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Happiest Minds IPO: शेयर बाजार में 13 साल बाद फिर चमके अशोक सूता, 77 की उम्र में दिखाया ‘हैप्पिएस्ट माइंड’ का दम

Happiest Minds Founder Ashok Soota: अशोक सूता 2007 में माइंडट्री (Mindtree) का आईपीओ लेकर आए थे. माइंडट्री के IPO को 103 गुना ज्यादा बोलियां मिली थीं.

Updated: Sep 15, 2020 11:11 AM
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Happiest Minds Founder Ashok Soota: हैपिएस्ट माइंड्स के आईपीओ (IPO) को रिटेल निवेशकों का शानदार रिस्पांस मिला. 700 करोड़ रुपये का यह आईपीओ 151 गुना सब्सक्राइब हुआ. इस कंपनी के फाउंडर 77 साल के अशोक सूता हैं. अशोक सूता ने पहली बार यह कमाल नहीं किया है. 13 साल पहले भी उन्होंने ऐसा ही कमाल किया था, जब माइंडट्री (Mindtree) का आईपीओ लेकर आए थे. 2007 में उनकी कंपनी माइंडट्री के आईपीओ को 103 गुना ज्यादा बोलियां मिली थी. बाद में उन्होंने अपनी नई कंपनी हैप्पिएस्ट माइंड बना ली थी. आखिर कौन हैं अशोक सूता, जिनके नाम से निवेशकों को इतना भरोसा है. हैप्पिएस्ट माइंड्स की शुरुआत अप्रैल 2011 में अशोक सूता द्वारा की गई थी. हैप्पीएस्ट माइंड्स का मुख्यालय बेंगलुरु में है.

कौन हैं अशोक सूता?

अशोक सूता भारत की इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी सर्विसेज इंडस्ट्री के जाने माने नाम हैं. सूता ने आईआईटी-रुड़की से इंजीनियरिंग की है. इन्होंने तीन बड़ी आउटसोर्सिंग कंपनियों के प्रमुख की भूमिका निभाई है. इनमें से एक है दिग्गज कंपनी विप्रो लिमिटेड और बाकी दो पब्लिक कंपनियां हैं. अब उनकी स्टार्टअप कंपनी हैपिएस्ट माइंड्स को इतना अच्छा रेस्पॉन्स मिला है की ये आईपीओ भारत के सबसे सफल आईपीओ में शामिल हो गया है. अब हैपिएस्ट माइंड्स के 700 करोड़ रुपये के आईपीओ में 351 करोड़ शेयरों के लिए बोली लगी. जबकि सिर्फ 2.33 करोड़ शेयर ऑफर किए गए थे.

माइंडट्री का IPO भी हुआ था सुपर हिट

1999 में 10 अन्य लोगों के साथ मिलकर माइंडट्री की स्थापना की थी. अशोक सूता 13 साल पहले यानी 2007 में माइंडट्री का आईपीओ लेकर बाजार में आए थे. 2007 में उनकी कंपनी माइंडट्री के आईपीओ को 103 गुना ज्यादा बोलियां मिली थीं. लेकिन इसके बाद कंपनी के फाउंडर्स में मतभेद उभरने के बाद सूता ने खुद को माइंडट्री से अलग कर लिया. 2011 में सूता ने हैपिएस्ट माइंड्स की स्थापना की. हैपीएस्ट माइंड्स की शुरूआत अप्रैल 2011 में अशोक सूता द्वारा की गई थी. हैप्पीएस्ट माइंड्स का मुख्यालय बेंगलुरु में है.

डिजिटल कारोबार पर फोकस

हैप्पिएंस्ट माइंड के ही अनुसार, इसका 97 फीसदी रेवेन्यू डिजिटल कारोबार से आता है, जो इंफोसिस, माइंडट्री और कॉग्निजेंट जैसी कई कंपनियों की तुलना में काफी अधिक है. इन कंपनियों ने औसत डिजिटल रेवेन्यू 40-50 फीसदी होता है. यह डिजिटल बिजनेस सर्विसेज, प्रोडक्ट इंजीनियरिंग सर्विसेज और इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट व सुरक्षा सेवाओं की पेशकश करती है. कोविड-19 और लॉकडाउन का उनके 76 फीसदी रेवेन्यू पर कोई असर नहीं पड़ा है क्‍योंकि इसमें आधे से ज्यादा रेवेन्यू एजुकेशन टेक्‍नोलॉजी और हाई-टेक सेक्टर से आता है.

कैसा है हैपिएस्ट माइंड्स का बिजनेस

हैपिएस्ट माइंड्स पिछले तीन साल में 21 फीसदी की सालाना दर से बढ़ी है, जबकि आईटी इंडस्ट्री की औसत ग्रोथ फीसदी के ही आस पास है. वित्त वर्ष 2020 में कंपनी की बिक्री 714 करोड़ रुपये रही थी, जो वित्त वर्ष 2019 में 601 करोड़ रुपये थी. वित्त वर्ष 2020 में कंपनी का मुनाफा 71 करोड़ रुपये रहा, जो वित्त वर्ष 2019 में 14.2 करोड़ रुपये रहा था.

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