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  1. बजट में मिली 4 बड़ी राहत फिर भी शेयर बाजार हुआ नर्वस, आगे कैसी रहेगी चाल

बजट में मिली 4 बड़ी राहत फिर भी शेयर बाजार हुआ नर्वस, आगे कैसी रहेगी चाल

आम बजट के बाद कैसी रहेगी बाजार की चाल

July 6, 2019 8:43 AM
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आम बजट में के बाद शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आई है. सेंसेक्स करीब 395 अंक और निफ्टी में भी 116 अंकों की गिरावट आई. हालांकि बजट में बैंकिंग सेक्टर से लेकर विदेशी निवेश बढ़ाने के उपायों पर जोर दिया गया है. एक्सपर्ट का कहना है कि इस बजट में कंजम्पशन को बूसट देने का न तो कोई मजबूत रोडमैप देखा गया न ही निवेश को बढ़ाने को लेकर. वहीं मिनिमम पब्लिक शेयर होल्डिंग की सीमा भी बढ़ाने की बात कही गई है. ऐसे में बाजार में इसे लेकर ज्यादा उत्साह नहीं दिखा. आगे बाजार को किसी मजबूत सेंटीमेंट की जरूरत होगी.

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बजट में बाजार को लेकर क्या हुआ

  • सरकारी बैंकों में रीकैप प्लान के तहत 70 हजार करोड़ डाले जाने का एलान.
  • लिस्टेड कंपनियों की मिनिमम पब्लिक शेयर होल्डिंग की सीमा 25 फीसदी से बढ़ाकर 35 फीसदी किए जाने की घोषणा.
  • विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए केवाईसी नियम सरल बनाया जाएगा.
  • सामाजिक प्रतिष्ठानों और स्वैच्छिक संगठनों की कैपिटल मार्केट में हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए लिस्ट करने का प्रस्ताव.
  • फिस्क्ल डेफिसिट का टारगेट 3.3 फीसदी.
  • सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स को डेरिवेटिव विकल्प के सौदों में सेटलमेंट और स्ट्राइक प्राइस तक सीमीत कर दिया गया है

बाजार ने क्यों किया निराश

कैपिटल एम के रिसर्च हेड रोमेश तिवारी का कहना है कि बजट में डोमेस्टिक इकोनॉमी को बूस्ट देने का कोई क्लीयर रोडमैप नहीं दिखा. कंजम्पशन और निवेश को कैसे बूस्ट मिलेगा, यह साफ नहीं हुआ. इससे निवेशकों को निराशा हुई है.

वहीं मिनिमम शेयर होल्डिंग बढ़ाने के बजट प्रस्ताव से भी बाजार को आशंका हुई कि लिस्टेड कंपनियों की ओर से बाजार में एक साथ अतिरिक्त शेयर लाने से लिक्विडिटी क्राइसिस हो सकती है. माना जा रहा है कि सरकार की इस घोषणा से टीसीएस, विप्रो और डीमार्ट जैसी बड़ी कंपनियों समेत कुल 1174 लिस्टेड कंपनियों को अपने प्रवर्तकों की कुल 3.87 लाख करोड़ रुपये शेयरधारिता कम करनी होगी.

एसटीटी पर ट्रेडर्स को राहत

हालांकि ट्रेडिंग बेल्स के सीईओ और को-फाउंडर अमित गुप्ता ने कहा कि एसटीटी को लेकर सरकार की घोषणा ट्रेडर्स के लिए राहत की खबर है. अब उन्हें एक्सपायरी से पहले इन-द-मनी ऑप्शन बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं होगी. एसटीटी 2004 के केंद्रीय बजट में पेश किया गया था और उसी साल 1 अक्टूबर से लागू हुआ था. एसटीटी वह टैक्‍स है जो उन कैपिटल गेन टैक्स को चुराने से बचाता है जो कि लोग शेयरों की बिक्री पर अपने मुनाफा छुपाकर बचाते थे.

बैंकिंग, हाउसिंग सेक्टर में दिख सकती है तेजी

एपिक रिसर्च के सीईओ नदीम मुस्तफा का कहना है कि बैंकिंग सेक्टर को लेकर बजट पॉजिटिव रहा है. 70 हजार करोड़ के रीकैप प्लान से आगे सरकारी बैंकों में तेजी दिख सकती है. एनबीएफसी में भी लिक्विडिटी बढ़ाने पर सरकार का फोकस दिखा है, जो इस समय सबसे बड़ी समस्या है. कॉरपोरेट टैक्स पर राहत, अफोर्डेबल हाउसिंग पर फोकस बाजार को आगे राहत दे सकते हैं.

आगे कैसी रहेगी बाजार की चाल

एक्सपर्ट का मानना है कि बाजार की प्रमुख समस्या कंजम्पशन, निजी निवेश और एक्सपोर्ट में सुस्ती के अलावा लिक्विडिटी की कमी है. इन बातों पर जबतक स्थिति साफ नहीं होती, बाजार में ज्यादा रैली की उम्मीद नहीं है. आगे बाजार की नजर मॉनसून पर होगी. जब तक बाजार को कोई मजबूत सेंटीमेंट नहीं मिलता है, बाजार दायरे में कारोबार करता दिख सकता है. फिलहाल उपर की ओर निफ्टी को 12050 पर रजिस्टेंस मिल रहा है. वहीं नीचे की ओर 11650 के स्तर पर सपोर्ट है.

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