मुख्य समाचार:

Amazon-Flipkart की फेस्टिव सेल पर संकट के बादल! ट्रेडर्स ने क्यों कहा प्रतिबंध लगाए सरकार

CAIT ने दोनों ई-कॉमर्स कंपनियों की ओर से अपनी फेस्टिवल सेल का बचाव करने वाले बयान पर कड़ी आपत्ति भी जताई है.

September 17, 2019 5:01 PM

 

CAIT STRONGLY REFUTED CLAIMS OF AMAZON & FLIPKART ON FESTIVAL SALES

व्यापारियों के संगठन कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने ई-कॉमर्स कंपनियों Amazon और Flipkart की फेस्टिवल सेल और उसमें ​दिए जा रही भारी छूट को सरकार की FDI नीति 2018 का उल्लंघन करार दिया है. साथ ही सरकार से फेस्टिवल सेल पर प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया है. CAIT ने दोनों ई-कॉमर्स कंपनियों की ओर से अपनी फेस्टिवल सेल का बचाव करने वाले बयान पर कड़ी आपत्ति भी जताई है.

Amazon और Flipkart दोनों 29 सितंबर से फेस्टिवल सेल शुरू करने जा रही हैं. कुछ दिनों पहले इन कंपनियों ने बयान दिया था कि वे सेेेेेलर्स को अपने प्लेटफॉर्म पर कीमतें तय करने और अपनी पसंद की पेशकश करने का अधिकार देती हैं. इसके अनुसार उनके पोर्टल पर रजिस्टर्ड व्यापारी अपने ग्राहकों को अपने अनुसार कीमतों में छूट प्रदान करते हैं, जिसमें अमेजन या फ्लिपकार्ट की कोई भूमिका नहीं होती.

CAIT के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने दोनों ई-कॉमर्स कंपनियों के इन बयानों का कड़ा विरोध किया है. CAIT ने कहा है की दोनों कंपनियों का बयान बिलकुल तर्कहीन है और अपने प्लेटफॉर्म पर चल रही गलत प्रथाओं को सही ठहराने की एक कोशिश है.

वास्तव में स्थिति कुछ और ही है. चूंकि ये ई-कॉमर्स कंपनियां बिकने वाले सामान की मालिक नहीं हैं तो वे अपने प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर्ड विक्रेताओं के सामान पर भारी छूट कैसे दे सकती हैं. FDI पॉलिसी के अनुसार, केवल विक्रेता ही कोई छूट दे सकता है लेकिन इस मामले में ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा छूट की पेशकश की जाती है जो सीधे रूप से FDI नीति का उल्लंघन है.

क्या कहती है FDI पॉलिसी

खंडेलवाल ने कहा कि ये कंपनियां सरकार की FDI पॉलिसी का घोर उल्लंघन कर रही हैं. पॉलिसी में ई-कॉमर्स कंपनियों की भूमिका को अच्छी तरह से परिभाषित किया है और इसमें कोई अस्पष्टता नहीं है. FDI नीति के प्रमुख प्रावधानों के अनुसार, ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस मॉडल में 100% FDI की अनुमति है और जिसके तहत ई-कॉमर्स कंपनियां तकनीकी प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य कर सकती हैं. इसमें आगे कहा गया है कि इस तरह की ई-कॉमर्स कंपनियां केवल बिजनेस टू बिजनेस (बी2बी) सेगमेंट में रहेंगी और बिजनेस टू कंज्यूमर्स (बी2सी) की गतिविधियों के लिए अपने प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं कर सकेंगी. इसके अलावा, पॉलिसी स्पष्ट रूप से कहती है कि ई-कॉमर्स कंपनियां प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कीमतों को प्रभावित नहीं करेंगी और बाजार में प्रतिस्पर्धा के स्तर को बनाए रखेंगी.

B2B के लिए अनुमति तो कैसे ला सकती हैं सेल

खंडेलवाल ने अमेजन और फ्लिपकार्ट दोनों के बयान का दृढ़ता से खंडन करते हुए कहा कि जब उन्हें केवल बी2बी व्यापार के लिए अनुमति दी गई है तो फेस्टिवल सेल के आयोजन की आवश्यकता क्या है? उपभोक्ताओं को आकर्षित करने वाले बड़े विज्ञापन देना क्यों जरूरी है? बी2बी बिक्री का मतलब है कि उनके प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर्ड विक्रेता अपना माल केवल व्यापारिक संस्थाओं को बेचेंगे और किसी भी उपभोक्ता को नहीं, जबकि उनके प्लेटफॉर्म पर पूरी बिक्री केवल उपभोक्ताओं को ही होती है, जो कि नीति का उल्लंघन है.

केवल वैल्युएशन बढ़ाना है मकसद

खंडेलवाल ने कहा कि अगर ये कंपनियां इतनी पारदर्शी और कानून का पालन करने वाली हैं तो फ्लिपकार्ट पर रजिस्टर्ड 1,00,000 विक्रेताओं और अमेजन पर रजिस्टर्ड 5,00,000 विक्रेताओं में से गत 5 वर्षों में वे पहले कौन से 10 विक्रेता हैं जिन्होंने सबसे अधिक सामान बेचा है, इसकी सूची जारी करनी चाहिए. उन्होंने दावा करते हुए कहा कि इसमें यह पाया जाएगा कि हर वर्ष समान रूप से 10 कंपनियों का एक ही समूह लगभग 80% माल बेच रहा है और वह भी केवल सीधे उपभोक्ताओं को, जो नियमानुसार गलत है. बाकी विक्रेता इनके प्लेटफॉर्म पर केवल मूकदर्शक होते हैं और इन प्लेटफॉर्म्स पर व्यापार करने का कोई अवसर नहीं पाते हैं, जिससे पता चलता है कि इन कंपनियों का आपूर्ति, कीमतों और पर सीधा नियंत्रण है जो कि नीति का एक खुला उल्लंघन है.

ये ई-कॉमर्स कंपनियां वास्तव में व्यापार नहीं करतीं बल्कि अपनी कंपनी की वैल्युएशन बढ़ाती हैं और उसी के लिए अपने पोर्टल पर अधिकतम डिस्काउंट देती हैं. इससे इन कंपनियों के पोर्टल पर आने वाले लोगों की संख्या में इजाफा हो और कंपनियों का मूल्यांकन बढ़े. डिस्काउंट देने से हुए नुकसान की भरपाई इन कंपनियों के इन्वेस्टर करते हैं क्योंकि वैल्युएशन बढ़ने में उनका बहुत फायदा होता है. इसलिए अंततः यह ई-कॉमर्स में वैल्युएशन गेम है न कि सामान बेचने के लिए प्लेटफॉर्म.

ई-कॉमर्स का नहीं करते विरोध

खंडेलवाल ने आगे कहा कि देश के व्यापारी किसी भी प्रतिस्पर्धा से डरते नहीं हैं और ई-कॉमर्स का विरोध नहीं करते हैं, लेकिन इसके लिए समान स्तर की प्रतिस्पर्धा का होना जरूरी है. ई-कॉमर्स कंपनियां बड़े डिस्काउंट देती हैं, जिससे बाजार में असमान प्रतिस्पर्धा रहती है.

CAIT ने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री से इन ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा सरकार की FDI नीति के घोर उल्लंघन पर तुरंत गौर करने और घोषित फेस्टिवल सेल पर प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया है. CAIT ने सरकार से इन कंपनियों के बिजनेस मॉडल की जांच करने का भी आग्रह किया है. CAIT को उम्मीद है कि सरकार तुरंत इन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी.

Get Business News in Hindi, latest India News in Hindi, and other breaking news on share market, investment scheme and much more on Financial Express Hindi. Like us on Facebook, Follow us on Twitter for latest financial news and share market updates.

  1. बिज़नस न्यूज़
  2. कारोबार बाजार
  3. Amazon-Flipkart की फेस्टिव सेल पर संकट के बादल! ट्रेडर्स ने क्यों कहा प्रतिबंध लगाए सरकार

Go to Top