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Budget 2021: प्रतिस्पर्धी इंपोर्ट टैरिफ्स के लिए हों श्रेणीबद्ध स्लैब, बैंकों के लिए NPA प्रोविजनिंग की बढ़े सीमा-CII

उद्योग संगठन CII ने सरकार को अपनी प्री-बजट सिफारिशों के तहत प्रतिस्पर्धी इंपोर्ट टैरिफ्स को लेकर तीन साल के लिए श्रेणीबद्ध रोडमैप का सुझाव दिया है.

Updated: Dec 27, 2020 8:12 PM
Budget 2021: CII suggests graded road map towards competitive import tariffs, union budget 2021-22, union budget 2021Image: Reuters

Union Budget 2021: उद्योग संगठन CII ने सरकार को अपनी प्री-बजट सिफारिशों के तहत प्रतिस्पर्धी इंपोर्ट टैरिफ्स को लेकर तीन साल के लिए श्रेणीबद्ध रोडमैप का सुझाव दिया है. इसमें कच्चे माल के लिए 0 से 2.5 फीसदी का निल स्लैब, फिनिश्ड गुड्स के लिए 5 से 7.5 फीसदी तक का उच्चतम स्लैब और इंटरमीडिएट्स के लिए 2.5 से 5 फीसदी तक का स्लैब शामिल है.

कनफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) ने बजट 2021 के लिए इस रोडमैप को डॉमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहन देने के लिए यह प्रस्ताव दिया है और इसमें ग्लोबल ट्रेड ट्रेंड्स को ध्यान में रखा है. उद्योग संगठन का कहना है कि इससे भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा. भारतीय उद्योग को ग्लोबल वैल्यू चेन में इंटीग्रेट होने में मदद मिलेगी और देश अपने सामान व सर्विसेज के साथ दुनिया के बाजारों में प्रतिस्पर्धी बनेगा.

रोजगार को उच्च स्तरों तक बढ़ावा देने की जरूरत

रोजगार को उच्च स्तरों तक बढ़ावा देने की जरूरत पर बल देते हुए सीआईआई ने सुझाव दिया है कि हायर स्किल्ड जॉब्स में नौकरी को प्रोत्साहन देने के लिए कुल मासिक वेतन की ऊपरी लिमिट को बढ़ाकर 50000 रुपये प्रतिमाह किया जाए.

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बैंकों के लिए NPA प्रोविजनिंग की बढ़े सीमा

सीआईआई ने यह भी कहा कि पिछले कुछ सालों में देखा गया है कि बैंकों की वित्तीय मजबूती बेहतर बनाने और वित्तीय सेक्टर की स्थिरता के लिए आरबीआई ने अनिवार्य किया है कि बैंकों को अपनी NPA (नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स) प्रोविजनिंग को बढ़ाना चाहिए. सीआईआई ने सुझाव दिया है कि भारतीय बैंकों के बैड व संदेह वाले कर्जों के लिए प्रोविजनिंग को लेकर सेक्शन 36(1)(viia)(a) के तहत उल्लिखित सीमा को बढ़ाया जाना चाहिए. प्रोविजनिंग के लिए यह सीमा वर्तमान के 8.5 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी की जानी चाहिए.

यह भी कहा कि आरबीआई ने किसी अकाउंट की NPA के तौर पर पहचान किए किए जाने को लेकर समयसीमा को 6 माह से घटाकर 90 दिन कर दिया है. सीआईआई ने सुझाव दिया कि नियम 6EA में संशोधन होना चाहिए ताकि बैंकों के मामले में यह सहूलियत दी जा सके कि NPA पर 90 दिनों से अधिक वक्त से बकाया ब्याज को कुल आय से बाहर रखा जाए और इस पर केवल प्राप्ति के आधार पर कर लगाया जाए.

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