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Budget 2022: FinTech, ​स्‍टार्टअप्‍स, रूरल बैकिंग को बजट से उम्‍मीदें, क्या GST और TDS में मिलेगी राहत

यह बजट ऐसे समय मं पेश हो रहा है, जब कोरोना वायरस महामारी से उबरकर देश इकोनॉमिक रिकवरी के दौर में है. देश में मैक्रो कंडीशंस में तेजी से सुधार हो रहा है. ग्रोथ इंडीकेटर्स में पॉजिटिव रिकवरी है. ऐसे में हर सेक्टर की बजट पर निगाहें लगी हुई हैं.

यह बजट ऐसे समय मं पेश हो रहा है, जब कोरोना वायरस महामारी से उबरकर देश इकोनॉमिक रिकवरी के दौर में है.

Budget 2022 Expectations: वित्त वर्ष 2022 के लिए बजट पेश होने में अब ज्यादा दिन नहीं रह गए हैं. यह बजट ऐसे समय मं पेश हो रहा है, जब कोरोना वायरस महामारी से उबरकर देश इकोनॉमिक रिकवरी के दौर में है. देश में मैक्रो कंडीशंस में तेजी से सुधार हो रहा है. ग्रोथ इंडीकेटर्स में पॉजिटिव रिकवरी है. ऐसे में हर सेक्टर की बजट पर निगाहें लगी हुई हैं. चाहे वह FinTech हो, ​स्‍टार्टअप्‍स हों या रूरल बैकिंग सेक्टर. सभी को बजट से कुछ न कुछ राहत की उम्मीद है. सरकार का फोकस वैसे भी स्‍टार्टअप्‍स पर है, ऐसे में एक्सपर्ट भी मान रहे हैं कि इस सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए सरकार कुछ बड़ी सौगात दे सकती है. वहीं मौजूदा समय में फिनटेक कंपनियों का भी जोर है और ऐसी कुछ कंपनियां बाजार में लिस्ट हुई हैं या लिस्ट होने की कतार में हैं.

स्टार्ट-अप इंडिया सीड फंड योजना

BharatATM के फाउंडर राम श्रीराम का कहना है कि 2021 में फिनटेक और स्टार्टअप इकोसिस्टम द्वारा एक्सीलरेटेड ग्रोथ देखी गई है, जिसने विकास को बनाए रखने के साथ ही ग्राहकों के कॉन्फिडेंस को प्रोटेक्ट किया है. इस बजट में, हम यह उम्मीद करते हैं कि सरकार स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए स्टार्ट-अप इंडिया सीड फंड योजना के दायरे का विस्तार करेगी. उनका कहना है कि प्वॉइंट्स ऑफ सेल टर्मिनल की खरीद पर छूट, ग्रामीण बैंकिंग एजेंटों के लिए GST दरें और मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) छूट की भरपाई के लिए सब्सिडी जैसे कुछ उपाय हैं, जिन पर इंडस्ट्री की नजर है.

GST और TDS पर राहत

उनका कहना है कि डिजिटल पेमेंट सेक्टर में ग्रोथ और इसे अपनाना सेल्फ सर्विस्ड डिजिटल कस्टमर्स के लिए जेंटल टैक्सेशन का परिणाम है. यह सुनिश्चित करने के लिए कि इसी तरह का फायदा कम टेक सेवी लोगों तक पहुंचे, सरकार को पूरे भारत में बिजनेस करेस्पॉन्डेंट (BC) आउटलेट्स के जरिए दी जाने वाली फाइनेंशियल इन्क्लूजन सर्विसेज के लिए GST और TDS पर राहत देनी चाहिए. GST और TDS की छूट इंडस्ट्री को सीमलेस फाइनेेंशियल सर्विसेज की पेशकश की लागत को कम करने में मदद करेगी.

सही बजट की जरूरत

ForeignAdmits के सीईओ और सहसंस्थापक, अश्विनी जैन का कहना है कि मेक इन इंडिया के बड़े प्रभाव को आगे ले जाने के विचार के साथ, स्टार्ट-अप की भूमिका को भी समझना अहम है. स्टार्ट-अप और उनके नए आइडियाज को अर्थव्यवस्था में योगदान देने के लिए उचित बजट की जरूरत है. देश में बेहतर स्टार्ट-अप स्थितियों से अर्थव्यवस्था से जुड़ी कई समस्याओं को हल हो सकता है. सरकार को आगामी वित्त वर्ष के बजट चर्चा के दौरान कुछ महत्वपूर्ण फैक्टर्स को ध्यान में रखना चाहिए. जिसमें GST को कम करना, स्टार्ट-अप को अधिक अलोकेशन और सार्वजनिक डाटा को सुलभ बनाना. स्टार्ट-अप को भी विकास के चरण में इक्विटी और ब्याज मुक्त कर्ज मिलना चाहिए ताकि वे देश की अर्थव्यवस्था में योगदान देने में मदद कर सकें.

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