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3 महीने की गिरावट में कहां डूबा सबसे ज्यादा पैसा, ये हैं Top 100 कंपनियों के Top लूजर्स

पिछले 3 महीने में निफ्टी के टॉप 100 कंपनियों के शेयर की बात करें तो निवेशकों का पैसा 50 फीसदी तक डूब गया.

November 28, 2018 12:45 PM
Top Nifty 100 Losers, 3 Month Correction, Investors Wealth Tank, 5 Big Factors For Correction, Sensex, Niftyपिछले 3 महीने में निफ्टी के टॉप 100 कंपनियों के शेयर की बात करें तो निवेशकों का पैसा 50 फीसदी तक डूब गया.(PTI)

Nifty 100 Top Losers: अगस्त के अंतिम हफ्ते में रिकॉर्ड हाई बनाने के बाद शेयर में करेक्शन का दौर जारी है. 27 नवंबर तक की बात करें तो सेंसेक्स रिकॉर्ड हाई से 9 फीसदी और निफ्टी भी रिकॉर्ड हाई से 9 फीसदी टूट चुका है. इस दौरान अगर निफ्टी के टॉप 100 कंपनियों के शेयर की बात करें तो निवेशकों का पैसा 50 फीसदी तक डूब गया. इस दौरान IL&FS क्राइसिस, रुपया और मॉनेटरी पॉलिसी, OMCs पर दबाव, महंगे वैल्यूएशन, ट्रेड वार और बॉन्ड यील्ड में तेजी जैसे फैक्टर हावी रहे.

बता दें कि 29 अगस्त 2018 को सेंसेक्स ने अपना आॅलटाइम हाई बनाया था और 38989.65 के स्तर पर पहुंच गया. वहीं, 27 नवंबर को सेंसेक्स 35513.14 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 27 अगस्त 2018 को अपने आॅलटाइम हाई 11738 के स्तर पर था जो 28 नवंबर को
10685 के स्तर पर आ गया.

हैवीवेट कंपनियों के टॉप लूजर्स

निफ्टी100 में शामिल टॉप कंपनियों में जिन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट आई, उनमें Yes बैंक(50%), इंडियाबुल्स हाउसिंग(45%), पिरामल इंडस्ट्रीज(34%), बंधन बैंक(32%), टाटा मोटर्स(31%), L&T फाइनेंस होल्डिंग(29%), SAIL(29%), बैंक आॅफ बड़ौदा(26%), महिंद्रा एंड महिंद्रा(23%) और JSW स्टील(22%) शामिल हैं.

पिछले 3 माह में गिरावट की बड़ी वजहें

IL&FS क्राइसिस : IL&FS इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को लोन देने वाली कपंनी है. कंपनी पर करीब 91 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है. 21 सितंबर 2018 को कंपनी तीसरी बार कमर्शियल पेपर पर ब्याज चुकाने में असफल रही. जिसके बाद DSP म्यूचुअल फंड ने ज्यादा यील्ड पर दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (DHFL) के कमर्शियल पेपर बेच दिए. बाजार पर डर हावी हो गया और फाइनेंशियल सेक्टर में तेज बिकवाली आई.

Crude, OMCs पर दबाव : पिछले दिनों क्रूड की कीमतों में तेजी के चलते OMCs पर दबाव था ही, सरकार ने अक्टूबर के पहले हफ्ते में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को कम करने के लिए OMCs को अपनी ओर से 1 रुपये प्रति लीटर दाम घटाने को कहा, जिसके बाद से मार्जिन को लेकर निगेटिव सेंटीमेंट बन गया.

महंगा वैल्युएशन : 29 जनवरी को सेंसेक्स 26.4 गुना पर कारोबार कर रहा था, जबकि 10 साल का पीई 19.40 गुना और पांच साल का पीई 19.90 रहा है. बाजार ने इन बातों को नजरअंदाज किया.

रुपया, Trade War : इस साल रुपये में लगातार गिरावट से भी मार्केट का सेंटीमेंट खराब हुआ है. वहीं, आरबीआई ने भी ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी न करने का फैसला लेकर करंसी मार्केट को चौंकाया. यूएस और चीन के बीच ट्रेड वार बढ़ने से दुनियाभर के बाजारों पर दबाव बना. ट्रेड वार की डर ने विदेशी निवेशकों को सतर्क किया.

Bond Yield में तेजी : इस साल 10 साल की बॉन्ड यील्ड में तेजी रही. जब भी मैक्रोइकोनॉमिक इंडिकेटर्स कमजोर पड़ते हैं, बॉन्ड यील्ड बढ़ जाती है. वहीं, निवेशक जोखिम से बचने के लिए बॉन्ड से अधिक रिटर्न चाहते हैं.

Note: ये आंकड़े शेयर के पिछले 3 महीने के प्रदर्शन के आधार पर लिए गए हैं.

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