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Budget 2019: सुस्त इकोनॉमी और बेरोजगारी से निपटने पर हो फोकस, जानें क्या हैं इंडस्ट्री की उम्मीदें

देश के नागरिकों ने सरकार को प्रचंड बहुमत दिया है जो केंद्र सरकार में उनके भरोसे को दिखाता है और अब सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह इस भरोसे को पूरा करे.

Updated: Jun 26, 2019 10:07 AM
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Budget 2019: मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला बजट ऐसे समय में पेश होने जा रहा है जिस समय देश की अर्थव्यवस्था सुस्त पड़ी हुई है और बेरोजगारी की समस्या विकराल रूप धारण किए हुए है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जब पहली बार बजट पेश करेंगे तो उनके सामने इन दोनों समस्याओं से निपटने की चुनौती प्रमुख तौर पर रहेगी. पिछले पांच साल में पहली बार इस साल जनवरी-मार्च तिमाही में देश की जीडीपी ग्रोथ 6 फीसदी से नीचे 5.8 फीसदी पर आ गई.

वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स मे भी चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.8 से घटाकर 6.6 फीसदी कर दिया है. मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इंप्लीमेंटेशन के मुताबिक 2017-18 में बेरोजगारी दर 6.1 फीसदी रही. इन आंकड़ों को देखते हुए बजट से यह आशा होगी कि इसमें इकोनॉमी को बढ़ाने के लिए उपाय किए जाएंगे जिससे रोजगार को भी बढ़ावा मिले.

2024 तक 5 लाख करोड़ की इकोनॉमी का लक्ष्य

भारत ने खुद ही 2024 तक 5 लाख करोड़ की इकोनॉमी होने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए जरूरी है कि केंद्र सरकार को सामाजिक और स्वास्थ्य योजनाओं को फाइनेंस करने के लिए रेवेन्यू बढ़ाने और इकोनॉमिक ग्रोथ को बढ़ाने वाली नीतियों के बीच संतुलन बनाना होगा. देश के नागरिकों ने सरकार को प्रचंड बहुमत दिया है जो केंद्र सरकार में उनके भरोसे को दिखाता है और अब सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह इस भरोसे को पूरा करे.

बजट से इंडस्ट्री की उम्मीदें

  • कॉरपोरेट टैक्स की उचित दर
    अपने समकक्ष इकोनॉमी वाले देशों के मुकाबले भारत में कॉरपोरेट टैक्स की दर सबसे अधिक है. इस समय कॉरपोरेट टैक्स की दर 30 फीसदी है और डिविडेंड डिस्ट्रिब्यूशन टैक्स की दर 20 फीसदी है. इन दोनों को मिलाकर कॉरपोरेट को करीब 50 फीसदी तक टैक्स चुकाना होता है. इसे जल्द से जल्द तर्कसंगत बनाए जाने की जरूरत है. कंपनियों के विस्तार योजना को प्रोत्साहित करने के लिए यह जरूरी है कि इसे कम किया जाए ताकि कंपनियों का मुनाफा बढ़ सके.
    कुछ महीने पहले अमेरिका और ब्रिटेन ने निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए कॉरपोरेट टैक्स की दरों में कटौती की है. अमेरिका में इसकी दर 35 फीसदी से घटाकर 21 फीसदी की गई है. कॉरपोरेट टैक्स में कटौती से कंपनियों के निवेश के साथ रोजगार भी बढ़ेगा. 2018-19 के बजट में कॉरपोरेट टैक्स की दर 25 फीसदी की गई थी लेकिन इसका फायदा सिर्फ 250 करोड़ रुपये के सालना रेवेन्यू से कम वाली कंपनियों को दिया गया. इसका फायदा अब सभी कंपनियों को दिया जाना चाहिए, चाहे उसका रेवेन्यू कितना भी अधिक क्यों न हो. इसके अलावा सरकार को बजट में टैक्स स्ट्रक्चर को सरल बनाया चाहिए जिससे कारोबार शुरू करने में आसानी हो.
  • अन्य टैक्सेज और टैक्स क्लॉज भी हो तर्कसंगत
    कॉरोपोरेट टैक्स के अलावा मिनिमल अल्टरनेट टैक्स (मैट) भी कारोबारियों का मुनाफा कम कर रहा है. इस समय इसकी दर 18.5 फीसदी है जो बहुत अधिक है. शुरुआत में मैट की दर 7.5 फीसदी थी जो समय के साथ बढ़कर आज 18.5 फीसदी पहुंच गई. इसे कम कर 15 फीसदी किया जाना चाहिए. इसके अलावा डिविडेंड्स पर लगने वाले टैक्स में भी सुधार किए जाने की जरूरत है. कॉरपोरेट प्रॉफिट पर भारी टैक्स चुकाने के बाद कंपनियों को डिविडेंड डिस्ट्रिब्यूशन टैक्स भी चुकाना पड़ता है. इक्विटी होल्डर्स (इंडिविजुअल्स, फर्म्स या एचयूएफ) को भी मिलने वाले 10 लाख रुपये से अधिक के डिविडेंड्स पर भी टैक्स चुकाना पड़ता है. डिविडेंड्स पर लगने वाला मल्टीपल टैक्सेशन सही नहीं है. इक्विटी इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देने के लिए इसे या तो खत्म किया जाना चाहिए, या तो कम किया जाना चाहिए.
  • CSR फंड पर भी बदले नीति
    वर्तमान नीतियों के मुताबिक कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी रेट (CSR) के तहत व्यय को एलोकेशन माना जाता है जबकि यह वैधानिक जिम्मेदारी है. इसे टैक्सेबल इनकम की गणना करते वक्त एक्सपेंडिचर के तहत रखा जाना चाहिए.
  • टैक्स स्लैब में बदलाव की जरूरत
    कंज्यूमर डिमांड कम होने की वजह से मैनुफैक्चरिंग सेक्टक की ग्रोथ प्रभावित हुई है. बजट में आम लोगों को टैक्स राहत दी जानी ताकि बचत के साथ खर्च भी बढ़ सके. इस साल अंतरिम बजट में 5 लाख रुपये तक टैक्स रीबेट की घोषणा की गई थी लेकिन टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया था. इसकी वजह से 5 लाख से अधिक की टैक्सबेल इनकम वालों को इस छूट से कोई फायदा नहीं मिला. सरकार को टैक्स स्लैब में बदलाव कर 10 लाख रुपये तक की आय वालों के स्लैब में बदलाव कर 20 फीसदी से टैक्स रेट घटा 10 फीसदी किया जाना चाहिए.

(Article: Vivek Jalan, Co-Founder, Tax Connect Advisory Services)

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