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DDT खत्म होने से निवेशकों पर क्या होगा असर, जानिए टैक्स स्लैब के अनुसार नफा-नुकसान

आइए जानते हैं कि DDT का खत्म हो जाना निवेशकों के लिए फायदेमंद है या नहीं.

February 6, 2020 7:01 AM
what effect will DDT scrapping cause to investors which tax slab will get benefit and which will get harmedआइए जानते हैं कि DDT का खत्म हो जाना निवेशकों के लिए फायदेमंद है या नहीं. (Representational Image)

डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स(DDT) डिविडेंड पर लगना वाला टैक्स है जो कंपनी अपने शेयरधारकों को अपने मुनाफे में से देती है. पहले, कानून कहता था कि DDT कंपनियों पर लगेगा और शेयरधारकों पर यह नहीं लगेगा. हाल ही पेश हुए बजट में वित्त मंत्री ने एलान किया कि DDT शेयरधारकों या यूनिट होल्डर्स पर लगेगा. इसलिए शेयर और म्यूचुअल फंड्स से आने वाली डिविडेंड इनकम पर निवेशकों से टैक्स लिया जाएगा. यह टैक्स निवेशक के टैक्स स्लैब के मुताबिक लगेगा. आइए जानते हैं कि DDT का खत्म हो जाना निवेशकों के लिए फायदेमंद है या नहीं.

अभी तक कंपनियों को 15 फीसदी की दर पर DDT का भुगतान करना होता था लेकिन प्रभावी रेट 20.56 फीसदी रहता था(सरचार्ज और सेस को मिलाकर). यह 1997 में लाया गया था. उस समय यह 7.5 फीसदी के फ्लैट रेट से लिया जाता था. लेकिन यह दर समय के साथ बढ़ती गई और इसे कंपनी पर बेवजह दबाव डालने को लेकर आलोचना झेलनी पड़ी. लोगों ने यह भी तर्क दिया कि इससे दोगुना टैक्स हो जाता है. उनका कहना था कि भारतीय कंपनियों के लिए 25 फीसदी की दर से कॉरपोरेट टैक्स का भुगतान करने के बाद प्रभावी टैक्स रेट जिसमें DDT शामिल है, 48.5 फीसदी हो जाता है.

नया नियम

हाल में बजट में हुए एलानों के मुताबिक, सभी तरह की डिविडेंड इनकम यानी शेयरों या म्यूचुअल फंड्स से होने वाली डिविडेंड इनकम पर निवेशकों से टैक्स वसूला जाएगा. इस तरह डिविडेंड इनकम, जो पहले निवेशकों के पास टैक्स से मुक्त थी, अब उस पर पूरी तरह टैक्स लागू होगा. इसका मतलब हुआ कि व्यक्ति की टैक्सेबल इनकम में इजाफा होगा. तो, बजट 2020 में कॉरपोरेट द्वारा भुगतान किए गए डिविडेंड पर DDT को खत्म करके उसके भार को निवेशकों पर शिफ्ट करने का प्रस्ताव है.

पहले, एक टैक्सपेयर को डिविडेंड पर 10 फीसदी की दर से टैक्स का भुगतान उसी स्थिति में करना होता था जब उसे प्राप्त डिविडेंड की राशि 10 लाख रुपये से ज्यादा होती थी. इसके अलावा म्यूचुअल फंड्स से मिले डिविडेंड पर किसी टैक्स का भुगतान नहीं करना होता था. बजट में किए गए प्रस्ताव के मुताबिक, डिविडेंड प्राप्त करने वाला व्यक्ति उपयुक्त दरों पर इनकम टैक्स का भुगतान करने के लिए जवाबदेह होगा, चाहे उसे मिले डिविडेंड की राशि कितनी भी हो.

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निवेशकों पर असर

नए नियम से जुड़े कुछ फायदे और नुकसान हैं. कंपनी की नजर से देखें, तो DDT को हटाने से, डिस्ट्रीब्यूशन के लिए उपलब्ध प्रॉफिट बढ़ता है, जो कंपनियां अपने बिजनेस में वापस लगा सकती हैं. इसलिए सामान्य तौर पर इससे फर्म वैल्यू बढ़ती है. दूसरा, शेयरधारक के पास मौजूद डिविडेंड पर टैक्स लगाने से फॉरेन इक्विटी इनवेस्टर की स्थिति में डबल टैक्स अवॉयडेंस एग्रीमेंट लागू हो सकता है और ऐसे में टैक्स की दर उसकी शेयरहोल्डिंग और रेजीडेंशियल स्टेटस पर निर्भर होगी.

इससे उन टैक्सपेयर्स को फायदा होगा जो 10 फीसदी टैक्स वाले स्लैब में आते हैं क्योंकि उनके पास कैश फ्लो बढ़ेगा जबकि जो टैक्सपेयर्स 20 फीसदी टैक्स स्लैब में आते हैं, उन पर कोई असर नहीं होगा. लेकिन जो टैक्सपेयर्स 30 फीसदी स्लैब में आते हैं, वे ज्यादा टैक्स का भुगतान करेंगे.

(By: P Saravanan, Professor of Finance & Accounting, IIM Tiruchirappalli)

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