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Budget 2019: कॉरपोरेट टैक्स में भी हों अलग-अलग स्लैब, SMEs के डिविडेंड पर भी मिले टैक्स छूट

मोदी 2.0 कार्यकाल का पहला बजट होने के चलते लोगों को इस उम्मीदें है कि नई सरकार इस बजट में कुछ बड़ी और खास घोषणाएं कर सकती है.

July 4, 2019 7:10 AM

 

Budget 2019: Expectations and demands of traders from union budget

यूनियन बजट 2019 को पेश होने में अब केवल 1 दिन बचा है. मोदी 2.0 कार्यकाल का पहला बजट होने के चलते लोगों को इस उम्मीदें है कि नई सरकार इस बजट में कुछ बड़ी और खास घोषणाएं कर सकती है. नागरिकों को जहां इनकम टैक्स के मोर्चे पर राहत की आस है तो छोटे कारोबारियों को कॉरपोरेट टैक्स में राहत से लेकर एक्सपोर्ट बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए जाने की सरकार से उम्मीद है. ट्रेडर्स बजट 2019 से क्या चाहते हैं, इस बारे में फाइनेंशियल एक्सप्रेस हिंदी ने कुछ ट्रेडर्स से बात की….

क्या कहना है कि लुधियाना हौजरी इंडस्ट्री का

निटवियर एंड अपैरल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ लुधियाना (KAMAL) के प्रेसिडेंट सुदर्शन जैन ने बताया कि पिछले बजटों में कॉरपोरेट टैक्स की दर को 30 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी किया गया. लेकिन इसका फायदा केवल उन्हीं कंपनियों को है, जिनका टर्नओवर 250 करोड़ रुपये तक है. कॉरपोरेट टैक्स की यह घटी हुई दर पार्टनरशिप फर्म्स पर लागू नहीं है. इसे 250 करोड़ रुपये तक टर्नओवर वाली पार्टनरशिप फर्म्स के लिए भी लागू किया जाना चाहिए.

इसके अलावा हौजरी इंडस्ट्री का यह भी कहना है कि MSME सेगमेंट की कंपनियों को भी 30 फीसदी की दर से कॉरपोरेट टैक्स देना होता है. यानी देश में 1 लाख रुपये टर्नओवर वाली कंपनी पर भी टैक्स का बोझ 30 फीसदी है और 500 करोड़ रुपये टर्नओवर वाली पर भी. ऐसे में MSME कंपनी पर टैक्स का बोझ ज्यादा रहता है, साथ ही टैक्स चोरी का भी डर रहता है.

इसलिए इंडस्ट्री की डिमांड है कि अलग-अलग टर्नओवर के लिहाज से कॉरपोरेट टैक्स की दर भी अलग-अलग हो, बिल्कुल इनकम टैक्स स्लैब की तरह. जिस तरह इनकम टैक्स के मामले में अलग-अलग कमाई वाले लोगों पर अलग-अलग दर से टैक्स लगता है, उसी तरह कंपनियों के लिए भी टर्नओवर का स्लैब बने और उसके हिसाब से कॉरपोरेट टैक्स की अलग-अलग दर निश्चित की जाए. इससे MSME पर से टैक्स बोझ कम होगा और वे टैक्स भरने के लिए प्रोत्साहित भी होंगे.

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वाराणसी के ट्रेडर्स की क्या है डिमांड

वाराणसी की फेमस बनारसी साड़ियों के कारोबारी व एक्सपोर्टर स्टाइल इंडिया टेक्‍सटाइल प्राइवेट लिमिटेड के ओनर जेपी मुंद्रा ने बताया कि इस बार के बजट में सरकार से एक्सपोर्ट को बूस्ट देने के लिए कदम उठाने की अपील है. सरकार को कुछ खास स्कीम लानी चाहिए, जिनसे एक्सपोर्टर्स को फायदा हो. वहां के ट्रेडर्स की एसोसिएशन ने इस बारे में वित्त मंत्रालय को लिखा भी है. बनारस के ट्रेडर्स का कहना है कि मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट फ्रॉम इंडिया स्कीम यानी MEIS को फिर से लागू किए जाने से भी एक्सपोर्ट को बढ़ावा मिलेगा.

क्या चाहती हैं गुजरात की इंडस्ट्रीज

फेडरेशन ऑफ गुजरात इंडस्ट्रीज (FGI), वडोदरा के सेक्रेटरी जनरल नितेश पटेल ने बताया कि फेडरेशन ने बजट 2019 के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पास एक प्री-बजट मेमोरेंडम भेजा है. इस मेमोरेंडम में FGI ने कुछ सुझाव सरकार के पास भेजे हैं. इनमें से कुछ इस तरह हैं…

1. CSR गतिविधियों को बिजनेस एक्सपेंडिचर के तहत लिया जाना चाहिए.

2. इनकम टैक्स रिफंड पर ब्याज को इनकम टैक्स से छूट मिलनी चाहिए. अभी इनकम टैक्स रिफंड पर मिलने वाले ब्याज को अन्य सोर्स से होने वाली इनकम के दायरे में रखा जाता है, जिसके चलते उस पर इनकम टैक्स देना होता है. इससे असेसी पर दोहरी मार पड़ती है.

3. इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 234 सी के तहत एडवांस टैक्स इंस्टॉलमेंट में डिफॉल्ट करने पर ब्याज देना होता है. यह ब्याज 1 फीसदी प्रतिमाह की दर से लगता है. एडवांस टैक्स का भुगतान न करने पर या फिर भुगतान किया गया एडवांस टैक्स असेस्ड टैक्स के 90 फीसदी से कम होने पर सेक्शन 234 बी के तहत ब्याज लगता है. भुगतान किए जाने वाले 90 फीसदी टैक्स के लिए सेक्शन 234 सी के तहत ब्याज भी टैक्स का हिस्सा माना चहात है. इंट्रेस्ट कैलकुलेशन की यह स्कीम अनुचित है और यह डबल टैक्सेशन का मामला है.

4. अपीलों के निपटारे के लिए एक उचित टाइम लिमिट सेट की जाए.

5. डॉमेस्टिक कंपनियों को डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स के पेमेंट से डिविडेंड की छूट उपलब्ध कराने के लिए इनकम टैक्स एक्ट में जरूरी संशोधन किए जाने की जरूरत है. साथ ही इसे केवल सब्सिडियरी से डिविडेंड प्राप्त होने तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए. इसके अलावा सेक्शन 80एम के प्रावधानों को भी रीइंट्रोड्यूस करने की जरूरत है.

6. कॉरपोरेट टैक्स के लिए एक सिंगल कंपोजिट टैक्स रेट लागू की जानी चाहिए, जिसमें सभी सरचार्ज और सेस शामिल हों.

7. 250 करोड़ रुपये तक टर्नओवर वाली SME कंपनियों द्वारा दिया जाने वाला डिविडेंड टैक्स के दायरे में नहीं रखा जाना चाहिए. अभी डिविडेंड देने वाली SME को 20 फीसदी और डिविडेंड पाने वाले को 10 फीसदी टैक्स देना होता है. इसे हटाया जाना चाहिए.

8. 250 करोड़ रुपये तक टर्नओवर वाले SMEs के लिए इनकम टैक्स रेट 25 फीसदी से घटाकर 20 फीसदी की जाना चाहिए.

 

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