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Budget 2021: डिजिटल हेल्थ को लेकर पॉलिसी बनाए सरकार, हेल्थकेयर सेक्टर की बजट से उम्मीदें

Union Budget 2021-22 Expectations for Healthcare: हेल्थ सेक्टर को बजट 2021 से बड़ी उम्मीदें लगी हुई हैं.

January 2, 2021 8:53 AM
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Union Budget 2021-22 Expectations for Healthcare: वित्त वर्ष 2021-22 का बजट अगले साल 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पेश करेंगी. यह बजट देश के हेल्थकेयर सेक्टर के लिए बड़ा बदलाव ला सकती है. कोरोना महामारी के दौर में और डिजिटल हेल्थ के मामले में तकनीक ने अपनी बड़ी भूमिका को सिद्ध किया है. कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर प्रभावी प्रबंधन या यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज के लक्ष्य को लेकर डिजिटल हेल्थ अपनी भूमिका को और बढ़ा सकता है, अगर इसे लेकर बेहतर नीतियां बनाई जाएं.

अगले बजट में डिजिटल हेल्थकेयर के प्रसार पर फोकस करना चाहिए क्योंकि इसके जरिए सुदूर क्षेत्रों के लोगों को भी अफोर्डेबल स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई जा सकती हैं. प्राइमरी व सेकंडरी केयर, डायग्नोस्टिक्स-इमेजिंग, वैक्सीनेशन और सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर डिजिटल हेल्थ बड़ी भूमिका निभा सकता है. डिजिटल हेल्थ में अब सिर्फ इन्हीं सेवाओं को नहीं शामिल किया जाता बल्कि मरीजों की भर्ती से लेकर उन्हें डिस्चार्ज होने तक और डिस्चार्ज होने के बाद भी ख्याल रखता है.

कोरोना महामारी ने अच्छा सबक सिखाया है और इसकी वजह से हेल्थ सेक्टर पर अभूतपूर्व खर्च बढ़ा है. भारत में हेल्थ सेक्टर पर पड़ोसी देशों के मुकाबले कम खर्च होता रहा है. कोरोना महामारी के कारण अब इस सेक्टर को मजबूत किए जाने की जरूरत समझी जा रही है. महामारी के कारण अब हेल्थ सेक्टर में तकनीकी इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है.

हर साल 0.5% खर्च बढ़ाए जाने की उम्मीद

केंद्र सरकार ने तीन साल पहले 2017 में एक महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति की घोषणा की थी जिसमें कहा गया था कि हेल्थ सेक्टर पर सरकारी खर्च को जीडीपी के 1.15 फीसदी से बढ़ाकर 2.5 फीसदी किया जाएगा. हालांकि उसके बाद वित्त वर्ष 2018-19 और वित्त वर्ष 2019-20 में हेल्थ सेक्टर के लिए बजट आवंटन में मामूली बढ़ोतरी हुई.

डिजिटल हेल्थ समेत पूरे हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किए जाने की जरूरत है. हेल्थकेयर सेक्टर को उम्मीद है कि अगले पांच साल तक सरकार हर साल जीडीपी के 0.5 फीसदी के बराबर अतिरिक्त खर्च करेगी.

साझा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत

केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर इस साल पहले ही बड़े कदम उठा चुकी है. अगस्त 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन (NDHM) को लांच किया था. इस का लक्ष्य डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम तैयार करना है. हेल्थ सेक्टर की सबसे बड़ी जरूरत इस समय साझा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर है और एनडीएचएम के तहत एक नीति की.

इस प्रकार के इंफ्राट्रक्चर से सरकारी और निजी एंटरप्राइजेज को नए तरीकों के जरिए अपनी सेवाओं को उपलब्ध कराने में सहूलियत होगी. मजबूत डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम के लिए निजी और पब्लिक सेक्टर्स के बीच आपसी सहयोग की जरूरत है. इसके अलावा सरकार को भी इंडस्ट्री प्लेयर्स के साथ मिलकर व्यापक और एकसमान नीतियां बनाने के लिए बातचीत करना चाहिए.

ऑटोनॉमस बॉडी गठित करने की मांग

सरकार को डिजिटल हेल्थकेयर के लिए सीआईआई और फिक्की (FICCI) की तरह एक नॉट फॉर प्रॉफिट, नॉन-गवर्नमेंट ऑटोनॉमस बॉडी गठित करनी चाहिए. सरकार को इस प्रकार के डेडिकेटेड ऑर्गेनाइजेशन के गठन के लिए शुरुआत करना चाहिए जो डिजिटल हेल्थकेयर के लिए वैश्विक, क्षेत्रीय और इंडस्ट्री के एजेंडे के मुताबिक कार्य कर सके.

बेहतर हेल्थकेयर से GDP में बढ़ोतरी

स्वास्थ्य में सुधार होने से उत्पादकता में बढ़ोतरी होगी जिससे देश की जीडीपी में अतिरिक्त 20-25 हजार करोड़ डॉलर की बढ़ोतरी होगी. यह आकवन बीसीजी (बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप) ने डिजिटल हेल्थ को लेकर अपने हालिया रिपोर्ट में लगाया है. बीसीजी की रिपोर्ट के मुताबिक मरीजों के भरोसे, डाइग्नोसिस रेट और हेल्थ इंश्योरेंस प्रॉडक्ट्स की मांग बढ़ने के कारण भारत की जीडीपी में यह बढ़ोतरी होगी.

डेटाबेस से क्लीनिकल प्रोटोकॉल तय करने में मदद

डिजिटल सिस्टम से स्वास्थ्य सुविधाओं को उपलब्ध कराने वालों को मरीजों की जरूरतों के बारे में जानकारी रहेगी और वे बेहतर तरीके से मरीज को ध्यान में रखते हुए सेवाएं उपलब्ध करा सकेंगे. इसके अलावा पूरा डेटा मौजूद रहेगा तो क्लीनिकल एडवाइस और उससे कितना फायदा हुआ, इस पर चर्चा हो सकेगी और क्लीनिकल प्रोटोकॉल तय करने में मदद मिलेगा जिससे स्वास्थ्य देखभाल की गुणवत्ता में सुधार होगा.

कम टैक्स स्लैब में रखने की मांग

देश में डिजिटल हेल्थ मुख्य रूप से हेल्थ टेक कंपनीज और स्टार्टअप्स के जरिए आगे बढ़ रही है. बेहतर नीतियों के जरिए नया और मजबूत डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम तैयार होगा. हेल्थ-टेक कम्युनिटी को उम्मीद है कि सस्टेनेबल बिजनस मॉडल्स विकसित करने के लिए एक रेशनल पॉलिसी फ्रेमवर्क तैयार किया जाएगा. हेल्थकेयर लीडर्स ने सरकार को सुझाव दिया है कि वह डिजिटल हेल्थ या मेडिकल इनोवेशन फंड की स्थापना करे ताकि इस सेग्मेंट की जरूरतों के लिए फंडिंग हो सके.

डिजिटल हेल्थ की भूमिका और योगदान बढ़ाने के लिए हेल्थ-टेक कंपनियों और सर्विस प्रोवाइडर्स को उम्मीद है कि उनके प्रॉडक्ट्स या सर्विसेज को कम टैक्स स्लैब के दायरे में लाया जाएगा. इस प्रकार के इंसेटिव्स या नीतियां हेल्थ सेक्टर के लिए बड़ा सहारा होंगी.

(By Rajiv Mishra, President (APAC Region), DaytoDay Health)

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