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बजट के बाद कितना बचेगा आपका इनकम टैक्स, अलग-अलग सैलरी पर इस तरह करें कैलकुलेशन

बजट में इनकम टैक्स स्लैब के मोर्चे पर तो टैक्सपेयर्स को कोई राहत नहीं मिली, लेकिन अंतरिम बजट में बढ़ी हुई रिबेट लिमिट फुल बजट में किसी तरह का बदलाव न किए जाने के चलते अब पूरे वित्त वर्ष 2019.20 में लागू रहेगी.

July 6, 2019 1:30 PM

income tax calculation for different income limit for assessment year 2020-21

मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल का पहला बजट पेश कर दिया है. इस बजट में इनकम टैक्स स्लैब के मोर्चे पर तो टैक्सपेयर्स को कोई राहत नहीं मिली लेकिन होम लोन के ब्याज पेमेंट पर टैक्स डिडक्शन की लिमिट बढ़ाकर 3.5 लाख रुपये कर दी गई. हालांकि सरकार पहले ही अंतरिम बजट 2019 में रिबेट की लिमिट 12500 रुपये करके मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत दे चुकी है, जो फुल बजट में किसी तरह का बदलाव न किए जाने के चलते अब पूरे वित्त वर्ष 2019-20 में लागू रहेगी. अंतरिम बजट में दी गई इस राहत के चलते अब 5 लाख रुपये तक की सालाना आय पर टैक्स शून्य हो चुका है. टैक्स रिबेट का अर्थ है कि सरकार एक निश्चित लिमिट तक टैक्स बनने पर उसे माफ कर देती है.

इस रिबेट की लिमिट पिछले साल तक 2500 रुपये थी, जिसका फायदा 3.5 लाख रुपये तक की टैक्सबेल इनकम वालों को ही मिलता था. टैक्स एक्सपर्ट व सीए समीर गोगिया का कहना है कि अंतरिम बजट में बढ़े हुए रिबेट का फायदा लेते हुए विभिन्न तरह की टैक्स सेविंग स्कीम में निवेश कर 10 लाख रुपये तक सालाना इनकम वाले भी अपना टैक्स शून्य कर सकते हैं.

दूसरी ओर, सवाल यह है कि अगर किसी टैक्सपेयर्स का किसी तरह का कोई इन्वेस्टमेंट नहीं है तो बढ़े हुए रिबेट के बाद इनकम टैक्स के मोर्चे पर पूरे वित्त वर्ष और असेसमेंट ईयर 2020-21 में कितना फायदा मिलेगा? साथ ही अलग-अलग सैलरी या इनकम लिमिट के लिए टैक्स कितना रहेगा? आइए कुछ उदाहरणों के जरिए जानते हैं पूरी कैलकुलेशन….

3 लाख रु ग्रॉस इनकम पर

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8 लाख रु ग्रॉस इनकम पर

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ऐसे हुआ टैक्स कैलकुलेट

8 लाख रुपये ग्रॉस इनकम में से स्टैंडर्ड डिडक्शन घटाने के बाद आए अमाउंट को दो ब्रैकेट 5 लाख तक और उससे ऊपर में बांटा. इसके बाद 5 लाख तक इनकम वाले ब्रैकेट में से 2.5 लाख रुपये की टैक्स फ्री इनकम लिमिट घटाई और बचे हुए 2.5 लाख रुपये पर इस ब्रैकेट के लिए तय 5 फीसदी की दर से टैक्स कैलकुलेट किया. यह अमाउंट 12500 रुपये बना.

अब दूसरे बचे 5 लाख रुपये से उपर के अमाउंट पर इस ब्रैकेट के लिए तय 20 फीसदी की दर से टैक्स कैलकुलेट किया. आए हुए अमाउंट में 12500 रुपये जोड़कर आए अमाउंट पर 4 फीसदी की दर से सेस लगाया. इस तरह पूरा टैक्स कैलकुलेट हुआ.

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12 लाख रु ग्रॉस इनकम पर

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ऐसे हुआ कैलकुलेट

12 लाख रुपये ग्रॉस इनकम में से स्टैंडर्ड डिडक्शन घटाने के बाद आए अमाउंट को तीन ब्रैकेट 2.5—5 लाख, 5 लाख—10 लाख और उससे उपर में बांटा. इसके बाद शुरू के 5 लाख में से 2.5 लाख रुपये की टैक्स फ्री इनकम लिमिट घटाई और बचे हुए 2.5 लाख रुपये पर इस ब्रैकेट के लिए तय 5 फीसदी की दर से टैक्स कैलकुलेट किया. यह अमाउंट 12500 रुपये बना.

अब 5-10 लाख वाले ब्रैकेट में आए 5 लाख रुपये पर इस ब्रैकेट के लिए तय 20 फीसदी की दर से टैक्स कैलकुलेट किया. तीसरे और आखिरी 10 लाख रुपये से ऊपर के अमाउंट को 10 लाख रुपये से ज्यादा वाले ब्रैकेट में रखते हुए इसके लिए तय 30 फीसदी की दर से टैक्स कैलकुलेट किया. हर ब्रैकेट पर टैक्स कैलकुलेशन के बाद आए तीनों अमाउंट को जोड़कर बने कुल टैक्स अमाउंट पर 4 फीसदी की दर से सेस लगाया. इस तरह पूरा टैक्स कैलकुलेट हुआ.

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