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1 माह में 2 बार लोअर सर्किट, कुछ दिनों के लिए ट्रेडिंग बंद करने से पटरी पर आएगा शेयर बाजार?

अभी एक बहस यह छिड़ गई है कि शेयर बाजार में कुछ दिनों के लिए ट्रेडिंग रोक देनी चाहिए.

March 23, 2020 4:34 PM
will regulators should be stop trading for few days in stock market, 2 lower circuit in march 2020, biggest intraday fall in sensex, sensex and nifty falling, COVID-19, coronavirus impact on stock marketअभी एक बहस यह छिड़ गई है कि शेयर बाजार में कुछ दिनों के लिए ट्रेडिंग रोक देनी चाहिए.

सोमवार 23 मार्च को शेयर बाजार में पहले लोअर सर्किट लगा. ट्रेडिंग दोबोरा शुरू होने के बाद अंतिम मिनटों में इंट्राडे के लिहाज से सबसे बड़ी गिरावट आ गई. सेंसेक्स करीब 4000 अंक टूट गया. मार्च में यह दूसरी बार है, जब सेंसेक्स और निफ्टी में लोअर सर्किट लगा हो. सिर्फ 1 महीने में सेंसेक्स में करीब 37 फीसदी और निफ्टी में भी 37 फीसदी की गिरावट आ चुकी है. ​निफ्टी बैंक इंडेक्स इस दौरान 45 फीसदी टूट गया. इसके बाद से एक बहस यह छिड़ गई है कि शेयर बाजार में कुछ दिनों के लिए ट्रेडिंग रोक देनी चाहिए. क्या ऐसा करने से बाजार पटरी पर आ जाएगा, इसका क्या असर हो सकता है….

सैमको सिक्युरिटीज के फाउंडर एंड सीईओ जिमित मोदी का कहना है कि अगर घरेलू शेयर बाजार को पूरी तरह से बंद किया जाता है तो वैश्विक दृष्टिकोण से न सिर्फ बाजार की प्रतिष्ठा को नुकसान होगा, बल्कि इससे निवेशकों का आत्मविश्वास भी कमजोर होगा. मौजूदा समय में जब भारत सहित अधिकांश बाजार ऑनलाइन कारोबार कर रहे हैं. ऐसे में अगर सेंसेक्स और निफ्टी में कारोबार बंद होता है तो इसका सेंटीमेंट यह जाएगा कि हमारे पास बाकी दुनिया की तुलना में न्यूनतम बीसीपी यानी बिजनेस कांटीन्यूटी प्लान भी नहीं है.

उनका कहना है कि बल्कि इसकी जगह बाजार में ट्रेडिंग के समय को कम किया जा सकता है. स्पेकुलेशन को कठिन बनाने के लिए डेरिवेटिव और कैश सेगमेंट में धीरे-धीरे मार्जिन बढ़ाए जाने चाहिए.

ये सवाल भी हैं सामने

उनका कहना है कि मौजूदा स्थिति में अगर बाजार को 5 दिनों के लिए बंद भी कर दिया जाता है तो इन 5 दिनों का रिस्क कैसे कवर होगा. इन 5 दिनों के बाद यह 20 से 30 फीसदी की बड़ी गिरावट के साथ खुल सकता है. यानी इससे निवेशकों का नुकसान और बड़ा हो सकता है. वहीं, फिर से बाजार खोलने में घबराहट की वजह से ब्रोकर, क्लाइंट, क्लीयरिंग कॉर्पोरेशन, एक्सचेंज के लिए खुलने वाले सिस्टमिक रिस्क का क्या होगा?

पूंजी बाजार, रियल एस्टेट की तुलना में तरलता के लिए जाना जाता है. जैसे कि अगर आपको अपने निवेश पर 2 दिनों में लिक्विडिटी की आवश्यकता होती है, तो शेयर बाजार में यह संभव है. आपको अपना पैसा मिल सकता है. लेकिन बाजार बंद होने पर निवेशकों के सामने जरूरत पर ये भी दिक्कत आएगी.

इन दिनों कैपिटल मार्केट बैंकों और बैंकिंग सेवाओं के लिए एक प्रॉक्सी के रूप में काम करते हैं. सभी सेटलमेंट इंटरकनेक्टेड हैं. तो क्या बाजार बंद किए जाने की स्थिति में बैंकों को भी बंद किया जाएगा.

हेल्थ और वेल्थ का उदाहरण

जिमित मोदी ने हेल्थ और वेल्थ का उदाहरण देते हुए भी इसे समझाया है. उनका कहना है कि जिस तरह से हास्पिटल या डॉक्टर की निगरानी में लोगों के स्वास्थ्य की देखभाल होती है या उसे और बेहतर करने की जिम्मेदारी होती है. उसी तरह से कैपिटल मार्केट की जिम्मेदारी लोगों के वेल्थ की देखभाल के लिए होती है. हालांकि हेल्थ और वेल्थ की तुलना नहीं कर सकते, लेकिन फिर भी वेल्थ भी जरूरी है.

जिस तरह से अगर मरीज को 5 दिन के लिए छोड़ दिया जाए तो पता नहीं चलता कि बीच में किस तरह की दवा की जरूरत है. उसी तरह से मार्केट को भी छोड़ा नहीं जा सकता है. माके्रट चलता रहेगा तो जो जरूरत होगी, उस तरह के उपाय रेगुलेटर द्वारा किया जाता रहेगा.

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