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Budget 2020: नए टैक्स सिस्टम और DDT पर म्यूचुअल फंड निवेशक हो रहे कनफ्यूज, इंडस्ट्री पर क्या होगा असर?

बजट में नए टैक्स सिस्टम और DDT में बदलाव के एलान से म्यूचुअल फंड निवेशकों में कनफ्यूजन

February 11, 2020 4:10 PM
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New Tax System & DDT Impact On Mutual Fund Industry: बजट में डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (DDT) में कुछ बदलावों का एलान हुआ था. साथ ही नए इनकम टैक्स सिस्टम का भी एलान किया गया था. माना जा रहा था कि इन एलानों से घरेलू म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री पर कुछ नकारात्मक असर पड़ सकता है. लेकिन एक वरिष्ठ म्यूचुअल फंड अधिकारी ने साफ किया है कि नए टैकस सिस्टम और डीडीटी में बदलावों से इंडस्ट्री पर कोई असर नहीं होगा. बल्कि आगे अर्थव्यवस्था में सुधार आने के साथ इंडस्ट्री में और मजबूत ग्रोथ देखने को मिलेगी.

ग्रोथ को लेकर हैं आशंकाएं

1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश किए जाने के बाद, आने वाले दिनों में म्यूचुअल फंड सेक्टर की ग्रोथ को लेकर कुछ आशंकाएं जताई जा रही थीं. बजट 2020 में यह प्रस्ताव किया गया कि म्यूचुअल फंडों से डिविडेंड के रूप में होने वाली निवेशक के हाथ में आने पर टैक्सेबल होगी. न कि म्यूचुअल फंड और कंपनी को यह टैक्स देना होगा. वहीं, यह भी प्रस्ताव किया गया कि लोअर टैक्स स्लैब का फायदा उठाने के लिए निवेशकों को कुछ छूट का लाभ छोड़ना होगा. फ्रैंकलिन टेम्पलेटन इंडिया डायरेक्टर (सेल्स) पेशोतन दस्तूर का कहना है कि नए टैक्स सिस्टम के प्रावधान और डीडीटी के नियमों में बदलाव से म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री पर किसी तरह का निगेटिव असर नहीं होगा.

टैक्स सेविंग के लिए इक्विटी स्कीम में निवेश कम

उनका कहना है कि टैक्स सेविंग के लिए इक्विटी-लिंक्ड सेविंग्स स्कीम में निवेश कुल निवेश का महज 2 फीसदी है. यह 2019 में कुल 1.4 लाख करोड़ इनफ्लो में सिर्फ 3000 करोड़ रुपये था. लेकिन, टैक्स लाभ पाने के लिए बीमा योजनाओं में निवेश का हिस्सा ज्यादा है. बजट के बाद नए टैक्स सिस्टम को लेकर ऐसी आशंकाएं हैं कि लोग टैक्स सेविंग के लिए बचत योजनाओं में निवेश कम कर देंगे.

कम आय वर्ग वालों को फायदा

नए टैक्स सिस्टम में कम आय वर्ग के निवेशकों को टैक्स की घोषणा से लाभ होगा क्योंकि उन्हें पहले के सिस्टम में 30 फीसदी के मुकाबले कम टैक्स का भुगतान करना होगा. डीडीटी प्रभाव के बारे में बोलते हुए, दस्तूर ने कहा कि डिविडेंड कटेगिरी में कुल पोर्टफोलियो कुल एमएफ परिसंपत्तियों के 15 फीसदी से कम है. क्योंकि अधिकांश निवेशक 3 साल के लिए और दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ के लिए निवेश करते हैं.

​क्लेम कर सकते हैं निवेशक

दस्तूर ने कहा कि डिविडेंड पर टीडीएस उसी स्थिति में कटेगा, जब इसके जरिए होने वाली आय 5000 रुपये से अधिक होगी. लेकिन अगर निवेशक की सालाना आय टैक्सेबल नहीं है तो रिटर्न भरते समय इसके लिए क्लेम किया जा सकता है. हाल के वर्षों में, एमएफ उद्योग में व्यक्तिगत निवेशकों की हिस्सेदारी इक्विटी और डेट दोनों क्षेत्रों में 54 फीसदी तक पहुंच गई थी.

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