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Budget 2021: रोजगार, इंफ्रा, मनरेगा, रीयल्टी- हर तरह से बढ़ानी होगी डिमांड, तभी बढ़ेगी अर्थव्यवस्था; इंडिया रेटिंग्स के बजट सुझाव

Union Budget 2021 India: अगर डिमांड साइड पर ध्यान नहीं दिया गया तो सरकार और आरबीआई की नीतियों के चलते सप्लाई साइड कितनी भी बेहतर हो जाए, कुछ ही समय में मांग में कमी के चलते जूझने लगेगी.

January 22, 2021 3:27 PM
Union Budget 2021 presented by finance minister nirmala sitharaman must focus on resolving demand-side issues said India ratings in a reportअपनी नीतियों को बदलने का यह सही समय है और सरकार को सप्लाई के साथ-साथ डिमांड से जुड़ी समस्याएं भी दूर करनी चाहिए.

Indian Union Budget 2021-22: बजट में केंद्र सरकार को सप्लाई से जुड़ी समस्याओं को हल करने की बजाय डिमांड साइड को लेकर मुख्य ध्यान रखना चाहिए. बजट के लिए सुझावों को लेकर इंडिया रेटिंग्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि जब से महामारी का प्रकोप शुरू हुआ है, इकोनॉमी को बढ़ाने के लिए सप्लाई से जुड़ी समस्याओं का समाधान किया जा रहा है. इंडिया रेटिंग्स के सुनील कुमार सिन्हा ने एक नोट में कहा कि अगर डिमांड साइड पर ध्यान नहीं दिया गया तो सरकार और आरबीआई की नीतियों के चलते सप्लाई साइड कितनी भी बेहतर हो जाए, कुछ ही समय में गुड्स और सर्विसेज की पर्याप्त मांग में कमी के चलते जूझने लगेगी.

कुछ हाई फ्रीक्वेंसी इंडेकिटर्स से यह संकेत मिले हैं कि कोरोना से पहले के समय के बराबर उत्पादन स्तर पहुंच चुका था और त्योहारी मांग के चलते इकोनॉमी बेहतर स्थिति में पहुंच गई थी. हालांकि लगातार दो महीने पॉजिटिव ग्रोथ दिखाने के बाद नवंबर 2020 में फैक्ट्री आउटपुट में गिरावट आई. इसका उदाहरण देते हुए सिन्हा ने कहा कि डिमांड साइड को सहारा देना बहुत जरूरी है. वित्त वर्ष 2021-22 का बजट 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पेश करेंगी.

नीतियों को बदलने का सही समय

सिन्हा ने कहा कि अपनी नीतियों को बदलने का यह सही समय है और सरकार को सप्लाई के साथ-साथ डिमांड से जुड़ी समस्याएं भी दूर करनी चाहिए, चाहे इससे रिकवरी प्रोसेस धीमी हो जाए. सिन्हा के मुताबिक आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं को दूर करने की कोशिश में कुछ गलत नहीं है क्योंकि बाधित हुई सप्लाई चेन को रिस्टोर करने के लिए यह जरूरी था. हालांकि मांग में कमी के चलते रिकवरी प्रभावित हो सकती है.

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रिपोर्ट में दिए गए ये सुझाव

  • रोजगार बढ़ाने वाले और कम अवधि वाले इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर खर्च बढ़ाया जाना चाहिए.
  • आईसीआईसीआई, आईडीबीआई और आईएफसीआई के समान डेवलपमेंट फाइनेंसियल इंस्टीट्यूशन की स्थापना की जानी चाहिए.
    गरीब परिवारों को आर्थिक सहारा जारी रखना चाहिए.
  • मनरेगा के लिए अधिक से अधिक बजट आवंटित करना चाहिए क्योंकि यह सिर्फ ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को ही रोजगार सुरक्षा नहीं उपलब्ध कराता बल्कि कोरोना के चलते गांव वापस गए मजदूरों को भी रोजगार उपलब्ध कराएगा.
  • रीयल एस्टेट को अधिक सहारा दिया जाना चाहिए. इसमें भी खासतौर से अफोर्डेबल हाउसिंग सेग्मेंट को अधिक सहारे की जरूरत है.
    माइक्रो, स्माल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) को फाइनेंस जुटाने में समस्या आ रही है. उन्हें अगले वित्त वर्ष 2021-22 में बेहतर प्रदर्शन के लिए सरकारी सहायता की जरूरत पड़ेगी.
  • सरकार को बजट में अपने रेवेन्यू और कैपिचल एक्सपेंडिचर को लेकर दोबारा प्रॉयोरिटी सेट करनी चाहिए. बड़े स्तर पर वैक्सीनेशन/सार्वजनिक स्वास्थ्य को प्रॉयोरिटी देनी चाहिए और जिसमें कम रिसोर्सेज लगते हों, उनसे जुड़ी योजनाओं/उपयोजनाओं पर बजट आवंटन कम किया जाना चाहिए या बंद कर देना चाहिए.
  • हायर टैक्स रेवेन्यू के जरिए एक्सपेंडिचर की फंड जरूरतों को पूरा किया जाना चाहिए. इसके अलावा राज्यों को पर्याप्त राशि दी जानी चाहिए और जरूरत पड़ने पर केंद्र के सहारे को सुनिश्चित किया जाना चाहिए क्योंकि अधिकतर खर्चे राज्यों में होते हैं.

FY22 में 14% की Nominal GDP का दावा

सिन्हा का दावा है कि अगर सरकार इनमें से कुछ सुझावों का मान लेती है तो वित्त वर्ष 2021-22 में 14 फीसदी की नॉमिनल जीडीपी देख सकते हैं. रीयल जीडीपी 9.5-10 फीसदी रह सकती है और राजकोषीय घाटा जीडीपी के 6.2 फीसदी के बराबर रह सकता है. महामारी के कारण लगाए गए लॉकडाउन के चलते चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही अप्रैल-जून 2020 में जीडीपी 23.9 फीसदी की दर से सिकुड़ गई थी. हालांकि उसके बाद उसमें सुधार हुआ और अगली तिमाही में 7.5 फीसदी की दर से सिकुड़न रही. उम्मीद जताई जा रही है कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में इकोनॉमी ग्रीन जोन में रहेगी और वित्त वर्ष 2020-21 में जीडीपी में 7.5-8 फीसदी की दर से सिकुड़न रहेगी.

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