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Amazon पर लगा 25,000 रुपये जुर्माना, ‘कंट्री ऑफ ओरिजिन’ की जरूरी जानकारी छुपाने पर एक्शन

अमेजन के ऊपर अपने प्लेटफॉर्म पर कई जरूरी जानकारियां न दिखाने की वजह से 25 हजार का जुर्माना लगाया गया है.

November 26, 2020 2:10 PM
Amazon fined for not displaying mandatory info about products know here about country of originकोई भी प्रॉडक्ट ऑफलाइन बिक रहा या ऑनलाइन, इसके लिए कई जानकारियां दिखाना अनिवार्य हैं.

ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन (Amazon) के ऊपर अपने प्लेटफॉर्म पर कई जरूरी जानकारियां न दिखाने की वजह से 25 हजार का जुर्माना लगाया गया है. कंज्यूमर अफेयर्स मिनिस्ट्री द्वारा जारी ऑफिसियल आदेश के मुताबिक अमेजन ने अपनी ई-कॉमर्स वेबसाइट पर कुछ उत्पादों के कंट्री ऑफ ओरिजिन यानी उनका निर्माण कहां हुआ है, की जानकारी पब्लिश नहीं किया है. पिछले महीने कंज्यूमर अफेयर्स मिनिस्ट्री ने दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनियों फ्लिपकार्ट और अमेजन को इन जानकारियों को नहीं दिखाने की वजह से नोटिस जारी किया था. मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फ्लिपकार्ट के खिलाफ किसी भी नियम के उल्लंघन का मामला सामने आया है.

बेंगलूरु स्थित अमेजन सेलर सर्विस के साथ-साथ उसके सभी निदेशकों पर लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट, 2009 और लीगल मीट्रोलॉजी (पैकेज कमोडिटीज) रूल्स, 2011 के तहत 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है.

क्या है कानून?

लीगल मीट्रोलॉजी एक्ट 2009 के सेक्शन 18(1) और लीगल मीट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटी) रूल्स, 2011 के सेक्शन 6(10) के तहत उत्पादों का ‘कंट्री ऑफ ओरिजिन’ दिखाना अनिवार्य है. इसके उल्लंघन पर लीगल मीट्रोलॉजी एक्ट, 2009 के सेक्शन 36(1) के तहत सजा मिलेगी. पहली बार नियमों का उल्लंघन साबित होने पर 25 हजार रुपये तक जुर्माना और दूसरी बार 50 हजार रुपये का जुर्माना या कैद या दोनों मिल सकती है. जनवरी 2018 में केंद्र सरकार ने लीगल मीट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज) रूल्स, 2011 में संशोधन किया था. इस संशोधन के तहत सभी मैनुफैक्चरर्स, इंपोर्टर्स, पैकर्स और ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए ‘कंट्री ऑफ ओरिजिन’ दिखाना अनिवार्य कर दिया गया. इस साल जून में डीपीआईआईटी ने अमेजन और फ्लिपकॉर्ट जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों से अपने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इस जानकारी को दिखाने के लिए विचार आमंत्रित किए थे.

क्या है ‘कंट्री ऑफ ओरिजिन’ का मतलब

कंट्री ऑफ ओरिजिन का मतलब यह है कि उत्पाद किस देश में बना है. इससे कोई मतलब नहीं कि इसे शिप कहां से किया गया. जैसे कि कोई चाइनीज मोबाइल हैंडसेट अगर भारत में वियतनाम के रास्ते भेजा जाता है तो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इसका कंट्री ऑफ ओरिजिन वियतनाम की बजाय चीन दिखाएगा.

एक खास बात और है कि इस प्रावधान के तहत वही ‘कंट्री ऑफ ओरिजिन’ रहेगा जहां अंतिम उत्पाद तैयार हुआ है. जैसे कि मोबाइल की बात करें तो उसके चिप, बैटरी जैसे कई पार्ट्स अलग-अलग देशों में तैयार होते हैं लेकिन अंतिम रूप से इन्हें जिस देश में असेंबल कर मोबाइल तैयार किया जाता है, ‘कंट्री ऑफ ओरिजिन’ वही होगा.

यह प्रावधान सिर्फ अमेजन और फ्लिपकॉर्ट जैसे प्राइवेट ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के लिए ही नहीं लागू है बल्कि सरकारी ई-मार्केटप्लेस पोर्टल पर भी सभी विक्रेताओं के लिए ‘कंट्री ऑफ ओरिजिन’ दिखाना अनिवार्य है. इस सरकारी प्लेटफॉर्म के जरिए सरकारी विभाग खरीदारी करती हैं.

ये जानकारियां दिखानी अनिवार्य

कोई भी प्रॉडक्ट ऑफलाइन बिक रहा या ऑनलाइन, इसके लिए कई जानकारियां दिखाना अनिवार्य हैं. जैसे कि-अधिकतम खुदरा भाव (एमआरपी), डेट ऑफ एक्सपायरी, नेट क्वांटिटी, कंज्यूमर केयर डिटेल्स और कंट्री ऑफ ओरिजिन. मिनिस्ट्री के मुताबिक अगर नोटिस ऑर्डर मिलने के सात दिनों के भीतर कंपनियां संतोषजनक जवाब नहीं देती है तो उनके खिलाफ बिना किसी नोटिस के कानूनी कार्रवाई शुरू की जा सकती है.

प्रावधान सख्ती से लागू कराने के निर्देश

जुलाई में उपभोक्ता मामलों के मंत्रालयों ने सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया था कि कंपनियों और ई-कॉमर्स प्लेयर्स के लिए सभी उत्पादों पर ‘कंट्री ऑफ ओरिजिन’ दिखाने के प्रावधान को सख्ती से लागू कराया जाए. यह प्रावधान दो साल पहले जनवरी 2018 से सभी मैनुफैक्चरर्स, इंपोर्टर्स, पैकर्स और ई-कॉमर्स प्लेयर्स के लिए लागू किया गया था लेकिन इस साल जुलाई में पूर्व केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने सभी राज्य सरकारों से ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए इसे सख्ती से लागू करवाने के लिए कहा था. यह फैसला ऐसे समय में आया था जब लद्दाख में भारत और चीन के बीच बढ़ते तनाव के कारण देश भर में चीनी समान के बहिष्कार की आवाज उठ रही थी. यह फैसला एक तरह से आत्मनिर्भर भारत की मुहिम को बढ़ावा देता है.

30 सितंबर तक फिक्स्ड की गई थी डेडलाइन

डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटर्नल ट्रेड (डीपीआईआईटी) ने अगस्त में सभी ई-कॉमर्स कंपनियों को अपने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मौजूद सभी प्रॉडक्ट के लिए ‘कंट्री ऑफ ओरिजिन’ की जानकारी 30 सितंबर तक देने को कहा था. हालांकि उस समय ई-कॉमर्स कंपनियों का मानना था कि 30 सितंबर की डेडलाइन संभव नहीं है और नए प्रॉडक्ट्स के लिए यह जानकारी इस समय तक उपलब्ध कराई जा सकती है लेकिन पुराने उत्पादों के लिए और भी समय लग सकता है. इससे पहले केंद्र सरकार इसे 1 अगस्त से ही अनिवार्य करने की सोच रही थी लेकिन ऑनलाइन रिटेलर्स ने इसे असंभव बताया था.

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