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Economic Survey 2020: बढ़ती जा रही है फूड सब्सिडी, सरकार को करनी होगी खाद्यान्य कीमतों की समीक्षा

Economic Survey 2020: वर्ष 2019- 20 की आर्थिक समीक्षा में बढ़ती खाद्य सब्सिडी की तरफ सरकार का ध्यान खींचा गया है.

January 31, 2020 6:01 PM
Economic Survey 2020 updates modi government should focus on food subsidy वर्ष 2019- 20 की आर्थिक समीक्षा में बढ़ती खाद्य सब्सिडी की तरफ सरकार का ध्यान खींचा गया है.

Economic Survey 2020: वर्ष 2019- 20 की आर्थिक समीक्षा में बढ़ती खाद्य सब्सिडी की तरफ सरकार का ध्यान खींचा गया है. इसमें कहा गया है कि राशन की दुकानों पर बिकने वाले खाद्यानों के दाम की समीक्षा करने की जरूरत है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा शुक्रवार को पेश 2019-20 की आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून (NFSA) के तहत राशन की दुकानों (PDS) के जरिये बेहद सस्ते दाम पर गेहूं, चावल बेचा जा रहा है. इसके तहत 3 रुपये किलो चावल, 2 रुपये किलो गेहूं और एक रुपये किलो मोटा अनाज बेहद सस्ती दर पर दिया जा रहा है.

खाद्य सब्सिडी बिल में इजाफा

समीक्षा में कहा गया है कि गरीबों की बड़ी संख्या को देखते हुए खाद्य सुरक्षा चुनौती बनती जा रही है. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत शुरुआत में खाद्यान्नों की दरें तीन साल की अवधि के लिए तय की गई थीं. साल 2013 से इनमें अब तक कोई बदलाव नहीं हुआ जिससे खाद्य सब्सिडी बढ़ती जा रही है.

NFSA के तहत दरों और इसके दायरे की समीक्षा करने की जरूरत है. समीक्षा में बताया गया है कि 2014-15 में खाद्य सब्सिडी बिल 1,13,171.2 करोड़ रुपये था जो 2018-19 में बढ़कर 1,71,127.5 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. इसमें कहा गया है कि खाद्य सब्सिडी बढ़ने के कई कारण रहे हैं.

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गेहूं और चावल का दाम बरकरार

समीक्षा में कहा गया है कि राशन दुकानों से खाद्यान्न बेचने के लिये जारी होने वाले केन्द्रीय निर्गम मूल्य को तो बढ़ाया गया है लेकिन लाभार्थी के लिये दाम नहीं बढ़ाए गए. इसमें गेहूं का दाम 200 रुपये क्विंटल और चावल का दाम 300 रुपये क्विंटल पर बरकरार रखा गया है.

चालू वित्त वर्ष 2019- 20 के दौरान दिसंबर 2019 तक सरकार ने राज्यों और संघ शासित प्रदेशें को विभिन्न योजनाओं के लिये 603.88 लाख टन अनाज का आवंटन किया. खाद्य सुरक्षा कानून के तहत सरकार पात्र व्यक्ति को हर महीने पांच किलो सस्ता अनाज उपलब्ध कराती है. देश में पांच लाख राशन दुकानों के जरिये 81 करोड़ लोगों को सस्ता राशन उपलब्ध कराया जाता है.

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