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कैस्टर वायदा भाव 6500 तक पहुंचने की संभावना, जनवरी से अब तक 15% मुनाफा

कैस्टर (अरंडी) कमोडिटी में कारोबार के जरिए निवेशकों को मुनाफा कमाने का मौका बन रहा है.

Published: April 20, 2019 8:33 AM
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कैस्टर (अरंडी) कमोडिटी में कारोबार के जरिए निवेशकों को मुनाफा कमाने का मौका बन रहा है. इस साल 30 जनवरी को कमोडिटी एक्सचेंज NCDEX पर कैस्टर सीड का वायदा भाव 5350 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर खुलकर 5346 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ था. 12 अप्रैल को यह 6100 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर खुला और 6174 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ. इन तीन-चार महीने में निवेशकों को Castor Seed के वायदा कारोबार में करीब 15-16 फीसदी का मुनाफा कमाने का मौका मिला है.

Castor Seed का वायदा भाव 6500 तक पहुंचने का अनुमान

एंजेल ब्रोकिंग के डिप्टी वॉयस प्रेसिडेंट अनुज गुप्ता ने फाइनेशियल एक्सप्रेस हिंदी आनलाइन को बताया कि कैस्टर सीड में तेजी की मुख्य वजह इसकी कम आवक है. इस साल उत्पादन कम होने की संभावना के कारण इसमें तेजी आई है और आगे भी तेजी बनी रहेगी. गुप्ता का कहना है कि कैस्टर सीड के वायदा भाव 6500 रुपये के स्तर तक पहुंच सकते हैं. कमोडिटी एक्सचेंज NCDEX पर कैस्टर सीड के मई के कांट्रैक्ट भाव 18 अप्रैल को 5888 रुपये और जून के कांट्रैक्ट भाव 5994 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुए थे.

अनुज गुप्ता के मुताबिक, इस साल इंडस्ट्री में इसकी मांग मजबूत है और उत्पादन कमजोर है, इस वजह से अगले कुछ दिनों में मई का वायदा भाव 6500 रुपये प्रति क्विंटल का स्तर छू सकता है. अनुज गुप्ता ने वायदा कारोबार करने वाले निवेशकों को सुझाव दिया है कि उन्हें खरीदारी करते वक्त 5750 रुपये के आस-पास स्टाप लॉस लगाना चाहिए.

मुनाफा वसूली के कारण पिछले दिनों गिरा भाव

कैस्टर सीड के वायदा भाव तेजी से बढ़ रहे हैं लेकिन पिछले कुछ दिनों में इसमें गिरावट आई है. कमोडिटी एक्सचेंज NCDEX पर 12 अप्रैल को यह 6174 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ था लेकिन 18 अप्रैल को यह 5756 रुपये प्रति क्विंटल के वायदा भाव पर बंद हुआ. इसकी वजह मुनाफा वसूली रही. अनुज गुप्ता ने कहा कि निवेशकों ने पिछले कुछ दिनों में मुनाफावसूली की है जिसके कारण इसके वायदा भाव गिरे हैं. हालांकि उनका कहना है कि अगले कुछ दिनों में मई का वायदा भाव 6500 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर पहुंच जाएगा. अनुज गुप्ता का अनुमान है कि निर्यात के लिए मांग बढ़ने पर इसका वायदा भाव और बढ़ सकता है.

उत्पादन में गिरावट का अनुमान

2018-19 में कैस्टर का उत्पादन 20 फीसदी तक कम हो सकता है. सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (एसईए) के सर्वेक्षण के मुताबिक 2018-19 में 11.26 लाख टन कैस्टर का उत्पादन होगा जो कि 2017-18 में 14.16 लाख टन के अनुमान से करीब 20 फीसदी कम है. सर्वे के मुताबिक खराब मानसून के कारण इसका रकबा कम हुआ है. एसईए के रकबे में करीब 7 फीसदी की गिरावट आई है. 2017-18 में कैस्टर का रकबा 8.216 हेक्टेयर था जबकि 2018-19 में इसका रकबा घटकर 7.695 लाख हेक्टेयर रह गया.

भारत सबसे बड़ा कैस्टर उत्पादक

भारत में सबसे अधिक कैस्टर का उत्पादन होता है. इसकी सबसे अधिक खेती गुजरात में होती है. इस साल गुजरात में इसका रकबा करीब 10 फीसदी गिरा है. सरकारी अनुमान के मुताबिक 2017-18 में गुजरात में 5.91 लाख हेक्टेयर में इसकी खेती हुई थी जबकि 2018-19 में यह करीब 5.338 लाख हेक्टेयर पर इसकी बुवाई हुई. गुजरात के अलावा इसकी खेती राजस्थान, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में बड़े पैमाने पर होती है. कैस्टर ऑयल का उपयोग बॉयो-प्लास्टिक बॉयो लुब्रीकेन्ट्स, ऑर्गेनिक पर्सनल केयर उत्पाद, पेंट्स और कोटिंग, और ऑटोमोबाइल और दवा बनाने में होता है.

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