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दूध-दही-पानी और कपड़ा, अब स्वदेशी मॉडल को कहां तक ले जाएंगे बाबा रामदेव

FMCG में बड़ा मुकाम हासिल करने के बाद अब पतंजलि ने डेयरी प्रोडक्ट्स, फ्रोजन फूड, मिनरल वॉटर और सोलर बिजनेस में कदम रख दिया है.

September 17, 2018 10:25 AM
Baba Ramdev patanjali ayurveda, swedeshi model, new businesses of patanjali, new products of patanjaliयोग गुरू से सक्सेसफुल बिजनेसमैन के तौर पर स्थापित हो रहे बाबा रामदेव की नजर अपैरल सेक्टर पर भी है. (Reuters)

योग और आयुर्वेदिक दवाओं से शुरुआत करने वाली बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद अपने कारोबार को लगातार विस्तार दे रही है. FMCG में बड़ा मुकाम हासिल करने के बाद अब पतंजलि ने डेयरी प्रोडक्ट्स, फ्रोजन फूड, मिनरल वॉटर और सोलर बिजनेस में कदम रख दिया है. हाल ही में कंपनी ने गाय का दूध, दही, छाछ, पनीर, फ्रोजन मटर, मिक्स वेज, स्वीट कॉर्न जैसे कई प्रोडक्ट लॉन्च किए हैं और आगे भी करने वाली है.

योग गुरू से सक्सेसफुल बिजनेसमैन के तौर पर स्थापित हो रहे बाबा रामदेव की नजर अपैरल सेक्टर पर भी है. लेकिन क्या पतंजलि का यह विस्तार उसके मूल मंत्र आयुर्वेद और स्वदेशी की दिशा में ही है या फिर कंपनी अपने रास्ते से अलग जाती दिख रही है? एक सवाल यह भी उठ रहा है कि स्वदेशी कंपनियों के पैठ वाले नए सेगमेंट्स में पतंजलि अपने स्वदेशी मॉडल को कैसे आगे लेकर जाएगी?

पतंजलि की एक्सपर्टीज आयुर्वेद

इस बारे में FE Online Hindi ने जब ब्रांड गुरू हरीश बिजूर से बात की तो उन्होंने बताया, कि पतंजलि की एक्सपर्टीज आयुर्वेद है और कंपनी को उसी दिशा में आगे बढ़ना चाहिए. आयुर्वेद के दम पर पतंजलि ने एक नया सेगमेंट खड़ा किया और काफी कम वक्त में टर्नओवर 10,000 करोड़ पर पहुंचा दिया. पतंजलि की देखादेखी ही मल्टीनेशनल कंपनियों ने भी आयुर्वेद की ताकत को समझा और इस पर फोकस किया. लेकिन अब जिस दिशा में पतंजलि आगे बढ़ रही है, वह उसके मूल से बिल्कुल अलग है और अब देखना होगा कि कंपनी इसमें किस तरह की सट्रैटेजी बनाकर आगे बढ़ती है.

बड़ी मार्केट हिस्सेदारी वाले प्रोडक्ट्स पर रहे फोकस्ड

बिजूर के मुताबिक, पतंजलि को उन प्रोडक्ट्स पर फोकस्ड रहना चाहिए, जो मार्केट में बड़ी हिस्सेदारी के साथ दबदबा बनाए हुए हैं जैसे- दंत कांति, न कि उन पर जो नाममात्र मार्केट शेयर पर चल रहे हैं. कंपनी के ज्यादातर प्रोडक्ट्स आयुर्वेद पर बेस्ड हैं और इन प्रोडक्ट्स की मार्केट में काफी पैठ भी है. इन प्रोडक्ट्स ने ही कंपनी को एक ब्रांड के तौर पर स्थापित किया है. आयुर्वेद से अलग कैटेगरी में आगे बढ़ना कंपनी के जोखिम साबित हो सकता है.

अपैरल में कुछ यूनीक करे तो ही बनेगी बात

बाबा रामदेव ने एलान किया है कि कंपनी दिवाली तक अपैरल सेक्टर में कदम रख देगी और बच्चों के कपड़े, पैंट, शर्ट, धोती, पैंट, जीन्स और लंगोट से लेकर साड़ी तक बेचेगी. अपैरल सेगमेंट में पतंजलि क्या पहले से मौजूद ब्रांड्स को कड़ी टक्कर दे पाएगी, इस सवाल पर बिजूर ने कहा कि इस सेक्टर में बाहर की कंपनियों के अलावा कई स्वदेशी कंपनियां पहले से मौजूद हैं. पतंजलि भी गारमेंट सेक्टर में वही सब करेगी, जो मौजूदा कंपनियां कर रही हैं. कपड़े समान होंगे, बिक्री के माध्यम, डिस्ट्रीब्यूटर सभी वही होंगे. ऐसे में अगर पतंजलि अपैरल के साथ कुछ हटकर करती है तो ही कुछ बात बन सकती है. उदाहरण के तौर पर कपड़ों के साथ भी आयुर्वेद का तड़का लगा दे.

Baba Ramdev patanjali ayurveda, swedeshi model, new businesses of patanjali, new products of patanjaliImage source: PTI

नए सेगमेंट्स में पुरानी स्वदेशी कंपनियों के लिए चुनौती की संभावना कम
बिजूर ने यह भी कहा कि डेयरी प्रोडक्ट, अपैरल, मिनरल वॉटर जैसे नए सेगमेंट्स में तीन तरह की कंपनियां इस वक्त मौजूद हैं. पहली काफी पुरानी मल्टीनेशनल कंपनियां, दूसरी मल्टीनेशनल जैसी भारतीय कंपनियां और तीसरी पतंजलि जैसी कंपनियां. जहां तक मल्टीनेशनल कंपनियों की बात है तो उन्हें पतंजलि के आने से चुनौती मिलने की उम्मीद है लेकिन भारतीय कंपनियों के लिए ऐसी संभावना काफी कम है. इसकी वजह है कि इन सेगमेंट्स में भारतीय कंपनियां काफी अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं.

2006 में हुई थी शुरू

साल 2006 में शुरू हुई पतंजलि का सालाना रेवेन्यु आज 10,000 करोड़ रुपये का है. कंपनी का प्रमुख उद्देश्य योग और आयुर्वेद के जरिए एक स्वस्थ समाज का निर्माण करना था. पतंजलि आम जनता को मिलावट और नकली प्रोडक्ट्स से बचाते हुए 100 फीसदी नेचुरल और गुणवत्तापूर्ण प्रोडक्ट उपलब्ध कराना चाहती थी. पतंजलि ने कम वक्त में न केवल काफी अच्छा बिजनेस अंपायर खड़ा कर दिया बल्कि HUL और नेस्ले जैसी दिग्गज कंपनियों को कड़ी टक्कर भी दे रही है.

ऐसे बिगाड़ा मल्टीनेशनल्स का गणित

पतंजलि के प्रोडक्ट्स आज बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों के लिए चुनौती बन चुके हैं. जब पतंजलि ने अपने प्रोडक्ट्स की शुरुआत की, उस वक्त मार्केट में हिंदुस्तान यूनिलीवर, नैस्ले, पी एंड जी जैसी दिग्गज विदेशी कंपनियों का वर्चस्व था. लेकिन स्वदेशी के नारे और आयुर्वेद ने साइंटिफिक रिसर्च व मार्केटिंग के जरिए एफएमसीजी सेक्टर में कब्जा जमाने वाली दिग्गज कंपनियों के कारोबार को हिलाकर रख दिया. हालात ऐसे बन गए कि भारतीय बाजार में वर्चस्व बनाए रखने के लिए पतंजलि की देखादेखी HUL, प्रॉक्टर एंड गैंबल जैसी कंपनियों को भी आयुर्वेद का सहारा लेना पड़ा. इसकी वजह लोगों का आयुर्वेद की तरफ बढ़ रहा झुकाव है.

नील्सन 2017 की रिपोर्ट के मुताबिक आयुर्वेदिक हेल्थ प्रोडक्ट का मार्केट साल 2021 तक 100 करोड़ डॉलर का होगा. कस्टमर अब पर्सनल केयर में नेचुरल और ऑर्गेनिक प्रोडक्ट पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं.

साल दर साल बढ़ा रेवेन्यु

2009-10 में कंपनी की बिक्री का आंकड़ा 162.67 करोड़ रुपये का रहा. धीरे-धीरे पतंजलि प्रोडक्ट्स ने मार्केट में अपनी पकड़ बनानी शुरू की. कंपनी के बिजनेस और प्रॉफिट में साल दर साल बढ़ोत्तरी होने लगी और 2013-14 में यानी केवल 4 सालों के अंदर कंपनी की बिक्री 162 करोड़ से 1000 करोड़ रुपये पर पहुंच गई. इसके बाद कंपनी की ब्रिकी हर साल डबल होती गई. पतंजलि ने 2014-15 में 2006.75 करोड़, 2015-16 में 5000 करोड़ और 2016-17 में 10,000 करोड़ रुपये के रेवेन्यु का आंकड़ा छुआ.

Baba Ramdev patanjali ayurveda, swedeshi model, new businesses of patanjali, new products of patanjaliImage source: Patanjali store

किन-किन सेगमेंट में हैं पतंजलि प्रोडक्ट्स

पतंजलि ने आयुर्वेदिक दवाओं से शुरुआत की थी. उसके बाद कंपनी एफएमसीजी मार्केट में उतरी. हेल्थ केयर, फूड प्रोडक्ट्स, होम केयर, पर्सनल केयर सेगमेंट में पतंजलि प्रोडक्ट मौजूद हैं और अब कंपनी डेयरी और फ्रोजन फूड सेगमेंट में भी कदम रख चुकी है.

कितना फैला है कारोबार

इस वक्त पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के पूरे देश में 47,000 से ज्यादा रिटेल स्टोर्स और 3500 से ज्यादा डिस्ट्रीब्यूटर हैं. इसके अलावा कंपनी के प्रोडक्ट्स रिलायंस रिटेल, हाइपर सिटी जैसे मॉर्डन ट्रेड स्टोर्स और आॅनलाइन भी मौजूद हैं. 18 राज्यों में कंपनी के वेयरहाउस मौजूद हैं, वहीं 6 राज्यों में फैक्ट्रियां लगाया जाना प्रस्तावित है. पतंजलि अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, रूस, दुबई और कुछ यूरोपीय देशों के मार्केट में भी उतर चुकी है. अब कंपनी की योजना बड़े ग्लोबल मार्केट्स में कारोबार का विस्तार करने की है.

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