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Union Budget 2021 Expectations: कैसे बढ़ेगी हाउसिंग डिमांड? घर खरीददारों की बजट से हैं ये उम्मीदें

Union Budget 2021 Expectations for Home Buyers:  वित्त वर्ष 2021-22 के लिए जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करेंगी तो उसमें हाउसिंग सेक्टर के लिए भी घोषणाएं हो सकती हैं.

Updated: Dec 31, 2020 7:58 AM
Budget 2021 expectations for home buyers Loan rates at record-low but demand is down What to expect IN NEXT BUDGET PRESEWNTED BY FINANCE MINISTER NIRMALA SITHARAMANहोम लोन पर ब्याज दर कम होने के बावजूद घर की मांग बढ़ नहीं रही है, ऐसे में बजट में टैक्स बेनेफिट के जरिए इस मांग में बढ़ोतरी की जा सकती है.

Union Budget 2021 Expectations for Home Buyers: वित्त वर्ष 2021-22 के लिए जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करेंगी तो उसमें हाउसिंग सेक्टर के लिए भी घोषणाएं हो सकती हैं क्योंकि मोदी सरकार की शहरी लोगों के लिए महत्वाकांक्षी योजना ‘सबके लिए घर (हाउसिंग फॉर ऑल)’ की डेडलाइन वर्ष 2022 करीब आ गई है. केंद्र सरकार ने पिछले कुछ समय में रीयल एस्टेट सेक्टर की मांग बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए लेकिन उम्मीद के मुताबिक घरों की मांग में बढ़ोतरी नहीं दिखी. घरों की मांग में जो बढ़ोतरी देखने को मिली उसका सबसे महत्वपूर्ण कारण यह रहा कि होम लोन की ब्याज दरें अधिकतर लोगों के लिए 7 फीसदी से भी नीचे आ गई. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि सरकार अपनी तरफ से हाउसिंग डिमांड को बढ़ाने के लिए केंद्रीय बजट 2021 में घोषणाएं कर सकती हैं.

मायवेल्थडॉटकॉम के को-फाउंडर हर्षध चेतनवाला के मुताबिक होम लोन पर ब्याज दर कम होने के बावजूद घर की मांग बढ़ नहीं रही है, ऐसे में बजट में टैक्स बेनेफिट के जरिए इस मांग में बढ़ोतरी की जा सकती है. चेतनवाला के मुताबिक अगले वित्त वर्ष 2021-22 के लिए बजट में नए घर खरीदारों को ब्याज अदायगी को लेकर अधिक टैक्स छूट के रूप में बेनेफिट का प्रावधान चाहे तो सरकार कर सकती है.

प्रधानमंत्री आवास योजना

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी स्कीम (सीएलएसएस) के तहत एमआईजी-1 और एमआईजी-2 श्रेणियों के तहत घर खरीदने की डेडलाइन बढ़ा दिया है. अब पीएमएवाई सीएलएसएस के तहत जिन लोगों को घर खरीदना चाहते हैं, उनके लिए डेडलाइन 31 मार्च 2020 से बढ़ाकर 31 मार्च 2021 कर दी गई है. हालांकि एलआईजी/ईडब्ल्यूएस (लोअर इनकम ग्रुप/इकोनॉमिकल वीकर सेक्शन) के तहत डेडलाइन 31 मार्च 2022 है.

पीएमएवाई सीएलएसएस स्कीम के तहत 6 लाख से 12 लाख की आय वाले लोगों को एमआईजी-1 (मिडिल इनकम ग्रुप-1) के तहत घर मिलता है और उन्हें 9 लाख रुपये तक के होम लोन पर 4 फीसदी की ब्याज सब्सिडी मिलती है. 12 लाख से 18 लाख तक की आय वालों को एमआईजी-2 श्रेणी में रखा गया है और उन्हें 9 लाख रुपये तक के होम लोन पर 3 फीसदी की ब्याज सब्सिडी मिलती है. इस तरह से पीएमएवाई सीएलएसएस योजना के तहत एमआईजी-1 श्रेणी में 2,35,068 रुपये और एमआईजी-2 श्रेणी में 2,30,156 रुपये की सब्सिडी मिलती है. अब उम्मीद लगाई जा रही है कि बजट 2021 में सरकार कुछ और राहत दे सकती है.

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सेक्शन 80 ईईए के तहत अतिरिक्त टैक्स बेनेफिट

पहली बार खरीदने वालों को सरकार ने होम लोन की ब्याज अदायगी पर मिलने वाले टैक्स बेनेफिट को बढ़ा दिया है. सेक्शन 80ईईए के तहत खरीदार को होम लोन के ब्याज भुगतान पर कुछ परिस्थितियों में 1.5 लाख रुपये तक के डिडक्शन का फायदा ले सकता है. इस डिडक्शन का फायदा लेने के लिए एक कंडीशन यह है कि इसके लिए लोन 1 अप्रैल 2019 से लेकर 31 मार्च 2020 के बीच सैंक्शन होना चाहिए. हालांकि इसे आगे बढ़ाकर अब 31 मार्च 2021 कर दिया गया है यानी सेक्शन 80 ईईए के तहत यह फायदा 31 मार्च 2021 तक सैंक्शन हुए लोन पर मिलेगा.
सेक्शन 80 ईईए के तहत टैक्स बेनेफिट लेने के लिए स्टांप ड्यूटी के मुताबिक घर की कीमत 45 लाख रुपये से कम की होनी चाहिए. डेलाइट इंडिया की पार्टनर Aarti Raote के मुताबिक इस प्रावधान के कारण अधिकतर लोग इस छूट का फायदा नहीं उठा पाते हैं, ऐसे में सरकार को 45 लाख की लिमिट को बढ़ानी चाहिए और टैक्सपेयर के पास कोई भी दूसरा घर नहीं होने की शर्त हटानी चाहिए. सेबी रजिस्टर्ड इंवेस्टमेंट एडवाइजर (आरआईए) और हम फौजी के सीईओ कर्नल संजीव गोविला (रिटायर्ड) की मांग है कि सरकार अफोर्डेबल हाउसिंग की परिभाषा में बदलाव कर इसकी सीमा को 45 लाख रुपये से बढ़ाकर 75 लाख रुपये कर दे.

सेक्शन 24 सीमा

इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 24 के तहत ब्याज भुगतान पर टैक्स बेनेफिट मिलता है. बीडीओ इंडिया के एसोसिएट पार्टनर- टैक्स एंड रेगुलेटरी सर्विसेज रघुनाथन पार्थसारथी के मुताबिक इस समय सेल्फ-अकुपाइड प्रॉपर्टी (यानी कि घर में खुद रह रहे हों) के हाउसिंग लोन के ब्याज पर 2 लाख तक का डिडक्शन मिलता है. पार्थसारथी के मुताबिक घर खरीदारों की इच्छा है कि सरकार इस डिडक्शन की सीमा को सालाना 4 लाख रुपये तक कर दे.

रेंटल इनकम पर बुरा प्रभाव

‘इनकम फ्रॉम हाउस प्रॉपर्टी’ हेड के तहत होने वाले लॉस को किसी अन्य इनकम हेड (‘इनकम फ्रॉम सैलरी’ समेत) को सेट ऑफ करने के लिए अधिकतम सीमा सालाना 2 लाख रुपये रखा गया था. इस लॉस को अगले 8 साल तक फॉरवर्ड किया जा सकता है, हालांकि इसे सिर्फ ‘इनकम फ्रॉम हाउस प्रॉपर्टी’ हेड के तहत सेट ऑफ किया जा सकता है. इस नियम की वजह से हजारों टैक्सपेयर्स पर बुरा प्रभाव पड़ा है जिन्होंने पहले के सेट ऑफ रूल्स के मुताबिक हाउसिंग लोन लिया है. इसके अलावा कोरोना महामारी के कारण रेंटल आय में कमी आई है, हाउस प्रॉपर्टी से होने वाले लॉस में बढ़ोतरी होगी. पार्थसारथी के मुताबिक डिडक्शन की लिमिट और लॉस के सेट ऑफ को संशोधित कर 5 लाख तक किया जाना चाहिए.

पैसिव इनकम

कुछ वरिष्ठ निवेशक रीयल एस्टेट प्रॉपर्टीज में निवेश करते हैं ताकि उससे किराया मिलता रहे. कोरोना महामारी ने इस प्रकार की आय को बुरी तरह से प्रभावित किया है. आरती के मुताबिक ब्याज दरों में गिरावट और किराए से होने वाली में आय में कमी से वरिष्ठ नागरिकों के सामने वित्तीय समस्याएं आ रही हैं. ऐसे में सरकार को उनके मेडिकल, रेंटल, टेलीफोन और इलेक्ट्रिसिटी इत्यादि पर आने वाले खर्च को लेकर एक मैकेनिज्म तैयार करना चाहिए. इसे टैक्स के दायरे में नहीं लाना चाहिए.
(Article: Sunil Dhawan)

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