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10 साल के रिकॉर्ड भाव पर आलू की बिक्री, महंगाई थामने के लिए सरकार ने लिया बड़ा फैसला

दिल्ली में पिछले साल की तुलना में इस साल अक्टूबर में आलू 60 फीसदी महंगा हुआ.

Updated: Oct 31, 2020 3:44 PM
central governement will import onion potato to control rate potato price highest in one decadeकोल्ड स्टोरेज में कम आलू के कारण कीमतें बढ़ी हैं.

आलू की महंगाई ने पिछले 10 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अक्टूबर में आलू 39.30 रुपये प्रति किलो के भाव से बिका जो पिछले 130 महीनों में सबसे अधिक है. हालांकि दिल्ली में आलू इससे भी महंगा बिका. दिल्ली में आलू इस दौरान 40.11 रुपये प्रति किलो के भाव से बिका जो जनवरी 2010 के बाद से सबसे अधिक है. यह आंकड़ा मिनिस्ट्री ऑफ कंज्यूमर्स अफेयर्स, फूड एंड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन का है. आलू के अलावा प्याज के भाव भी तेजी से बढ़ें हैं. इन दोनों के भाव को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने इनके आयात का फैसला लिया है.

2019 में आधी कीमत पर मिल रहा था आलू

पिछले साल की बात करें तो आलू 2019 में 20.57 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिक रहा था यह इस साल की तुलना में आधे पर है. दिल्ली की बात करें तो पिछले साल यह 25 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिका था. पिछले एक साल में दिल्ली में आलू 60 फीसदी महंगा हुआ है. मिनिस्ट्री के पोर्टल पर जनवरी 2010 से आंकड़े उपलब्ध हैं.

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कोल्ड स्टोरेज में कम आलू के कारण बढ़ी कीमतें

आलू की रिटेल प्राइस आमतौर पर सितंबर से नवंबर के बीच अधिक रहती हैं लेकिन इस साल यह फरवरी से मार्च से ही महंगा होना शुरू हो गया. उस समय 23 रुपये प्रति किलो की दर आलू की रिटेल प्राइस पहुंच गई थी. आलू की खुदरा कीमतें अधिक होने की एक वजह यह है कि पिछले साल की तुलना में इस बार इसका स्टोरेज कम हुआ है. देश भर के स्टोरेज में इस बार 36 करोड़ बैग (हर बैग 50 किलो का) का भंडारण हुआ था जबकि पिछले साल 48 करोड़ बैग और उसके पिछले साल 2018 में 57 करोड़ बैग का भंडारण हुआ था. मिनिस्ट्री ऑफ एग्रीकल्चर एंड फार्मर्स वेलफेयर के आंकड़ों के मुताबिक इस बार 214.25 लाख टन आलू कोल्ड स्टोरेज में रखा गया था जबकि पिछले साल 2018-19 में 238.50 लाख आलू कोल्ड स्टोरेज में था. कृषि मंत्रालय ने कम स्टोरेज को लेकर आशंका जताई थी कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद आलू की कीमत बढ़ सकती है. भारत ने इस साल अप्रैल से अगस्त के बीच नेपाल, ओमान, सऊदी अरब और मलेशिया को 1.23 लाख टन आलू निर्यात किया था.

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भूटान से आएगा 30 हजार टन आलू

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक पिछले कुछ दिनों से आलू भी 40 रुपये प्रति किलो के भाव पर स्थिर है. जल्द ही भूटान से 30 हजार टन आलू आने वाला है. इसके अलावा सरकार ने इस पर ड्यूटी भी कम कर दिया है. पहले आलू पर 30 फीसदी की ड्यूटी लगती थी जिसे घटाकर 10 फीसदी कर दिया गया है जिसे अगले साल 31 जनवरी तक 10 लाख टन स्टॉक के लिए तय किया गया है.

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तीन दिनों से प्याज के भाव स्थिर

केंद्र सरकार फेस्टिव सीजन से पहले आलू और प्याज की बढ़ती कीमतों को थामने के लिए इनका आयात करेगी. केंद्र सरकार 30 हजार टन प्याज का आयात करेगी. गोयल के मुताबिक इनके भाव थामने के लिए पहले ही केंद्र सरकार जरूरी कदम उठा चुकी है जिसके कारण पिछले तीन दिनों से इसके भाव देश भर में औसतन 65 रुपये प्रति किलो पर स्थिर हैं.

टर्की, इजिप्ट और अफगानिस्तान से आएगा प्याज

गोयल ने बताया कि बाजार में पहले ही 7 हजार टन प्याज आ चुका है और इसके बाद 25 हजार टन दिवाली से पहले आ सकता है. प्याज का आयात टर्की, इजिप्ट और अफगानिस्तान से किया जाएगा. हालांकि उन्होंने कहा कि सरकार इस आयात की खरीदारी में सीधे शामिल नहीं होगी. प्याज आयात के लिए NAFED जल्द ही ऐसे राज्यों से लोगों को मौका देगी जहां इनकी आपूर्ति में गिरावट के कारण भाव बढ़ रहे हैं. नेफेड पहले ही सितंबर में अपने बफर स्टॉक से 37 हजार टन प्याज की बिक्री कर चुकी है.

नेफेड ने 15 हजार टन प्याज के लिए मंगाया बिड

नेफेड ने 15 हजार टन लाल प्याज के आयात के लिए बिड मंगाया है. नेफेड ने सभी आयातकों से 20 नवंबर तक किसी भी देश से 40-60 मिमी आकार के लाल प्याज को 50 रुपये प्रति किलो के भाव पर प्याज की खरीद के लिए कहा है. वे 500 टन के लॉट के हिसाब से न्यूनतम 2 हजार टन प्याज के लिए बोली लगा सकते हैं. यह बिड 4 नवंबर को खुलेगी और उसी दिन इसे खोला भी जाएगा.

प्याज के निर्यात पर है प्रतिबंध

उन्होंने उम्मीद जताई है कि जल्द ही प्याज की अगली फसल बाजार में आ जाएगी और भाव नियंत्रण में रहेंगे. प्याज के बढ़ते भाव को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने 23 अक्टूबर से Essential Commodities Act के तहत इसके भंडारण की सीमा तय कर दी. सरकार के इस फैसले के बाद होलसेलर के लिए 25 टन और रिटेलर के लिए 2 टन की अधिकतम भंडारण सीमा तय कर दी गई. इससे अलावा प्याज के बीज की शॉर्टेज थामने के लिए 29 अक्टूबर से इसके निर्यात पर प्रतिबंध भी लगा दिया गया है. केंद्रीय मंत्री ने बताया कि मंडी से प्याज खरीदने के बाद कारोबारियों को ग्रेडिंग और पैकिंग के लिए तीन दिन का समय दिया गया है.

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