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Budget 2020: आयकर दाताओं को टैक्स में मिलेगी बड़ी राहत! बजट से पहले सर्वे में खुलासा

Budget 2020: मोदी सरकार की तरफ से कॉरपोरेट टैक्स में कटौती के बाद व्यक्तिगत आयकर में कटौती की उम्मीद बढ़ गई है.

January 24, 2020 1:00 PM
good news for personal income tax payers! finance minister may give tax relief to tax payers says KPMG surveyBudget 2020: मोदी सरकार की तरफ से कॉरपोरेट टैक्स में कटौती के बाद व्यक्तिगत आयकर में कटौती की उम्मीद बढ़ गई है.

Budget 2020: मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल के दूसरे बजट में आयकरदाताओं को टैक्स कटौती का लाभ दे सकती है. बजट से पहले हुए एक सर्वे में यह खुलासा हुआ है. दरअसल, सर्वे में कंपनियों ने डिमांड और खपत बढ़ाने के लिए बजट 2020 में व्यक्तिगत आयकर दरों में कटौती की उम्मीद जताई है.

टैक्स एडवाइजर फर्म KPMG के अनुसार, ज्यादातर लोगों का मानना है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आयकर छूट सीमा मौजूदा 2.5 लाख रुपये सालाना से आगे बढ़ा सकतीं हैं. यहां यह उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्री ने चालू वित्त वर्ष के बजट में करदाताओं की 5 लाख रुपये तक की कर योग्य आय को टैक्स फ्री किया हुआ है.

तमाम छूट और रियायतों के बाद यदि कर योग्य आय 5 लाख रुपये से कम रहती है तो कोई टैक्स नहीं देना होगा. हालांकि, जहां तक कर स्लैब का मुद्दा है, उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया.

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अभी क्या है टैक्स रेट

व्यक्तिगत आयकर स्लैब में 2.5 लाख से 5 लाख रुपये तक की आय पर 5 फीसदी की दर से टैक्स देना होता है. वहीं, 5 लाख से 10 लाख तक 20 फीसदी और 10 लाख रुपये से अधिक के लिये 30 फीसदी की दर से आयकर लागू है. इसके अलावा वरिष्ठ नागरिकों और बुजुर्गों की आय में अधिक छूट है. टैक्स पर सेस और सरचार्ज भी लागू है.

स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ेगा, होम लोन पर मिलेगी राहत

सर्वे में शामिल लोगों में से ज्यादातर का यह भी मानना है कि सरकार एक फरवरी को पेश होने वाले बजट में स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाएगी और हाउसिंग लोन के मामले में और प्रोत्साहन दे सकती है.

बता दें, सरकार ने कंपनियों के लिये कॉरपोरेट टैक्स की दर घटाकर 25 फीसदी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में उतरने वाली नई कंपनियों के लिए 15 फीसदी की दर से टैक्स लगाने की घोषणा की है. हालांकि, इस रेट से टैक्स लगाने के साथ कंपनियों को विभिन्न मद में दी जाने वाली तमाम रियायतों और छूट को समाप्त कर दिया गया है.

हालांकि, इस कदम को सराहा गया और आर्थिक वृद्धि को बढ़ाने वाला बताया गया. लेकिन सितंबर तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर छह साल के न्यूनतम स्तर 4.5 फीसदी पर आ गई, जो पिछली तिमाही में 5 फीसदी थी.

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सर्वे मे 215​ कंपनियां शामिल

बजट पूर्व किए गए इस सर्वे में 215 कंपनियों को शामिल किया गया. इसमें मैज्योरिटी प्रतिभागियों का यह भी मानना है कि विदेशी कंपनियों के लिये भी घरेलू कंपनियों की तरह टैक्स रेट में कमी आनी चाहिए. कर की दर में कमी आनी चाहिए.

सर्वे के अनुसार, व्यक्तिगत आयकर में कटौती के जरिये फिर से प्रोत्साहन दिया जा सकता है। ‘‘ज्यादातर लोगों का मानना है कि 2.5 लाख रुपये की न्यूनतम आयकर सीमा को बढ़ाया जाएगा. साथ ही 30 फीसदी रेट के दायरे में आने वाली आय सीमा को भी बढ़ाया जा सकता है.

इससे पिछले साल ब्याज दर में हुई कटौती के साथ उपभोक्ता मांग बढ़ाने में मदद मिल सकती है.’’ सर्वे में 50 फीसदी प्रतिभागियों ने कहा कि निर्यात के लिये सेज इकाइयों को मिला टैक्स हॉलिडे का लाभ मार्च 2020 के बाद स्थापित इकाइयों को भी दिया जा सकता है.

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