मुख्य समाचार:

डेट फंड: कुछ दिन, कुछ माह से कई साल तक; जैसी जरूरत वैसे लगाएं पैसा

Invest in Debt Mutual Fund: म्युचुअल फंड सिर्फ इक्विटी फंड के माध्यम से ही ग्रोथ नहीं देते हैं, बल्कि वे डेट फंड्स के जरिए बैलेंस और स्टेबिलिटी भी लेकर आते हैं.

Updated: Sep 16, 2020 8:47 AM
Debt Mutual Fund, Mutual fund, Equity Mutual funds, debt funds are liquid and safe, ultra short term fund, low duration fund, short term fund, mid duration fund, long duration fund, invest according to your goal and time horizonInvest in Debt Mutual Fund: म्युचुअल फंड सिर्फ इक्विटी फंड के माध्यम से ही ग्रोथ नहीं देते हैं, बल्कि वे डेट फंड्स के जरिए बैलेंस और स्टेबिलिटी भी लेकर आते हैं.

Invest in Debt Mutual Fund: म्युचुअल फंड सिर्फ इक्विटी फंड के माध्यम से ही ग्रोथ नहीं देते हैं, बल्कि वे डेट फंड्स के जरिए बैलेंस और स्टेबिलिटी भी लेकर आते हैं. इतना ही नहीं डेट फंड सुरक्षित और लिक्विड भी हैं. डेट फंड्स के जरिए बैंक एफडी आदि अन्य पारंपरिक निवेश विकल्पों की तुलना में ज्यादा  रिटर्न भी मिल सकता है. इस आर्टिकल में हम तीन मुख्य बिंदुओं पर बात करने वाले हैं. ये तीन बाते हैं….. आपके पोर्टफोलियो में डेट फंड्स की भूमिका, अपने वित्तीय लक्ष्यों के अनुरूप सही डेट फंड का चयन करना, डेट फंड में निवेश करना.

1. आपके पोर्टफोलियो में डेट फंड्स की भूमिका

डेट फंड मामूली जोखिम और नियमित आय के साथ निवेशक के छोटे व मध्यम अवधि के लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करते हैं. इसके लिए कॉरपोरेट डेट सिक्योरिटीज (बॉन्ड व डिबेंचर) और मनी मार्केट के इंस्ट्रूमेंट्स (कमर्शियल पेपर, बैंक जमा का प्रमाण पत्र) जैसे विभिन्न निश्चित आय के साधनों में निवेश करता है. फंड कई सारे बॉरोअर्स में निवेश करता है, जिससे किसी एक कंपनी में ओवर एक्सपोजर का जोखिम घट जाता है. नियमित आय चाहने वाले निवेशकों के लिए भी डेट फंड काफी उपयुक्त है, क्योंकि ये कम अस्थिर होते हैं. कोई भी अपनी विशिष्ट समयसीमा, लिक्विडिटी की जरूरत और जोखिम लेने की क्षमता के आधार पर डेट फंड का चुनाव कर सकता है.

2. करें सही डेट फंड का चुनाव

निवेशक को सबसे पहले हर एक फंड के प्रमुख जोखिमों को समझ लेना चाहिए. आइए जानते हैं कि ये क्या हैं.

(क) लिक्विडिटी रिस्क

नकदी पैदा करने के लिए सिक्योरिटीज को लिक्विड करते समय रिटर्न पर जोखिम ही लिक्विडिटी रिस्क है. लिक्विडिटी रिस्क इंस्ट्रूमेंट की जटिलता, इसकी रेटिंग और मेच्योरिटी की अवधि पर निर्भर करता है.

(ख) क्रेडिट रिस्क

मेच्योरिटी पर डिफॉल्ट होने या ब्याज अथवा मूलधन का भुगतान नहीं होने का जोखिम क्रेडिट रिस्क कहलाता है.

(ग) ड्यूरेशन रिस्क

अर्थव्यवस्था में ब्याज दरों में बदलाव होने पर किसी बॉन्ड के मूल्य में परिवर्तन का जोखिम ही ड्यूरेशन रिस्क कहलाता है. सामान्य तौर पर, यह जोखिम इंस्ट्रूमेंट की अवधि के साथ बढ़ता है.

अधिकतर डेट फंड्स में इन सभी जोखिमों का कुछ अंश रहता है. हालांकि, आमतौर पर इनमें से कोई एक जोखिम हावी रहता है, जो उत्पाद की प्रकृति पर निर्भर करता है. आइए जानते हैं कि कौनसे उत्पाद पर किस परिस्थिति में कैसा जोखिम हावी रहता है.

कुछ दिन से कुछ महीने

परिस्थिति: इमरजेंसी फंड, सरप्लस मनी, बचत खाते का विकल्प, घरेलू खर्च

फंड टाइप: ओवरनाइट या लिक्विड

डोमिनेंट रिस्क: लिक्विडिटी रिस्क

कुछ महीनों से एक साल तक

परिस्थिति: घर का रखरखाव, नए गैजेट्स, एडवांस टैक्स

फंड टाइप: अल्ट्रा शॉर्ट ड्यूरेशन फंड, शॉर्ट ड्यूरेशन, लो ड्यूरेशन, मनी मार्केट

डोमिनेंट रिस्क: लिक्विडिटी रिस्क

1 साल से 3 साल तक

परिस्थिति: कार खरीद, घर के लिए डाउन-पेमेंट

फंड टाइप: फ्लोटर, बैंकिंग और पीएसयू, एफएमपी, मध्यम अवधि, मध्यम से लंबी अवधि, कॉर्पोरेट बॉन्ड

डोमिनेंट रिस्क: ड्यूरेशन रिस्क का मध्यम स्तर

3 साल से 5 साल तक

परिस्थिति: दूसरे उत्पादों से रिटर्न को सप्लिमेंट करने के लिए

फंड टाइप: क्रेडिट रिस्क

डोमिनेंट रिस्क: क्रेडिट रिस्क

5 साल से अधिक

परिस्थिति: बच्चों की शिक्षा और रिटायरमेंट जैसे दीर्घकालिक लक्ष्यों पाने के लिए

फंड टाइप: गिल्ट और लंबी अवधि

डोमिनेंट रिस्क: ड्यूरेशन रिस्क

डेट फंड रिटर्न पैदा करने के लिए क्रेडिट या अवधि में से किसी एक का उपयोग करके निवेशक के लिए रिटर्न जनरेट करते हैं.

(क) क्रमिक रणनीति (इसमें क्रेडिट रिस्क हावी रहता है) ब्याज दर जोखिम को मध्यम स्तर पर रखते हुए और क्रेडिट रिस्क को मैनेज करते हुए एक स्थिर ब्याज आय धारा को जनरेट करने पर निर्भर करती है. अधिकांश क्रेडिट रिस्क फंड्स मेच्योरिटी तक प्रतिभूतियों को खरीदते हैं और रखते हैं. इन फंड्स में इंस्ट्रूमेंट्स की अवधि आमतौर पर एक से तीन साल के बीच होती है. ये फंड्स किसी भी आकस्मिक आवश्यकता को पूरा करने के लिए कुछ लिक्विड होल्डिंग्स व नकदी भी बनाए रखते हैं. हालांकि, शॉर्ट नोटिस पर क्रेडिट प्रतिभूतियों को बेचने पर कुछ रिटर्न का त्याग किये बिना यह थोड़ा कठिन होता है.

(ख) दूसरी तरफ जो फंड ड्यूरेशन रणनीति का अनुसरण करता है, वे ब्याज दरों के मूवमेंट की प्रतिक्रिया में बॉन्ड प्राइस में बदलाव से लाभ प्राप्त करने का प्रयत्न करते हैं. बॉन्ड प्राइस और ब्याज दरें विपरीत दिशा में चलते हैं. इसलिए जब ब्याज दरें गिरती हैं, मौजूदा बॉन्ड्स की कीमत बढ़ती है, क्योंकि इन बॉन्ड्स को ब्याज दर के नए स्तर के हिसाब से दोबारा एडजस्ट करने की जरूरत होती है. चूंकि नए बॉन्ड कम ब्याज कैरी करेंगे, इसलिए मौजूदा बॉन्ड अधिक आकर्षक हो जाते हैं. इस तरह से तब तक कीमतों में बढ़ोतरी होती है, जब तक कि यील्ड्स नए बॉन्ड से मेल नहीं खाती. एक ड्यूरेशन फंड अपने द्वारा होल्ड किये गए बॉन्ड से पूंजी में वृद्धि की कोशिश करेगा. यह फंड सावधानिपूर्वक चुने गए लंबी अवधि के डेट इंस्ट्रूमेंट्स के पोर्टफोलियो में निवेश करके रिस्क मैनेज करता है.

3. डेट फंड में कैसे निवेश करें

डेट फंड में निवेश करना काफी आसान है. अधिकतर मध्यम व बड़े आकार के फंड हाउसेज ऊपर लिस्टेड डेट प्रोडक्ट्स में से अधिकांश की पेशकश करते हैं. निवेशक एसेट मैनेजमेंट कंपनी व विशिष्ट योजनाओं के ट्रैक-रिकॉर्ड की जानकारी प्राप्त कर अपनी आवश्यकता के अनुसार एक विशिष्ट उत्पाद में निवेश कर सकते हैं. यहां निवेशक को फंड के प्रदर्शन की तुलना केवल उसकी श्रेणी के उत्पादों के साथ ही नहीं, बल्कि संबंधित बेंचमार्क व फंड के उद्देश्यों के आधार पर भी कर लेनी चाहिए.

(लेखक: कुमारेश रामकृष्णन, सीआईओ-फिक्‍स्‍ड इनकम, पीजीआइएम म्‍युचुअल फंड)

Get Business News in Hindi, latest India News in Hindi, and other breaking news on share market, investment scheme and much more on Financial Express Hindi. Like us on Facebook, Follow us on Twitter for latest financial news and share market updates.

  1. बिज़नस न्यूज़
  2. कारोबार बाजार
  3. डेट फंड: कुछ दिन, कुछ माह से कई साल तक; जैसी जरूरत वैसे लगाएं पैसा

Go to Top