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Union Budget 2021 India: स्मार्ट सिटीज को बजट से मिलेगा बूस्ट! अब तक कितना आगे बढ़ा प्रोजेक्ट

Union Budget 2021 India: केंद्र सरकार ने 25 जून 2015 को स्मार्ट सिटीज मिशन लांच किया था.

January 10, 2021 8:26 AM
Union Budget 2021-22 Expectations for Smart Cities Mission know here about smart cities development till data according to economic survey report nirmala sitharaman narendra modi'स्मार्ट सिटीज मिशन' मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है. (File Photo)

Union Budget 2021-22 Expectations for Smart Cities Mission: मोदी सरकार ने 25 जून 2015 को ‘Smart Cities Mission’ लांच किया. इसका लक्ष्य सस्टेनेबल और इन्क्लूसिव सिटीज को बढ़ावा देना है जहां नागरिकों को उच्च गुणवत्ता वाली सेवाएं मिल सके. इस मिशन के तहत मॉडल के रूप में ऐसे शहर विकसित करना है जहां लोगों को गुणवत्तापूर्वक सुविधाएं मिले और पर्यावरण के अनुकूल विकास योजनाएं हों. इसे लेकर केंद्र सरकार ने शुरुआत में वित्त वर्ष 2015-16 से वित्त वर्ष 2019-20 के बीच 100 स्मार्ट सिटीज को पूरा करने का लक्ष्य रखा था. वित्त वर्ष 2020-21 के लिए बजट पेश करते समय वित्त मंत्री ने पांच और स्मार्ट सिटीज की घोषणा की थी. हालांकि बजट में स्मार्ट सिटीज के लिए कोई बजट नहीं आवंटित किया गया. इससे पिछले वित्त वर्ष 2019-20 के लिए बजट में 6450 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे.

देश में 31 फीसदी जनसंख्या शहरों में निवास करती है और उनका GDP में 63 फीसदी (2011 की जनगणना के मुताबिक) योगदान है. एक अनुमान के मुताबिक 2030 तक शहरों में करीब 40 फीसदी निवास करेगी और उनका जीडीपी में योगदान बढ़कर 75 फीसदी तक हो जाएगा.

2018 के बजट आवंटन में 50% से अधिक बढ़ोतरी

केंद्र सरकार स्मार्ट सिटी मिशन के तहत एक शहर के विकास के लिए 500 करोड़ आवंटित करती है. लगभग इतनी हा राशि संबंधित राज्य आवंटित करती है जिस राज्य में स्मार्ट सिटीज को विकसित किया जाना है. बजट आवंटन की बात करें तो वित्त वर्ष 2018-19 के लिए रिकॉर्ड आवंटन हुआ था. वित्त वर्ष 2017-18 में स्मार्ट सिटीज के लिए 4000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे जबकि 2018-19 में 54.2 फीसदी अधिक 6169 करोड़ रुपये आवंटित किए गए. उसके अगले वित्त वर्ष 2019-20 के लिए 4.2 फीसदी फीसदी अधिक 6450 करोड़ रुपये आवंटित किए गए. ऐसे में वित्त वर्ष 2020-21 के बजट में उम्मीद की जा रही थी कि बजट आवंटन में बढ़ोतरी की जाएगी लेकिन केंद्र सरकार ने बजट ही नहीं आवंटित किया. हालांकि पांच और स्मार्ट सिटीज की घोषणा बजट में जरूर की गई. इन पांच स्मार्ट सिटीज के बारे में अभी तक ऐलान नहीं हुआ है.

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11 फीसदी प्रोजेक्ट्स हुए पूरे

जनवरी 2020 में केंद्र सरकार द्वारा लाए गए इकोनॉमिक सर्वेक्षण के मुताबिक 100 स्मार्ट शहरों में 2.05 लाख करोड़ से अधिक की लागत के 5151 प्रोजेक्ट को इंप्लीमेंट किया जा रहा है. इकोनॉमिक सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक 14 नवंबर 2019 तक 1.49 लाख करोड़ रुपये (कुल प्रस्ताव का 72 फीसदी) के 4154 टेंडर्स निकाले गए. इसमें से 1.05 लाख करोड़ रुपये (कुल प्रपोजल का 51 फीसदी) के 3359 प्रोजेक्ट्स को वर्क ऑर्डर्स इशू किए जा चुके हैं.

आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, 14 नवंबर 2019 तक 22,659 करोड़ रुपये के करीब 1290 प्रोजेक्ट्स पूरे हो चुके हैं और ऑपरेशनल हैं. करीब 2.05 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट में से करीब 22.7 लाख करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं यानी नवंबर 2019 तक सिर्फ 11 फीसदी ही प्रोजेक्ट पूरे हुए.

चार राउंड में स्मार्ट सिटीज का चयन

  • जनवरी 2016 में राउंड 1 के तहत 20 स्मार्ट सिटीज का चयन किया गया और मई 2016 में फास्ट ट्रैक राउंड के जरिए 13 और स्मार्ट सिटीज का चयन किया गया. इसमें भुबनेश्वर, पुणे, जयपुर, सूरत, कोची, अहमदाबाद, जबलपुर, विशाखापत्तनम, सोलापुर, दावांगेरे (कर्नाटक), इंदौर, एनडीएमसी (दिल्ली), कोयंबटूर, काकीनाडा (आंध्र प्रदेश), बेलागवी (कर्नाटक), उदयपुर, गुवाहाटी, चेन्नई, लुधियाना और भोपाल शामिल थे. फास्ट ट्रैक के जरिए लखनऊ, वारंगल (तेलंगाना), धर्मशाला, चंडीगढ़, रायपुर, न्यू टाउन कोलकाता, भागलपुर, पणजी, पोर्ट ब्लेयर, इम्फाल, रांची, अगरतला और फरीदाबाद को शामिल किया गया.
  • सितंबर 2016 में दूसरे राउंड में 63 पोटेंशियल स्मार्ट सिटीज ने हिस्सा लिया जिसमें से 27 स्मार्ट सिटीज का चयन किया गया. इसमें अमृतसर, कल्याण-डोंबिवली, उज्जैन, तिरुपति, नागपुर, मंगलुरू, वेल्लोर, ठाणे, ग्वालियर, आगरा, नासिक, राउरकेला, कानपुर, मदुरै, टुमाकुरु (कर्नाटक), कोटा, तंजावुर, नामची, जालंधर, शिवमोग्गा, सलेम, अजमेर, वाराणसी, कोहिमा, हुबली-धारवाड़, औरंगाबाद और वडोदरा शामिल किए गए.
  • राउंड 3 में जून 2017 में 45 पोटेशियल स्मार्ट सिटीज ने हिस्सा लिया जिसमें से 30 स्मार्ट सिटीज का चयन किया गया. इस चरण में तिरुअनंतपुरम, नया रायपुर, राजकोट, अमरावती, पटना, करीमनगर, मुजफ्फरपुर, पुडुचेरी, गांधी नगर, श्रीनगर, सागर, करनाल, सतना, बंगलुरु, शिमला, देहरादून, त्रिपुर, पिंपरी चिंचवाड, बिलासपुर, पासीघाट, जम्मू, दाहोद, तिरुनेलवेली, थूथुकुडी, तिरुचिरापल्ली, झांसी, इलाहाबाद, अलीगढ़ और गंगटोक शामिल किए गए.
  • जनवरी 2018 में राउंड 4 में 15 पोटेंशियल स्मार्ट सिटीज ने हिस्सा लिया जिसमें से 9 स्मार्ट सिटीज का चयन किया गया. इसमें सिलवासा, इरोड, दिउ, बिहार शरीफ, बरेली, इटानगर, मुरादाबाद, सहारनपुर और कावारत्ती को शामिल किया गया.

इस तरह बनती हैं स्मार्ट सिटीज

स्मार्ट सिटीज का चयन होने के बाद उन्हें स्पेशल पर्पज वेहिकल (एसपीवी) का गठन करना होता है. यह कंपनजी एक्ट 2013 के तहत एक लिमिटेट कंपनी होती है जिसमें राज्य और अर्बन लोकल बॉडी की 50-50 फीसदी हिस्सेदारी (इक्विटी शेयरहोल्डिंग) होती है. एसपीवी का गठन होने के बाद स्मार्ट सिटी इंप्लीमेंट किया जाता है और डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट्स (डीपीआर) तैयार किया जाता है और टेंडर निकाले जाते हैं. इसी प्रकार की प्रक्रियाएं शुरू की जाती हैं.

इकोनॉमिक सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक, स्मार्ट सिटीज मिशन (एससीएम) के तहत स्पेशल पर्पज वेहिकल्स (एसपीवीज) और सिटी लेवल एडवायजरी फोरम्स (सीएलएएफ) का गठन किया गया. इसके अलावा प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट्स (पीएमसी) को एप्वाइंट किया गया.
मिनिस्ट्री ऑफ हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स के स्मार्ट सिटीज मिशन वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक 2.05 लाख करोड़ से अधिक की लागत से 100 स्मार्ट सिटीज को तैयार किया जाएगा. जानकारी के मुताबिक इसमें एरिया बेस्ड डेवलपमेंट कॉस्ट 1.64 लाख करोड़ रुपये और पूरे शहर का सॉल्यूशन कॉस्ट 38.9 हजार करोड़ रुपये का है.

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