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आम्रपाली ग्रुप ने होम बायर्स को धोखा देने के लिए 1 रु/sq ft पर बुक किए थे फ्लैट, चपरासी-ड्राइवर के नाम पर बनाईं 23 कंपनियां

फॉरेंसिक ऑडिट की वजह से संकट में फंसे आम्रपाली समूह के कई नए राज सामने आ रहे हैं.

January 17, 2019 1:14 PM
Amrapali booked flats on the name of peons, drivers for Re 1/sq ft to divert home buyers' moneyयह फ्लैट खरीदारों का पैसा था, जो आम्रपाली समूह ने कथित रूप से अपनी सहयोगी कंपनियों के शेयर खरीदने तथा संपत्ति बनाने पर खर्च किया था. (Image: amrapali.in)

फॉरेंसिक ऑडिट की वजह से संकट में फंसे आम्रपाली समूह के कई नए राज सामने आ रहे हैं. इस काम के लिए नियुक्त ऑडिटरों ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 500 से अधिक लोगों के नाम पर महंगे-महंगे फ्लैट्स की बुकिंग मात्र एक रुपये, पांच रुपये या 11 रुपये प्रति वर्गफुट के भाव पर की गई थी.

ऑडिट में यह भी सामने आया है कि ड्राइवरों, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों और ऑफिस बॉय का काम करने वालों के नाम पर 23 कंपनियां बनाई गई थीं. ये कंपनियां आम्रपाली के कंजोर्शियम का हिस्सा थीं और घर खरीदारों के पैसे को इधर उधर करने के लिए इनको आगे किया गया था.

12 दिसंबर को दिया था जांच का आदेश

कोर्ट ने 12 दिसंबर को दो फॉरेंसिक ऑडिटरों को करीब 3,000 करोड़ रुपये इधर-उधर करने की जांच करने को कहा था. यह फ्लैट खरीदारों का पैसा था, जो आम्रपाली समूह ने कथित रूप से अपनी सहयोगी कंपनियों के शेयर खरीदने तथा संपत्ति बनाने पर खर्च किया था.

655 लोगों के नाम बेनामी बुकिंग

दो फॉरेंसिक ऑडिटरों ने शीर्ष अदालत को बताया कि उनके सामने 655 ऐसे लोगों के नाम आए हैं, जिनके नाम पर फ्लैट की ‘बेनामी’ बुकिंग की गईं. उनके 122 पतों पर वैसा कोई व्यक्ति नहीं मिला. फॉरेंसिक आॅडिटरों की अंतरिम रिपोर्ट जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस यू यू ललित की पीठ को सौंपी गई.

CFO को कोर्ट ने लिया आड़े हाथों

रिपोर्ट में कहा गया है कि आम्रपाली ग्रुप मुख्य वित्त अधिकारी (CFO) चंदर वाधवा ने पिछले साल 26 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश होने से सिर्फ तीन दिन पहले 4.75 करोड़ रुपये अज्ञात लोगों को स्थानांतरित किए. फॉरेंसिक ऑडिटर पवन कुमार अग्रवाल ने पीठ से कहा कि मार्च, 2018 तक वाधवा के खाते में 12 करोड़ रुपये थे. उसके बाद उन्होंने एक करोड़ रुपये अपनी पत्नी के नाम ट्रांसफर किए. 26 अक्टूबर को अदालत के समक्ष पहली बार पेश होने से तीन दिन पहले उन्होंने 4.75 करोड़ रुपये अज्ञात लोगों को ट्रांसफर किए.

अग्रवाल की इस बात के बाद पीठ ने सुप्रीम कोर्ट में मौजूद वाधवा की खिंचाई की और उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की चेतावनी दी. अदालत ने कहा कि आप न्याय की राह में अड़ंगा डाल रहे हैं. आप को अच्छी तरह मालूम था कि आप से सवाल किए जाएंगे. इसलिए आपने पैसा दूसरी जगह भेज दिया. आप सात दिन में वह पैसा वापस लाइए. 23 अक्टूबर 2018 के बाद पैसा ट्रांसफर करने का आपका कोई काम नहीं था. हम आप के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई कर सकते हैं.

I-T डिपार्टमेंट के आदेश को पेश करने का दिया ऑर्डर

पीठ ने फॉरेंसिक ऑडिटरों से इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के उस आदेश को पेश करने को कहा, जिसमें विभाग ने 2013-14 में छापेमारी और जब्ती कार्रवाई में 200 करोड़ रुपये के बोगस बिल और वाउचर जब्त किए थे. साथ ही उस समय आम्रपाली समूह के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर अनिल कुमार शर्मा से जो एक करोड़ रुपये तथा निदेशक शिव प्रिया से एक करोड़ रुपये मिले थे.

एक अन्य फॉरेंसिक ऑडिटर रवि भाटिया ने बताया कि आम्रपाली समूह ने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के आदेश को चुनौती दी थी, जिसने उस पैराग्राफ को हटा दिया जिसमें कच्चे माल की खरीद के लिए 200 करोड़ रुपये के बोगस बिल और वाउचरों का जिक्र था.

इस मामले की सुनवाई की अगली तारीख 24 जनवरी तय की गई है.

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