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Budget 2021: वसीयत के ऊपर फैमिली ट्रस्ट का बढ़ रहा चलन, बजट से लेकर क्या है उम्मीदें

Budget 2021: एक-एक करके हस्तांतरण की योजना तैयार करने की बजाय अधिकतर लोग वसीयत का प्रयोग करते रहे हैं और अब एक नया चलन शुरू हुआ है, फैमिली ट्रस्ट बनाकर हस्तांतरित करने का.

December 3, 2020 7:25 PM
budget 2021 what is family trust which is more useful than will to succession and knwo what one may expect in budget 2021फैमिली ट्रस्ट के मामले में डॉक्युमेंट की प्राइवेसी भी बनी रहती है क्योंकि इसे किसी कोर्ट प्रक्रिया के जरिए लागू नहीं कराया जाता है जैसा कि वसीयत के मामले में होता है.

Budget 2021: हर किसी की जिंदगी में उत्तराधिकार की योजना तैयार करना सबसे जरूरी हिस्सा है. पीढ़ियों के बीच संपत्ति ट्रांसफर करने के कई तरीके हैं. ग्रुप कंपनियों के शेयर, बैंक बैलेंस, फिक्स्ड डिपॉडिट और अन्य फाइनेंसियल एसेट्स जैसी चल संपत्तियों के हस्तांतरण के लिए अगली पीढ़ी को नॉमिनी बनाया जा सकता है. इस प्रकार ये संपत्तियां वर्तमान ओनर की मृत्यु के पश्चात अगली पीढ़ी को हस्तांतरित हो जाती है. ज्वैलरी जैसी अन्य मूल्यवान वस्तुओं को आमतौर पर इंडिविजुअल अपने जीवनकाल में ही आमतौर पर अगली पीढ़ी को उपहार में दे देते हैं. हालांकि इस तरह एक-एक करके हस्तांतरण की योजना तैयार करने की बजाय अधिकतर लोग वसीयत का प्रयोग करते रहे हैं और अब एक नया चलन शुरू हुआ है, फैमिली ट्रस्ट बनाकर हस्तांतरित करने का.

वसीयत के मुकाबले फैमिली ट्रस्ट बनाना ज्यादा बेहतर

अगली पीढ़ी को अपनी संपत्ति के हस्तांतरण के लिए फैमिली ट्रस्ट बनाने का फैसला वसीयत से अधिक बेहतर है. इसकी वजह यह है कि ट्रस्ट को पुरानी पीढ़ी (पैट्रियार्क) अपने जीवनकाल में ही अनुबंधित कर यह सुनिश्चित कर सकता है कि उसकी अनुपस्थिति में यह उसी तरह फंक्शन करेगा जैसा उसने सोचा है.

जरूरत पड़ने की स्थिति में वह इसे अधिक प्रभावकारी बनाने के लिए जरूरी बदलाव भी कर सकता है. इसके अलावा फैमिली ट्रस्ट के मामले में डॉक्युमेंट की प्राइवेसी भी बनी रहती है क्योंकि इसे किसी कोर्ट प्रक्रिया के जरिए लागू नहीं कराया जाता है जैसा कि वसीयत के मामले में होता है.

दोहरे फैमिली ट्रस्ट स्ट्रक्चर के मामले में लायबिलिटी

फैमिली ट्रस्ट बनाते समय अधिकतर प्रमोटर ग्रुप दोहरा ट्रस्ट स्ट्रक्चर चुनते हैं, मास्टर ट्रस्ट और उप-ट्रस्ट. इसके जरिए न सिर्फ अगली पीढ़ी के लिए उत्तराधिकार योजना सुनिश्चित की जा सकती है बल्कि कई पीढ़ियों के लिए यह बेहतर योजना साबित हो सकती है.

आयकर कानून, 1961 के सेक्शन 56(2)(x) के तहत किसी एसेसी को संपत्तियों के फेयर वैल्यू पर इनकी रसीद दिखानी होती है. इस प्रकार ट्रस्ट को पारिवारिक संपत्ति (जैसे कि कॉर्पोरेट शेयरहोल्डिंग्स, ज्वैलरी इत्यादि) हस्तांतरित करने पर फेयर वैल्यू पर रसीद की जरूरत पड़ेगी. रसीद दिखाने का मतलब टैक्स लायबिलिटी से है. हालांकि इस सेक्शन के तहत एक छूट भी मिली हुई है. इस छूट के तहत अगर किसी इंडिविजुअल ने ऐसा ट्रस्ट बनाया है जिससे उसके संबंधियों को फायदा मिलता हो. संबंधियों की व्याख्या इस सेक्शन में की गई है और इसमें सिर्फ इंडिविजुअल्स को शामिल किया गया है.

हालांकि दोहरे ट्रस्ट मॉडल में एग्जेंप्शन को लेकर स्पष्टता नहीं है. इसे लेकर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि अगर किसी मास्टर ट्रस्ट का लाभार्थी उपट्रस्ट को बनाया गया है और उपट्रस्ट के लाभार्थी ऐसे इंडिविजुअल्स हैं जो मास्टर ट्रस्ट के डोनर के संबंधी हैं तो क्या सेक्शन 56(2)(x) के तहत एग्जेंप्शन मिलेगा?

विवेकाधीन फैमिली ट्रस्ट के कैपिटल गेन्स पर टैक्सेबिलिटी

डिस्क्रेशनरी ट्रस्ट (विवेकाधीन ट्रस्ट) ऐसा ट्रस्ट है जिसमें इसके निर्माण के समय लाभार्थियों की व्याख्या नहीं की गई हो. यह ट्रस्टी के विवेक पर होता है कि ट्रस्ट की आय और एसेट्स को लाभार्थियों के बीच इसकी मात्रा (क्वांटम) और समय पर निर्णय ले. सेक्शन 164 के तहत इस प्रकार के ट्रस्ट की पूरी आय इंडिविजुअल के मामले में आय के अधिकतम स्लैब के मुताबिक टैक्स रेट (सरचार्ज समेत) के आधार पर टैक्सेबल होती है.

इस समय इंडिविजुअल के लिए अधिकतम टैक्स स्लैब 30 फीसदी है और इस पर सरचार्ज और एजुकेशन सेस भी देय है.
आईटी एक्ट के सेक्शन 112, 112ए और 111ए के तहत कैपिटल गेन्स पर 10-20 फीसदी के बीच टैक्स देय होता है. ऐसे में विवेकाधीन फैमिली ट्रस्ट के मामले में कैपिटल गेन्स होने पर इस पर 10-20 फीसदी की टैक्स देय होना चाहिए.

फैमिली ट्रस्ट के मामले में डिडक्शंस

अगर फैमिली ट्रस्ट के लाभार्थी इंडिविजुअल्स हैं तो उस पर इंडिविजुअल के समान टैक्स लगना चाहिए. इस सिद्धांत को कई अदालतों में भी स्वीकार किया गया है, जहां ट्रस्ट की टैक्स देनदारी को लेकर सुनवाई हो रही थी. इंडिविजुअल्स और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) को सेक्शन 54एफ, सेक्शन 80सी, सेक्शन 80सीसीए के तहत कई डिडक्शंस मिलती है. इसी प्रकार के डिडक्शंस की सुविधा प्राइवेट फैमिली ट्रस्ट को भी मिलनी चाहिए.

फैमिली ट्रस्ट को मिले लाभांश पर करदेयता

फाइनेंस एक्ट, 2020 के तहत डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (डीडीटी) को समाप्त कर दिया गया है और अब शेयरधारकों को जो लाभांश मिल रहा है, उसे अपने इनकम टैक्स रेट के मुताबिक टैक्स भरना होगा. फैमिली ट्रस्ट या हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs)के मामले में यह टैक्स अधिकतम 35.88 फीसदी (मैक्सिमम 15 फीसदी सरचार्ज और 4 फीसदी सेस समेत) तक हो सकता है. डीडीटी समाप्त होने से पहले तक लाभांश पाने वाले को इस पर सेक्शन 115बीबीडीए के तहत महज 10 फीसदी टैक्स चुकाना पड़ता था.

टैक्स चुकाने के बाद कंपनी का लाभ ही डिविडेंड (लाभांश) है. ऐसे में डिविडेंड पर शेयरधारकों से टैक्स लेना एक ही आय पर दोहरे टैक्स के समान है. डिविडेंट इनकम पर टैक्स खत्म किए जाने पर कॉरपोरेट स्ट्रक्चर और पार्टरनरशिप फर्म्स या एलएलपी (लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप) द्वारा लाभ वितरण एक समान हो जाएंगे, जहां पार्टनर्स के बीच प्रॉफिट शेयर पर टैक्स नहीं देना होता है. इस प्रकार ऐसी प्राइवेट फैमिली ट्रस्ट जो कॉर्पोरेट और पर्सनल एसेट्स होल्ड किए हुए है, इनकम टैक्स की तरफ से स्पष्टीकरण होना चाहिए. ऐसे किसी भी कदम का स्वागत होगा.

उत्तराधिकार की पारदर्शी व्यवस्था

फैमिली ट्रस्ट बनाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह उत्तराधिकार की पारदर्शी व्यवस्था है जिसके जरिए उत्तराधिकार के झगड़े की संभावना को समाप्त किया जा सकता है. यह कारोबार को लगातार जारी रहने और ब्रांड की सुरक्षा को भी सुनिश्चित करता है. इस कारण से कर प्रावधानों को लेकर स्पष्टता बनाई जानी चाहिए ताकि देश में कारोबारी और आर्थिक संपन्नता सुनिश्चित की जा सके.

(Article: Suvira Agarwal, Associate Partner, Grant Thornton Bharat, with inputs from CA Aashna Malhotra)

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