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राष्ट्रीय खिलौना नीति बनाए सरकार, ग्लोबल मार्केट में प्रतिस्पर्धा के लिए जरूरी: CAIT

अब देश का खिलौना उद्योग सरकार की प्राथमिकता में आ गया है, जो देश के व्यापारियों एवं लघु उद्योग के लिए एक शुभ संकेत है.

Updated: Aug 31, 2020 4:32 PM
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मन की बात कार्यक्रम में भारतीय खिलौनों को वैश्विक खिलौना बाजार में बड़ी भूमिका निभाने हेतु प्रेरित करने को कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने महत्वपूर्ण घटना बताया है. कैट का कहना है कि इससे यह स्पष्ट है कि सरकार की बुनियादी नीति में एक बड़ा परिवर्तन आया है और अब सरकार भारतीय उत्पादों को प्रोत्साहित करते हुए देश को आत्मनिर्भर बनाकर विदेशी सामान की निर्भरता को कम करने के लिए पूरी तरह जुट गयी है. अब देश का खिलौना उद्योग सरकार की प्राथमिकता में आ गया है, जो देश के व्यापारियों एवं लघु उद्योग के लिए एक शुभ संकेत है.

इस संबंध में कैट ने एक राष्ट्रीय खिलौना नीति और एक विशेषज्ञ समिति के गठन का आग्रह किया है. कैट का कहना है कि इस समिति में वरिष्ठ अधिकारी व व्यापार के प्रतिनिधि शामिल हों और भारत में खिलौना क्षेत्र का गहन अध्ययन और यांत्रिक व इलेक्ट्रॉनिक दोनों तरह के खिलौनों के उत्पादन में वृद्धि के लिए आवश्यक उपाय सरकार को सुझाएं.

देश में खिलौना बाजार का सालाना कारोबार 25 हजार करोड़ का

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने बताया कि एक अनुमान के अनुसार वर्तमान में भारत में खिलौना बाजार का सालाना कारोबार लगभग रुपये 25 हजार करोड़ रुपये का है, जिसमें चीन का हिस्सा लगभग 65% है और लगभग 5% खिलौने अन्य देशों से आयात किए जाते हैं. शेष 30% खिलौने भारत में निर्मित होते हैं. भारत में प्राथमिक, सूक्ष्म और कुटीर क्षेत्रों में लगभग 6000 से अधिक खिलौना निर्माता हैं. चीन के अलावा भारत थाइलैंड, कोरिया और जर्मनी से भी खिलौने आयात करता है. चीन ने विशेष रूप से पिछले 5 वर्षों में खिलौनों के क्षेत्र में अत्यधिक वृद्धि की है और भारतीय बाजार में अपने कम मूल्य के खिलौना उत्पादों के साथ आक्रामक रूप से चीनी खिलौनों को उतारा है.

आगे कहा कि हालांकि ये चीनी उत्पाद इस्तेमाल और फेंकने की प्रकृति के हैं, जबकि भारतीय खिलौने अधिक टिकाऊ और मजबूत हैं लेकिन विभिन्न कारणों से भारतीय खिलौने महंगे हो जाते हैं. भारतीय खिलौना क्षेत्र को अनेक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है, जो भारत में इस क्षेत्र के विकास के लिए बाधक हैं. इसके फलस्वरूप इन उत्पादों के लिए चीन पर निर्भरता काफी हद तक बढ़ी है. हालांकि, भारतीय खिलौने निर्यात के लिए बेहद सक्षम हैं लेकिन इसके लिए खिलौना क्षेत्र को समर्थन देने के लिए सरकार की एक मजबूत नीति की आवश्यकता है.

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खिलौना क्षेत्र के समक्ष मौजूद समस्याएं

टॉयज एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अजय अग्रवाल एवं संयोजक मनु गुप्ता ने कहा कि भारतीय खिलौना क्षेत्र बेहतर कर सकते हैं और घरेलू और वैश्विक बाजार में दूसरों को कड़ी टक्कर दे सकते हैं. लेकिन चूंकि खिलौना क्षेत्र एक लम्बे समय से कुछ बड़ी बाधाओं का सामना कर रहा है, इस कारण से भारतीय खिलौनों के क्षेत्र में वृद्धि अपेक्षित विकास की तुलना में बहुत कम है. उन्होंने कहा कि खिलौना उद्योग की समस्याओं के समाधानों के लिए कोई नीति न होने से इस सेक्टर में वृद्धि बेहद धीरे-धीरे हो रही है. विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वित दृष्टिकोण का अभाव है. इसके अलावा खिलौना निर्माण एक स्वैच्छिक क्षेत्र है, जिसमें न केवल उत्पादन के लिए बल्कि तैयार उत्पादों के भंडारण और इसके पैकिंग के लिए बड़ी भूमि की जरूरत होती है. अब तक उपलब्ध भूमि काफी कम है, जो उत्पादन को काफी हद तक बाधित करती है.

इसके अलावा आसान तरीके से बैंकों से ऋण अथवा वित्तीय सहायता न मिलना भी एक अन्य प्रमुख बाधा है, जो भारत में खिलौनों के उत्पादन को रोकती है. विभिन्न खिलौनों पर जीएसटी की दो दरें कर प्रक्रिया को जटिल करती हैं. खिलौना उद्योग में डिजाइन और इनोवेशन की बहुत कमी है, जिसके कारण नए उत्पाद बनाना बहुत मुश्किल है. खेद है कि भारत में कोई भी एकल समर्पित खिलौना डिजाइन संस्थान नहीं है. आगे कहा कि दुनिया में बेचे जाने वाले ज्यादातर खिलौने इलेक्ट्रॉनिक हैं, जबकि भारत में बने खिलौने यांत्रिक हैं. खिलौनों के निर्माता इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों पर अधिक जीएसटी दर लगने के कारण इलेक्ट्रॉनिक खिलौने बनाने से हिचकते हैं.

CAIT जल्द करेगा पीयूष गोयल से मुलाकात

भरतिया और खंडेलवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने लगभग 7 लाख करोड़ के वैश्विक खिलौना के बाजार में भारतीय खिलौना निर्माताओं को प्रमुख शेयरधारक बनने का आह्वान किया है, जो स्वागत योग्य है. कैट इस सम्बन्ध में खिलौने निर्माताओं के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से जल्द मिलेगा और उनसे एक राष्ट्रीय खिलौना नीति बनाने का आग्रह करेगा, जिसके साथ एक राष्ट्रीय खिलौने डेवलपमेंट कार्यक्रम को भी जोड़ा जाए. इसके अलावा कैट खिलौनों की जीएसटी दर में असमानता और विसंगति को दूर करने का भी आग्रह करेगा.

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टॉय डिजाइन एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट भी बनें

वर्तमान में, मैकेनिकल खिलौने 12% जीएसटी दर में और इलेक्ट्रॉनिक खिलौने 18% कर की दर के अधीन हैं. कैट का कहना है कि भारत में खिलौनों के लिए एक प्लग एंड प्ले पॉलिसी की जरूरत है. कैट इस सन्दर्भ में गोयल से देश में 6 स्थानों पर टॉय डिजाइन एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट के निर्माण के लिए भी आग्रह करेगा, जिससे देश भर के खिलौना निर्माताओं को इसका लाभ मिलेगा. कैट की ओर से यह भी कहा गया कि खिलौनों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एक उचित आयात प्रतिस्थापन नीति की भी आवश्यकता है, जिसके कारण भारत के खिलौना उद्योग का मजबूत विकास होगा.

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