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चालू वित्त वर्ष में 1.80 लाख करोड़ का डूबा कर्ज वसूलेंगे बैंक! सरकार ने जताई उम्मीद

दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) के तहत कार्रवाई से सरकार को चालू वित्त वर्ष में बैंकों के 1.80 लाख करोड़ रुपये से अधिक के डूबे कर्ज की वसूली की उम्मीद है.

October 28, 2018 7:41 PM
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दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) के तहत कार्रवाई से सरकार को चालू वित्त वर्ष में बैंकों के 1.80 लाख करोड़ रुपये से अधिक के डूबे कर्ज की वसूली की उम्मीद है. वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि IBC के तहत कुछ बड़े खातों का निपटान किया जा रहा है.

अधिकारी ने एस्सार स्टील और भूषण पावर एंड स्टील जैसे कुछ निपटान मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि सफलता की जो दर हासिल हो रही है उससे हमें उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष में IBC और अन्य तरीकों से 1.80 लाख करोड़ रुपये से अधिक का डूबा कर्ज वसूला जा सकेगा, जो हमारे लक्ष्य से अधिक है.

भारतीय रिजर्व बैंक ने दिवाला प्रक्रिया के लिए जो 12 NPA के मामले भेजे हैं, बैंकों को उनसे ही एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की वसूली की उम्मीद है. बैंकों ने 2018-19 की पहली तिमाही में 36,551 करोड़ रुपये की वसूली की है. 2017-18 में बैंकों ने कुल 74,562 करोड़ रुपये की वसूली की थी.

इन 12 मामलों की सूची में दो बड़े मामले एस्सार स्टील और भूषण पावर एंड स्टील निपटान अंतिम चरण में थे. वहीं बिनानी सीमेंट और जेपी इन्फ्राटेक के मामले भी प्रक्रिया में हैं. बैंकों को उम्मीद है कि एस्सार स्टील के 49,000 करोड़ रुपये के ऋण मामले में वे करीब 86 प्रतिशत की वसूली कर पाएंगे. आर्सेलर मित्तलने एस्सार स्टील के लिए कुल 50,000 करोड़ रुपये की पेशकश की है. इसमें 8,000 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश भी शामिल है.

शुरु में भूषण पावर एंड स्टील के लिए जेएसडब्ल्यू स्टील ने 11,000 करोड़ रुपये, टाटा स्टील ने 17,000 करोड़ रुपये और लिबर्टी हाउस ने 18,500 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी. जेएसडब्ल्यू ने बाद में अपनी बोली को संशोधित कर 19,700 करोड़ रुपये कर दिया था.

बता दें कि IBC की प्रगती से संतुष्ट वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि अब लोग व्यापक रूप से समझ चुके हैं कि भारत में नियम बदल चुके हैं. अब बैंक आपका पीछा नहीं करेंगे, आपको उनके पीछे भागना होगा.

इसकी वजह से वसूली बढ़ी है. उन्होंने कहा कि वसूली सिर्फ राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) में निपटान की वजह से नहीं बढ़ी है, बल्कि इसमें इस डर की वजह से भी तेजी आई है कि यदि वे लाल रेखा लांघेंगे तो उन्हें IBC के तहत दंडित किया जा सकता है.

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