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Union Budget 2021: मनरेगा बजट पर रहेगी नजर, महामारी के चलते घर लौटे श्रमिकों को क्या गांव में ही मिलेगा रोजगार?

Union Budget 2021 India: वित्त वर्ष 2021-22 के लिए बजट में अन्य आवंटन के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोगजार गारंटी देने वाली केंद्र सरकार की योजना मनरेगा को कितना आवंटन होगा, इस पर भी अधिकतर लोगों की निगाहें रहेंगी.

December 26, 2020 8:44 AM
Union Budget 2021 MGNREGA BUDEGT ALLOCATION IN NEXT BUDGET EXPECTED TO RISE AS IT WILL BOOST RURAL ECONOMY AND GIVE EMPLOYMENT TO MIGRANT LABOURमनरेगा रोजगार गारंटी की केंद्रीय योजना है.

Indian Union Budget 2021-22: वित्त वर्ष 2021-22 का बजट अगले साल 1 फरवरी 2021 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पेश करेंगी. इस बजट में अन्य आवंटन के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोगजार गारंटी देने वाली केंद्र सरकार की योजना मनरेगा को कितना आवंटन होगा, इस पर भी अधिकतर लोगों की निगाहें रहेंगी. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को रोजगार मिलेगा और गांवों में खर्च बढ़ेगा तो ग्रामीण इकोनॉमी में तेजी आएगी. इस साल फरवरी में वित्त वर्ष 2020-21 के बजट में मनरेगा आवंटन में गिरावट आई थी. इस बार बजट में 61 हजार करोड़ रुपये आवंटित हुए थे जबकि वित्त वर्ष 2019-20 के लिए रिवाइज्ड बजट आवंटन 71 हजार करोड़ रुपये का था. हालांकि, कोरोना महामारी के कारण मई में अतिरिक्त बजट आवंटित किया गया था.

पिछले छह वर्षों से बढ़ रहा बजट आवंटन

  • मनरेगा के लिए बजट आवंटन का ट्रेंड देखें तो पिछले छह वर्षों से बजट का आवंटन बढ़ता गया है. इस वित्त वर्ष 2020-21 के लिए बजट आवंटन पिछले वित्त वर्ष के आवंटन की तुलना में अधिक था लेकिन पिछले वित्त वर्ष संशोधित आवंटन की तुलना में यह कम रहा.
  • पिछले वित्त वर्ष 2019-20 में बजट के समय मनरेगा के लिए 60 हजार करोड़ आवंटित किया था लेकिन इसे बाद में रिवाइज्ड कर 71 हजार करोड़ कर दिया गया. इसकी तुलना में इस बार 61 हजार करोड़ का बजट आवंटित किया गया. हालांकि कोरोना महमारी के कारण मई में 40 हजार करोड़ का आवंटन बढ़ाया गया.
  • वर्षवार बजट आवंटन की बात करें तो वित्त वर्ष 2015-16 में 34699 करोड़, 2016-17 में 38500 करोड़, 2017-18 में 48 हजार करोड़ और 2018-19 में 55 हजार करोड़ का बजट मनरेगा के लिए आवंटित किया गया था. जरूरत पड़ने पर मनरेगा के लिए बजट वित्त वर्ष के दौरान बढ़ाया जाता रहा है.

कोरोना महामारी के कारण बदली है परिस्थितियां

आमतौर पर बजट के दौरान आवंटन के बाद भी मनरेगा के लिए अतिरिक्त फंड की जरूरत पड़ती है. ऐसे में वित्त वर्ष के दौरान जरूरत फंड का आवंटन किया जाता है. इस साल कोरोना महामारी के कारण कई लोग गांव लौट गए थे. इन प्रवासी मजदूरों को गांव लौटने पर वहां रोजगार उपलब्ध कराने के लिए मई में वित्त मंत्री ने 40 हजार करोड़ का अतिरिक्त बजट आवंटित किया था. अभी भी कोरोना महामारी का खतरा टला नहीं है. ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि अगले बजट में मनरेगा के बजट आवंटन में बढ़ोतरी होगी.

सिद्धार्थनगर जिले के परिगवां गांव के प्रधान शिवकुमार शुक्ल के सचिव सुनील श्रीवास्तव ने बताया कि कोरोना के कारण मनरेगा के तहत काम में बहुत बदलाव आया है. अब उन्हीं कार्यों को कराया जा रहा है जिससे सोशल डिस्टेंसिंग को मेंटेंन रखा जा सके जैसे नाले की सफाई इत्यादि. उन्होंने बताया कि कोरोना महामारी के कारण कई मजदूर घर वापस लौटे थे तो इस बार काम मांगने वालों की संख्या बढ़ी, हालांकि अब 80 फीसदी तक लोग शहर वापस लौट गए हैं. इसके बावजूद जो शेष लोग बचे हैं, उनके लिए काम का प्रबंध करना पड़ता है.

मनरेगा के तहत पक्के काम में इंटरलॉकिंग, खड़जा और नाली बनाने जैसे काम आते हैं और कच्चे काम में नाली की सफाई इत्यादि आते हैं. इस बार नाली की सफाई पर ज्यादा फोकस रहा क्योंकि इसमें सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेंन करना आसान रहा.

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2018-19 में सबसे अधिक फंड आंध्र को मिला

मिनिस्ट्री ऑफ रूरल डिपार्टमेंट पर मनरेगा से जुड़े फंड्स रिलीज्ड डेटा मौजूद हैं जिसमें 2014-15 से 2018-19 तक का डेटा देखा जा सकता है कि किस राज्य में मनरेगा से जुड़े मद में सबसे अधिक खर्च हुआ है. इसके मुताबिक वित्त वर्ष 2018-19 में मनरेगा के लिए सबसे अधिक फंड आंध्र प्रदेश को रिलीज किए गए हुए.

राजस्थान के बाद सबसे अधिक पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश को मिले. 2018-19 में आंध्र प्रदेश के लिए 5875 करोड़ रुपये रिलीज किए गए जबकि पश्चिम बंगाल के लिए 5741 करोड़ रुपये और उत्तर प्रदेश के लिए 3903 करोड़ रुपये रिलीज किए गए. उसके पिछले वित्त वर्ष 2017-18 में सबसे अधिक फंड पश्चिम बंगाल को रिलीज किए गए थे और उसके बाद सबसे अधिक फंड तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश को रिलीज किए गए. पश्चिम बंगाल को 5960 करोड़, तमिलनाडु को 5856 करोड़ और आंध्र प्रदेश को 5139 करोड़ का फंड रिलीज किया गया था.

मनरेगा रोजगार गारंटी की केंद्रीय योजना

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) एक रोजगार गारंटी योजना है. इस योजना के तहत प्रत्येक वित्तीय वर्ष में ग्रामीण क्षेत्रों में रह रहे वयस्क लोगों को न्यूनतम 100 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराने की गारंटी दी जाती है. इसके तहत अनस्किल्ड कार्य कराया जाता है यानी जिसके लिए किसी दक्षता या प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं होती है.

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