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CAIT ने Amazon पर लगाया FDI पॉलिसी और FEMA कानूनों के उल्लंघन का आरोप, सरकार से तुरंत कार्रवाई की मांग

कैट ने अमेजन द्वारा भारत में मल्टी ब्रांड रिटेल गतिविधियों के संचालन के लिए सरकार की अनिवार्य अनुमति नहीं मांगे जाने के लिए कंपनी के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की है.

Updated: Nov 04, 2020 8:37 PM
CAIT Accused Amazon for indulging into various serious contraventions of FDI Policy of the Government and Foreign Exchange Management Act FEMA, confederation of all india tradersDecember 1, 2020, onwards all sellers would enjoy Standard benefits up to March 31, 2021. Image: Reuters

कनफेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने अमेजन पर भारत सरकार और FDI पॉलिसी एवं विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के ​प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप लगाया है. कैट ने अमेजन द्वारा भारत में मल्टी ब्रांड रिटेल गतिविधियों के संचालन के लिए सरकार की अनिवार्य अनुमति नहीं मांगे जाने के लिए कंपनी के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की सरकार से मांग की है. साथ ही अमेजन पर अधिकतम जुर्माना लगाने और विभिन्न नियमों के तहत अन्य आवश्यक कार्रवाइयां करने का भी आग्रह किया है. इसके लिए कैट ने केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को बुधवार को एक लेटर भेजा है.

कैट ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, प्रवर्तन निदेशालय, भारतीय रिजर्व बैंक और सेबी को भी इसी तरह का लेटर भेजा है और अमेजन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. कैट का कहना है कि भारत के छोटे व्यवसायों को मारने के लिए किसी भी कम्पनी को कोई आजादी नहीं है और यदि आवश्यकता होती है, तो हम न्याय पाने के लिए सड़कों पर जाने या अदालत में जाने में संकोच नहीं करेंगे. वहीं दूसरी ओर अमेजन ने इस आरोप का खंडन किया है.

अमेजन के विभिन्न निवेश

कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने बुधवार को नई दिल्ली में एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि सार्वजनिक रूप में उपलब्ध विभिन्न दस्तावेज बताते हैं कि अमेजन ने अमेजन इंडिया में 35,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है. अमेजन इंडिया जो कहने को ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस है लेकिन वास्तव में अप्रत्यक्ष रूप से जिसके जरिये मल्टी-ब्रांड खुदरा व्यापार हो रहा है. लगभग 4200 करोड़ रुपये मोर रिटेल लिमिटेड (एक मल्टी-ब्रांड रिटेल कंपनी) में निवेश किए हैं, जिसे समारा कैपिटल के वैकल्पिक निवेश के जरिये अमेजन नियंत्रित करती है.

दूसरी और अमेजन ने फ्यूचर कूपन प्राइवेट लिमिटेड में 1,430 करोड़ रुपये निवेश किये लेकिन वास्तव में फ्यूचर रिटेल लिमिटेड (एक मल्टी-ब्रांड खुदरा कंपनी) में एक नियंत्रित निवेश किया. उपरोक्त सभी निवेश फेमा नियमों और विनियमों का उल्लंघन कर रहे है, जिसके लिए कैट ने सरकार से तत्काल कार्रवाई करने की मांग की है.

अमेजन दे रही सरकार को धोखा

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी सी भरतिया ने कहा कि कानून का एक मूलभूत सिद्धांत है कि जो कार्य सीधे तौर पर किया जाना प्रतिबंधित है वह अप्रत्यक्ष रूप से भी नहीं किया जा सकता है. लेकिन कानून और नियमों को एक तरफ फेंकने में माहिर अमेजन ने कभी भी सौदा होने के बाद सरकार और अन्य सम्बंधित अधिकारियों को यह खुलासा नहीं किया किया कि वह मल्टी ब्रांड रिटेल व्यापार भी करेगी, वो भी बिना सरकार की अनुमति के. भारत के रिटेल व्यापार पर कब्जा करने और छोटे व्यापारियों के व्यापार को हड़पने के लिए अमेजन ने एक तरीके से सरकार एवं अन्य सरकारी संस्थानों को धोखा दिया है.

भरतिया और खंडेलवाल ने कहा कि भारत के व्यापारी अमेजन द्वारा उनके व्यापार को नष्ट किये जाने को लेकर बेहद चिंतित हैं. अमेजन भारत के रिटेल कारोबार पर अपना कब्जा जमाने के लिए कुछ भी अधिकृत अथवा अनाधिकृत रास्ता अपना कर मनमानी व्यापारिक गतिविधियां कर रही है. यह तो फ्यूचर समूह और अमेजन के बीच लड़ाई है, जिसके चलते सिंगापुर में स्थित आर्बिट्रेशन पैनल में जिरह के दौरान अमेजन ने इस बात को स्वीकार किया कि वह फ्यूचर रिटेल के जरएि मल्टीब्रांड रिटेल में अपना कब्जा जमाएगी.

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फ्यूचर ग्रुप और अमेजन की डील पर डाली रौशनी

इस बारे में और रोशनी डालने के लिए भरतिया और खंडेलवाल ने फ्यूचर ग्रुप और अमेजन के बीच की डील की कुछ डिटेल का हवाला दिया. फ्यूचर रिटेल के साथ एक समझौते में अमेजन ने फ्यूचर कूपन्स (पी) लिमिटेड के 49% शेयर का अधिग्रहण किया, जो फ्यूचर रिटेल लिमिटेड का नियंत्रण प्राधिकारी है और एक सूचीबद्ध कंपनी है. 12 अगस्त 2019 को, फ्यूचर रिटेल लिमिटेड एवं फ्यूचर कूपन्स लिमिटेड दोनों ने एक शेयरधारक समझौते को अंजाम दिया, जिसमें कुछ विशेष अधिकारों पर मुहर लगी. किसी भी महत्वपूर्ण सामग्री निर्णय के लिए फ्यूचर कूपन्स लिमिटेड की स्वीकृति और किसी भी सामग्री निर्णय लेने के लिए प्रमोटरों को प्रतिबंधित करना इसमें शामिल है.

समझौते का औचित्य 22 अगस्त 2019 को स्पष्ट हो गया जब फ्यूचर रिटेल ने स्टॉक एक्सचेंज को अमेजन के साथ अपने समझौते के बारे में खुलासा किया कि अमेजन, फ्यूचल कूपन्स की 49% हिस्सेदारी खरीदेगी. हालांकि यह खुलासा नहीं किया गया था कि फ्यूचर कूपन्स के सभी अधिकार भी अमेजन को सौंप दिए गए हैं. इस समझौते के आधार पर अमेजन ने फ्यूचर रिटेल पर भी अपना नियंत्रण हासिल कर लिया. यह तथ्य है कि भारत में विशेष रूप से ईडी और सेबी किसी भी नियामक को इसकी जानकारी नहीं दी गई.

भरतिया और खंडेलवाल ने आगे कहा कि अमेजन फ्यूचर रिटेल में शेयरधारक नहीं थी. इसलिए इस तरह के प्रतिबंध का एकमात्र उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि अमेजन का फ्यूचर रिटेल पर नियंत्रण है और समझौते की इस शर्त को पूरा करने के लिए फ्यूचर कूपन्स ने अपने आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन में परिवर्तन भी किया. इस समझौते में अमेजन को फ्यूचर कूपन्स की ओर से कार्य करने के लिए एक सम्पूर्ण पावर ऑफ अटॉर्नी भी दी गई.

किन कानूनों का उल्लंघन

कैट का कहना है कि अमेजन का निवेश (फ्यूचर कूपन्स के माध्यम से) फेमा 1999 अधिनियम की धारा 13 का उल्लंघन है. यह फेमा के नियम 23 के स्पष्टीकरण (डी) का भी उल्लंघन करता है, फेमा के अनुसूची -1 के तहत निर्धारित प्रवेश मार्ग का उल्लंघन करता है, अनुसूची -1 के खंड 15.4 का भी यह स्पष्ट उल्लंघन है. यह एफडीआई नीति के प्रेस नोट नंबर 2 के तहत निर्धारित शर्तों का भी घोर उल्लंघन करता है. अमेजन द्वारा फेमा का ऐसा उल्लंघन फेमा अधिनियम की धारा 13 में निर्दिष्ट जुर्माना लगाने के लिए एक प्रमाणित मामला है, जिसके अनुसार मौद्रिक जुर्माना उल्लंघन में शामिल राशि का तीन गुना तक है. इसका अर्थ है कि अमेजन 1 लाख 20,000 करोड़ रुपये के मौद्रिक दंड के लिए उत्तरदायी है. इसके अतिरिक्त, प्रवर्तन निदेशालय यह निर्देश दे सकता है कि “किसी भी मुद्रा, सुरक्षा या अन्य धन या संपत्ति जिसके संबंध में उल्लंघन हुआ है” केंद्र सरकार जब्त कर सकती है. अंत में, सिंगापुर आर्बिट्रेटर द्वारा पारित अंतरिम पुरस्कार ने कथित तौर पर यह स्थापित किया है कि अमेजन के स्वयं के प्रवेश पर भी, इसका फ्यूचर रिटेल में पूरा निवेश अपने विशिष्ट नियंत्रण अधिकारों की ओर है.

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