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Budget 2019: मिडिल क्लास को मिलेगी राहत! बेसिक एग्जेंम्पशन लिमिट से LTCG तक, टैक्सपेयर्स की ये हैं 5 उम्मीदें

बजट में इनकम टैक्स का बोझ कम करने की दिशा में फैसले लिए जाने की उम्मीद

June 25, 2019 1:11 PM

Budget 2019: Modi government may reduce income tax burden on middle class taxpayers; top 5 things to expect

आदित्य मोदानी

मोदी सरकार ने पिछले 5 सालो में करदाताओं की संख्या बढ़ाने, कर चोरी पर लगाम लगाने और टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन को सरल बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं. उम्मीद है कि अगले 5 सालों में भी सरकार की यही कोशिश रहेगी. साथ ही यह पक्का है कि इकोनॉमी की ग्रोथ, टैक्स कलेक्शन में बढ़ोत्तरी और टैक्सेज के एडमिनिस्ट्रेशन में कई डिजिटिल पहल करने की दिशा में और ज्यादा कदम उठाए जाएंगे.

ऐसे में मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स पर से टैक्स का बोझ घटाना भी अतीत की तरह ही सरकार की प्राथमिकता रहेगी. 2014 में सरकार ने बेसिक एग्जेंप्शन लिमिट को बढ़ाया था, 5 लाख रुपये तक की इनकम वाले टैक्सपेयर्स के लिए टैक्स रेट घटाकर 5 फीसदी किया था, 50000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन लाया गया था और टैक्स रिबेट को बढ़ाकर 12500 रुपये किया गया था.

इस बार के बजट में भी सरकार द्वारा मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स पर से इनकम टैक्स का बोझ कम करने की दिशा में फैसले लिए जाने की उम्मीद है. इनमें से 5 फैसले प्रमुख रूप से प्रस्तावित किए जा सकते हैं…

1. बेसिक एग्जेम्पशन लिमिट बढ़ाया जाना

वर्तमान में 2.5 लाख रुपये तक की टैक्सेबल इनकम वालों के लिए इनकम टैक्स शून्य है. इसे बेसिक एग्जेम्पशन कहा जाता है. लेकिन 12500 रुपये तक के टैक्स रिबेट के चलते 500000 लाख रुपये तक की टैक्सेबल इनकम वालों को कोई टैक्स नहीं देना होता है. उम्मीद है कि इस बार के बजट में सरकार बेसिक एग्जेम्पशन लिमिट को 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर सकती है. यानी 5 लाख रुपये तक की टैक्सेबल इनकम वालों के लिए इनकम टैक्स शून्य किया जा सकता है.

2. चैप्टर VI A के डिडक्शंस में बढ़ोत्तरी

चैप्टर VI A के डिडक्शन, टैक्सपेयर्स को चुनिंदा इन्वेस्टमेंट और/या खर्चों पर टैक्स डिडक्शन यानी कर कटौती का दावा करने की अनुमति देते हैं. इस टैक्स कटौती की लिमिट अभी 1.5 लाख रुपये है यानी चुनिंदा इन्वेस्टमेंट या खर्चों के जरिए आप इनकम टैक्स में 1.5 लाख रुपये तक की कटौती का दावा कर सकते हैं. वित्त मंत्री बजट 2019 में इस लिमिट को बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर सकती हैं.

3. NPS के टैक्सेशन का रेशनलाइजेशन

उम्मीद की जा रही है कि वित्त मंत्री नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) से विदड्रॉल पर लगने वाले टैक्स को रेशनलाइज करने का प्रस्ताव रख सकती हैं. इस पर अन्य रिटायरमेंट सेविंग्स ऑप्शन जैसे इंप्लॉई प्रॉविडेंट फंड व पब्लिक प्रॉविडेंट फंड पर लागू होने वाले टैक्सेशन नियमों के समान नियम लागू किए जा सकते हैं.

4. LTCG टैक्स

पिछले साल तक इक्विटी शेयर या इक्विटी ओरिएंटेड फंड्स की बिक्री से प्राप्त होने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स पर टैक्स नहीं लगता था. इसके बाद वित्त वर्ष 2018-19 से 1 लाख रुपये से ज्यादा के गेन्स पर टैक्स की दर 10 फीसदी तय की गई. अब इक्विटी मार्केट में ज्यादा से ज्यादा निवेशकों को आकर्षित करने के लिए उम्मीद की जा रही है कि सरकार इस कैपिटल गेन की एग्जेंप्शन लिमिट को 1 लाख रुपये से बढ़ा सकती है.

5. डिजिटल ट्रांसफॉरमेशन

उम्मीद है कि वित्त मंत्री ​का जोर और ज्यादा डिजिटल ट्रांसफॉरमेशन किए जाने पर रहेगा. इसमें टेक्नोलॉजी के जरिए टैक्स रिटर्न की प्रॉसेसिंग, टैक्सपेयर डाटा का मिलान करने के लिए बिग डाटा, एनालिटिक्स जैसे टूल शामिल हैं.

(आदित्य मोदानी EY में टैक्स डायरेक्टर, पीपुल एडवायजरी सर्विसेज हैं. ये उनके व्यक्तिगत विचार हैं.)

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