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Union Budget 2021: लोअर टैक्सेशन से एड स्टार्ट-अप्स तक, ये एलान डिजिटल एजुकेशन को दे सकते हैं बूस्ट

Union Budget 2021 India: ऑनलाइन एजुकेशन को बढ़ावा देने के लिए क्या है डिमांड

January 19, 2021 7:54 AM
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Union Budget 2021-22 Expectations for Education: कोरोना वायरस महामारी की वजह से जिस क्षेत्र में सबसे ज्यादा बदलाव आया है, उसमें से एक एजुकेशन सेक्टर है. ट्रेडिशनल लर्निंग अब डिजिटल लर्निंग में बदल गई है. ट्रेडिशनल लर्निंग से डिजिटल लर्निंग में ट्रांजिशन के तरीकों से एडटेक स्टार्ट-अप और मौजूदा कंपनियों के विकास में मदद मिली है, और यह आगे भी जारी रहने की उम्मीद है. ऐसे में इस बार केंद्रीय बजट में एजुकेशन सेकटर के लिए आवंटन में पिछले साल की तुलना में 7-8 फीसदी की बढ़ोत्तरी की जानी चाहिए.

डिजिटल एजुकेशन

पिछले साल कोरोना वायरस महामारी के चलते लॉकडाउन में स्कूलों, कॉलेजों और संस्थानों को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था. जिसके बाद , छात्रों और शिक्षकों के पास डिजिटल माध्यम में जाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा था. शिक्षकों और छात्रों दोनों ने ऑनलाइन एजुकेशन के तरीकों को अडाप्ट किया. यह एडटेक स्टार्ट-अप के लिए नए हॉरिजॉन ओपेन करता है. NEP 2020 देश भर में शैक्षणिक धाराओं से अलग नहीं होने के साथ एक्स्ट्रा कैरिकुलर और वोकेशनल लर्निंग पर केंद्रित है. नैसकॉम के अनुसार, भारत का एडटेक स्पेस 2022 तक350 करोड़ डॉलर का होगा.

टैक्स में कटौती

एडटेक सेक्टर पर अभी 18 फीसदी की दर से टैक्स लगता है, जिसे बजट में कम किया जा सकता है. इससे क्वालिटी डिजिटल एजुकेशन समाज के सभी वर्गों के छात्रों के लिए बेहतर विकल्प बन सके. हाल के महीनों में एडटेक सेक्टर में इस महामारी के दौरान सबसे ज्यादा फंडिंग देखी गई है, जो बढ़ी हुई जागरूकता का परिणाम है. लोअर टैक्सेशन एडटेक सेक्टर के विस्तार और एजुकेशन सिस्टम में रिवॉल्यूशन लाने में मदद कर सकता है.

शिक्षा बजट को प्राथमिकता

हालांकि संस्थानों ने ऑनलाइन लर्निंग सिस्टम को बेहतर तरीके से अपनाया है, फिर भी शिक्षा क्षेत्र में सामान्य स्थिति अभी भी दूर है. निजी कंपनियों और सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बावजूद, हमारे पास अभी भी सभी छात्रों के लिए यूनिफॉर्म सॉल्यूशन की कमी है. क्योंकि ई-लर्निंग अभी भी समाज के सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से आने वाले छात्रों के लिए एक चुनौती है. केंद्रीय बजट 2021 में शिक्षा क्षेत्र को अधिक प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि कोविड-19 के प्रभावों को सामान्य किया जा सके.

अंडरप्रीवलेज्ड छात्रों को अधिक लर्निंग टूल और डिजिटल लर्निंग मेथड के अनुकूल होने के अवसर दिए जा सकते हैं. ऐसे छात्रों के लिए मजबूत प्लेटफॉर्म विकसित और क्यूरेट किए जाने चाहिए. इसके अलावा, समस्या-समाधान, रचनात्मकता और कम्प्यूटेशनल सोच जैसे भविष्य में इस तरह की किसी समस्या का सामना करने के लिए 21 वीं सदी के बच्चों के लिए महत्वपूर्ण हैं. बुनियादी शिक्षा की नियमित कक्षाएं सरकार के फोकस में होनी चाहिए. इन सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए, केंद्रीय बजट 2021 का झुकाव शिक्षा क्षेत्र की ओर होना चाहिए.

एजुकेशन स्टार्ट-अप्स

भारतीय अर्थव्यवस्था पर एमएसएमई का महत्व इस तथ्य से स्पष्ट है कि एमएसएमई बहुत सारे रोजगार प्रदान करते हैं और विदेशी निवेश आकर्षित करते हैं. इनका जीडीपी में भी अहम योगदान है. भारत में लगभग 63 मिलियन स्टार्ट-अप (MSME मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार) हैं, जिनमें करीब 120 मिलियन लोगों को रोजगार मिला है और इनका निर्यात में 45 फीसदी योगदान है. केंद्रीय बजट 2021 में, MSMEs के लिए टैक्सेशन स्कीम को संशोधित और कम किया जाना चाहिए, क्योंकि यह MSMEs और स्टार्ट-अप्स को बढ़ने के लिए अधिक अवसर प्रदान करेगा.

इसके अलावा, एमएसएमई के लिए लोन अप्रूवल प्रक्रिया को सरल बनाया जाना चाहिए, और स्टार्ट-अप और एमएसएमई को कोलैटरल फ्री लोन दिया जाना चाहिए. पिछले साल एडटेक डोमेन में रिकॉर्ड-ब्रेकिंग फंडिंग देखी गई थी, और इस क्षेत्र को एमएसएमई के लिए लाभकारी योजना के तहत शामिल किया जाना चाहिए. क्योंकि यह स्टार्ट-अप को स्केल करने और क्वालिटी एजुकेशन को बढ़ावा देने के लिए एक बेहतर इको सिस्टम प्रदान करेगा.

(लेखक: Anoop Gautam, CEO & co-founder, Tinker Coders. ये लेखक के निजी विचार हैं.)

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