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Gold में निवेश करने का बेहतर मौका; बाजार के जोखिम से मिलेगी सुरक्षा, बढ़ेगा आपका पैसा

शेयर बाजार में जब गिरावट का दौर चल रहा है, एक्सपर्ट गोल्ड में निवेश को बेहतर विकल्प बता रहे हैं. (Reuters)

October 27, 2018 7:46 AM
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पिछले कुछ दिनों से शेयर बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी हुई है. 28 अगस्त के बाद से सेंसेक्स में 5000 अंक और और निफ्टी में  1500 अंक से ज्यादा गिरावट है. इस दौरान निवेशकों को शेयर बाजार से लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है. फिक्स्ड इनकम प्रोडक्ट का रिटर्न भी कुछ खास नहीं है. वहीं, सोने में इस दौरान तेजी देखी गई है. 28 अगस्त के बाद से सोना करीब 10 फीसदी महंगा हुआ है. एक्सपर्ट मौजूदा स्थिति में सोने को अपने पोर्टफोलियो में शामिल करने की बात कर रहे हैं. हम आपको एक्सपर्ट के हवाले से बताएंगे, कि क्यों सोना आपको इक्विटी मार्केट के जोखिम से सुरक्षा दिला सकता है.

शेयर बाजार Vs गोल्ड

28 अगस्त के बात की बात करें तो सेंसेक्स में 14 फीसदी गिरावट आ चुकी है. वहीं, पिछले 3 महीने में यह गिरावट करीब 8.60 फीसदी और इस साल अब तक सेंसेक्स में गिरावट 2 फीसदी से ज्यादा रही है. वहीं, निफ्टी भी इस साल अब तक करीब 4.5 फीसदी कमजोर हो चुका है. निफ्टी में पिछले 3 महीने में 9 फीसदी गिरावट रही है.

दूसरी ओर गोल्ड 28 अगस्त को 29300 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर था जो अब बढ़कर 32300 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर आ गया है. यानी महज 2 महीनों में गोल्ड में 10 फीसदी रिटर्न मिला है. साल 2018 में अबतक का रिटर्न देखें तो वह भी करीब 10 फीसदी रहा है.

बैलेंस होता आपका निवेश…..

एंजेल ब्रोकिंग के वाइस प्रेसिडेंट कमोडिटी एंड करंसी अनुज गुप्ता का कहना है कि अगर कोई निवेशक एक ही समय में गोल्ड और इक्विटी मार्केट में बराबर निवेश करता तो उसका निवेश बैलेंस होता. यानी उसे इक्विटी में जो नुकसान हुआ, वह गोल्ड बैलेंस कर देता.

केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया का कहना है कि पिछले कई साल की रिटर्न हिस्ट्री देखें तो गोल्ड में एक स्थिर रिटर्न मिलता रहा है. गोल्ड के साथ पोर्टफोलियो डाइवर्सिफाई करने का फायदा है कि अगर इक्विटी या बॉन्ड में नुकसान हो रहा है तो गोल्ड उसकी कुछ हद तक भरपाई कर सकता है. वहीं, एमरजेंसी में गोल्ड को तुरंत कैश कराया जा सकता है. जो सबसे बड़ा फायदा है कि यह हेजिंग अगेंस्ट इनफ्लेशन के रूप में काम करता है.

गोल्ड में तेजी बने रहने की आशंका

अंतरराष्ट्रीय और घरेलू स्तर पर बाजारों में अनिश्चिता बने रहने की आशंका है. जियो पॉलिटिकल टेंशन और ट्रेड वार का जो दौर शुरू हुआ है, वह आगे भी लंबे समय तक जारी रहने का डर बना हुआ है. अमेरिका में सेल्स डाटा बेहतर नहीं आए हैं, वहीं मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर स्थिति साफ नहीं है, ऐसे में डॉलर पर भी दबाव है. इन सब वजहों से निवेशकों का रुख इक्विटी मार्केट की बजाए सुरक्षित विकल्प माने जाने वाले सोने की तरफ बढ़ रहा है. फेस्टिव सीजन भी गोल्ड की डिमांड बढ़ने का बड़ा कारण है.

पोर्टफोलियो में कितना शामिल करें गोल्ड

हालांकि, एक्सपर्ट निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में सोने में एक तय लिमिट तक ही निवेश करने की सलाह दे रहे हैं. अजय केडिया का कहना है कि लंबी अवधि के लिए पोर्टफोलियो बनाते समय बाजार के जोखिम को भी ध्यान में रखकर बैलेंस निवेश करना चाहिए. अगर आपको लगता है कि इक्त्रिटी और बॉन्ड के जरिए आपका पोर्टफोलियो डाइवर्सिफाई नहीं हो पा रहा है तो निवेश का एक हिस्सा गोल्ड के लिए रखें. नए निवेशक पोर्टफोलियो में 8 से 20 फीसदी तक गोल्ड शामिल कर सकते हैं.

अनुज गुप्ता का कहना है कि आपके पोर्टफोलियो में गोल्ड का हिस्सा अधिकतम 30 फीसदी तक होना चाहिए. इसमें 10 फीसदी फिजिकल गोल्ड रख सकते हैं. बाकी 20 फीसदी ईटीएफ, गोल्ड बॉन्ड या इलेक्ट्रॉनिक मोड में निवेश करना चाहिए. अगर फिजिकल गोल्ड की जरूरत न हो तो निवेश ईटीएफ, गोल्ड बॉन्ड या इलेक्ट्रॉनिक मोड में ही करें, जिन्हें बेचना आसान होता है.

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