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Budget 2019: इंदिरा गांधी ने पहली महिला वित्त मंत्री के तौर पर पेश किया था बजट, फैक्ट्री कामगारों के लिए हुए थे अहम एलान

इंदिरा गांधी ने 1970 में आम बजट पेश किया था और अब 2019 में वित्त मंत्री के तौर पर निर्मला सीतारमण आम बजट पेश करेंगी.

July 5, 2019 9:12 AM
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Budget 2019: मोदी 2.0 का पहला बजट आज पेश हो रहा है. अंतरिम बजट 1 फरवरी को पेश किया गया था. इस वित्त वर्ष के लिए पेश होने जा रहे आम बजट की सबसे बड़ी खास बात यह है कि पहली बार कोई पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री आम बजट पेश करेगी. इससे पहले स्वतंत्र भारत में सिर्फ इंदिरा गांधी ने ही बजट पेश किया था लेकिन वह पूर्णकालिक वित्त मंत्री नहीं थीं. इंदिरा गांधी ने 1970 में आम बजट पेश किया था और अब 2019 में वित्त मंत्री के तौर पर निर्मला सीतारमण आम बजट पेश करेंगी.

PM रहते इंदिरा गांधी ने संभाला था वित्त मंत्री का कार्यभार

स्वतंत्र भारत में सबसे पहले इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) ने बजट पेश किया था. उस समय वह प्रधानमंत्री के पद पर भी थीं. इंदिरा गांधी की सरकार में मोरारजी देसाई उपप्रधानमंत्री के अलावा वित्त मंत्री के पद पर थे. पीएम गांधी ने उन्हें वित्त मंत्री के पद से हटाकर खुद कार्यभार संभाल लिया. हालांकि उन्होंने उपप्रधानमंत्री के पद पर देसाई को बने रहने को कहा लेकिन मोरारजी देसाई ने इंदिरा गांधी की कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया. वित्त मंत्री के तौर पर इंदिरा गांधी ने 28 फरवरी 1970 को आम बजट पेश किया था. वह 16 जुलाई 1969 से 27 जून 1970 तक प्रधानमंत्री थीं.

इंदिरा गांधी के बजट की खास बातें

  • यह बजट पूरे 15 पृष्ठों का था और इसके पार्ट ए में 17 और पार्ट बी में 38 पॉइंट्स थे.
  • बजट में उन्होंने चौथे पंचवर्षीय योजना के पहले साल 1969-70 में उन्होंने पांच से साढे़ पांच फीसदी की ग्रोथ रेट का अनुमान लगाया था.
  • बजट में 10 करोड़ रुपये के ऑथराइज्ड शेयर कैपिटल से शहरी विकास परिषद (अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन) के गठन की घोषणा की गई. यह परिषद स्लम समस्या को दूर करने और हाउसिंग व शहरी जमीन के विकास जैसी वित्तीय गतिविधियों के लिए बाजार से फंड जुटाएगी. इसे निर्माण की गति को तेज करने, आवास की कमी को समाप्त करने और शहरी केंद्रों के व्यवस्थित विकास के उद्देश्य से गठित किया गया था.
  • औद्योगिक कामगारों के हित में बजट में बड़ी घोषणा की गई. बजट में वित्त मंत्री ने घोषणा किया कि अब एंप्लाइज प्राविडेंट फंड (EPF) में एंप्लाई की सैलरी के 8 फीसदी और एंप्लायर्स के अलावा सरकार भी अपना योगदान करेगी. बजट घोषणा के मुताबिक ईपीएफ में पे कांट्रिब्शन को सरकारी सहारा दिया जाएगा और कर्मी की मृत्यु होने की परिस्थिति में फैमिली पेंशन के रूप में एकमुश्त राशि परिवार को दी जाएगी.
  • केंद्रीय कर्मचारियों के लिए न्यूनतम पेंशन की राशि 40 रुपये तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया. यह बढ़ोतरी उनके लिए भी थी जो पहले ही रिटायर हो चुके थे.
  • बजट में अब गांव से लेकर शहरों तक के हर जगह के आवासीय घरों की कीमत एक सीमा से अधिक होने पर वेल्थ टैक्स के दायरे में लाने की घोषणा की गई. इंदिरा गांधी द्वारा बजट में घोषणा के पहले 10 हजार से छोटी जनसंख्या वाले जगहों पर स्थित आवासीय घरों पर वेल्थ टैक्स लगाने का प्रावधान नहीं था जबकि शहरों में 1 लाख रुपये तक के घरों को ही इस टैक्स के दायरे से बाहर रखा गया था. अब गांवों में भी 1 लाख रुपये से अधिक कीमत वाले आवासीय घरों को वेल्थ टैक्स के दरों में लाने की घोषणा की गई.
  • बजट में निवेश की सीमा के अलावा इसका दायरा बढ़ाने की घोषणा की गई. बजट से पहले यूनिट ट्रस्ट से 1 हजार रुपये तक की आय के अलावा छोटी बचत योजनाओं व पोस्ट ऑफिस बचत खाते में जमा पर ब्याज और भारतीय कंपनियों में शेयरों के लाभांश पर 1 हजार रुपये तक की छूट मिलती थी. इस बजट में इसकी सीमा 2 हजार रुपये से बढ़ाकर 3 हजार रुपये कर दी गई और इसके दायरे में अब केंद्र व राज्य सरकार की सिक्योरिटीज, रूरल डिबेंचर्स, बैंकिंग कंपनियों में डिपॉजिट्स औप पोस्ट ऑफिस डिपॉजिट एकाउंट्स समेत कुछ अन्य फाइनेंसियल एसेट्स में भी निवेश को लाया गया.
  • 40 हजार रुपये तक की आय को टैक्स फ्री कर दिया गया.
  • इनकम टैक्स के जरिए रेवेन्यू के 3587 करोड़ से बढ़कर 3867 करोड़ रुपये होने का अनुमान लगाया गया.
  • सिगरेट पर ड्यूटी बढ़ाकर 3-20 फीसदी तक कर दिया गया. सस्ते सिगरेट के 10 डिब्बे वाले पैकेट की कीमत 1-2 पैसे तक बढ़ गई. बजट में अनुमान लगाया गया कि इस बढ़ोतरी से सरकार को अतिरिक्त 13.50 करोड़ रुपये का रेवेन्यू मिलेगा.
  • वित्त वर्ष 1969-70 के राजकोषीय घाटे का अनुमान 254 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 290 करोड़ रुपये कर दिया गया.
  • केंद्र सरकार की योजनाओं पर खर्च में 15 फीसदी की बढ़ोतरी की घोषणा की गई. 1969-70 में 1223 करोड़ रुपये के खर्च की तुलना में 1970-71 में 1411 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया. कृषि से जुड़ी परियोजनाओं पर 39 करोड़ का बजट बढ़ाया गया.
  • फैमिली प्लानिंग समेत अन्य केंद्रीय सामाजिक योजनाओं के लिए बजट आवंटन 28 करोड़ रुपये अधिक कर दिया गया.

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