीसदी अधिक है. आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल के शुरुआती नौ महीनों में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 2990 करोड़ डॉलर (2.25 लाख करोड़ रुपये) रुपये का था जो इस साल जनवरी-सितंबर 2021 में बढ़कर 4655 करोड़ डॉलर (3.49 लाख करोड़ रुपये) का हो गया.

भारत और चीन के बीच सितंबर तक 9038 करोड़ डॉलर (6.8 लाख करोड़ रुपये) का कारोबार हुआ जो इस साल के अंत तक 10 हजार करोड़ डॉलर (7.50 लाख करोड़ रुपये) का स्तर छू सकता है. चीन से भारत मुख्य रूप से स्मार्टफोन, ऑटोमोबाइल कंपोनेंट्स, टेलीकॉम इक्विपमेंट, एक्टिव फार्मा इंग्रेडिएंट्स (एपीआई0 और अन्य केमिकल्स आयात करता है.

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इन कारणों से सुस्त हुई चीन की इकोनॉमी

सितंबर में इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन ग्रोथ 4-4.5 फीसदी होने का अनुमान था जबकि यह महज 3.1 फीसदी ही रही. इसके चलते चीन की जीडीपी ग्रोथ सुस्त रही. कोरोना महामारी के झटकों से अभी पूरी दुनिया उबरने की कोशिश कर रही है, वहीं चीन कोरोना से पहले के ग्रोथ को पहले ही पार कर लिया था. इसके बाद इसमें सुस्ती का व्यापक असर पड़ने की आशंका दिख रही है. इसके अलावा आंकड़ों के मुताबिक तेल संकट व एवरग्रांडे के चलते पैदा हुए रीयल एस्टेट संकट के चलते चीन के ग्रोथ पर असर पड़ा. आंकड़ों के मुताबिक कारोबारी नया निवेश को लेकर उत्साहित नहीं दिख रहे हैं.

(सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस)

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