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Budget 2019: मोदी सरकार के 5 बजट में आम आदमी को कितनी मिली राहत, जानें डिटेल

चालू वित्त वर्ष के पूर्ण बजट पर अब आम लोगों की निगाहें लगी हुई हैं और उम्मीद लगाए बैठे हैं कि सरकार उन्हें कुछ राहत देगी.

June 27, 2019 8:59 AM
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Budget 2019: मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला बजट 5 जुलाई को पेश होगा. इसे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पेश करेंगी. इससे पहले मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में पांच बार अरुण जेटली ने बजट पेश किया था. चालू वित्त वर्ष में लोकसभा चुनाव होने के कारण इस बार बजट सत्र में अंतरिम बजट पेश हुआ था लेकिन इसे स्वास्थ्य कारणों की वजह से अरुण जेटली की बजाय पीयूष गोयल ने पेश किया था. चालू वित्त वर्ष के पूर्ण बजट पर अब आम लोगों की निगाहें लगी हुई हैं और उम्मीद लगाए बैठे हैं कि सरकार उन्हें कुछ राहत देगी. आइए जानते हैं कि मोदी सरकार ने अब तक आम लोगों के लिए अपने बजट के पिटारे से क्या-क्या निकाला है.

मोदी सरकार के पहले बजट में बेसिक टैक्स छूट सीमा बढ़ी

2014 में लोकसभा चुनाव होने के कारण फरवरी में अंतरिम बजट पेश हुआ था. चुनाव के बाद सरकार में बदलाव हुआ है और मोदी सरकार में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जुलाई में बजट पेश किया.

  • इस बजट में बेसिक टैक्स छूट सीमा को 2 लाख से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये कर दिया गया. वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सीमा 2.5 लाख रुपये से बढ़कर 3 लाख रुपये हो गई.
  • सेक्शन 80(सी) के तहत छूट सीमा 1.1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये कर दी गई.
  • सेक्शन 24 के तहत होम लोन के ब्याज पर टैक्स छूट की सीमा 1.5 लाख रुपये से बढ़कर 2 लाख रुपये हो गई.

2015-16 के बजट में पेंशन स्कीम बना आकर्षक

मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के दूसरे बजट में इनकम टैक्स स्लैब्स और रेट्स में कोई बदलाव नहीं किया गया लेकिन नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) को और भी आकर्षक बनाया गया.

  • सेक्शन 80CCD(1b) के तहत एनपीएस में निवेश पर 50 हजार रुपये की टैक्स छूट की घोषणा की गई. सेक्शन 80C और 80CCD(1b) को मिलाकर अब 2 लाख रुपये के टैक्स छूट का लाभ मिलने लगा.
  • सुकन्या समृद्धि योजना में निवेश पर मिलने वाले ब्याज को टैक्स फ्री किया गया.
  • इंडिविजुअल्स के लिए हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर टैक्स डिडक्शन लिमिट 15 हजार रुपये से बढ़कर 25 हजार रुपये हो गई. वरिष्ठ नागरिकों के मामले में यह सीमा 20 हजार रुपये से बढ़कर 30 हजार रुपये हो गई.
  • सैलरीड क्लास का ट्रांसपोर्ट अलाउंस लिमिट 800 रुपये से बढ़ाकप 1600 रुपये प्रति माह कर दिया गया.
  • 1 करोड़ रुपये से अधिक की सालाना आय वाले इंडिविजुअल्स पर सरचार्ज 10 फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी कर दिया गया.
  • वेल्थ टैक्स खत्म कर दिया गया.

2016-17 के बजट में घर के किराए पर टैक्स छूट बढ़ी

अरुण जेटली ने मोदी सरकार में अपना तीसरा बजट पेश किया. इसमें भी टैक्स स्लैब्स और रेट्स में कोई बदलाव नहीं हुआ लेकिन कम आय वालों को थोड़ी राहत मिली.

  • 5 लाख से कम आय वालों के लिए टैक्स रिबेट 2000 से बढ़ाकर 5000 रुपये किया गया.
  • नए होम बायर्स को 35 लाख रुपये तक के लोन पर चुकाए जाने वाले ब्याज के लिए अतिरिक्त 50,000 रुपये की टैक्स छूट दी गई.
  • घर का किराया देने वालों के लिए सेक्शन 80GG के तहत टैक्स छूट को 24,000 से बढ़ाकर 60,000 रुपये किया गया.
  • 1 करोड़ रुपये से अधिक की सालाना आय वाले इंडिविजुअल्स पर सरचार्ज 3 फीसदी बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया गया.

2017-18 के बजट में टैक्स रेट में कमी

तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 5 लाख से कम सालाना आय वालों के लिए 2017-18 के बजट में राहत की घोषणा की.

  • 2.5 लाख से 5 लाख रुपये तक की इनकम के लिए इनकम टैक्स रेट को 10 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी किया गया.
  • सभी टैक्सपेयर्स को 12,500 रुपये का टैक्स रिबेट दिया गया.
  • 50 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये की सालाना आय वालों पर 10 फीसदी सरचार्ज का प्रावधान किया गया.

अपने आखिरी बजट में जेटली ने एलटीसीजी पर लगाया टैक्स

मोदी सरकार में वित्त मंत्री के तौर पर अरुण जेटली ने अंतिम बार 2018-19 का बजट पेश किया था. इसमें स्टैंडर्ड डिडक्शन को वापस लाया गया.

  • सैलरीड इंडीविजुअल्स के लिए 40,000 रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन को वापस लाया गया. हालांकि इसके बदले में 15000 रुपये के मेडिकल रिइंबर्समेंट और 19,200 रुपये के ट्रांसपोर्ट अलाउंस पर टैक्स छूट को खत्म कर दिया गया.
  • इक्विटीज से 1 लाख रुपये से अधिक के लांग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) पर 10 फीसदी टैक्स लगाया गया.
  • सेस 3 फीसदी से बढ़ाकर 4 फीसदी कर दिया गया.

चालू वित्त वर्ष के अंतरिम बजट में टैक्स रीबेट की सीमा बढ़ी

चुनावी वर्ष होने के कारण इस साल फरवरी में अंतरिम बजट पेश किया. इसे कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने पेश किया. इसमें सैलरीड क्लास के लिए बड़ी घोषणाएं की गईं.

  • टैक्स रीबेट को बढ़ाकर 12,500 रुपये कर दिया गया. इससे 5 लाख रुपये तक की आय टैक्स फ्री हो गई. हालांकि टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया.
  • स्टैंडर्ड डिडक्शन को 40 हजार रुपये से बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दिया गया.
  • होम रेंट पर टीडीएस थ्रेसहोल्ड की सीमा 1.8 लाख रुपये सालाना से बढ़ाकर 2.4 लाख रुपये कर दिया गया है.
  • पोस्ट ऑफिस और बैंकों में जमा पर 40 हजार रुपए तक के ब्याज पर अब कोई टैक्स नहीं लगेगा.
  • 2 करोड़ रुपये तक सेक्शन 54 के तहत कैपिटल टैक्स एक्जेम्प्शन मिलेगा और दो हाउस प्रापर्टीज पर कैपिटल गेंस पर छूट पा सकेंगे.
  • ग्रेच्युटी सीमा बढ़ाकर 30 लाख रुपये कर दी गई है.
  • आईटीआर की प्रक्रिया 24 घंटे के भीतर पूरी होगी और रिटर्न्स तुरंत पेड किया जाएगा.

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