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Private Car Vs Ola & Uber: क्या अपनी कार सस्ती है या ओला और उबर की सर्विस?

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी ऑटो सेक्टर में मंदी के पीछे ओला और उबर को जिम्मेदार ठहराया है.

October 18, 2019 11:16 AM
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बाद अब केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी ऑटो सेक्टर में मंदी के पीछे ऐप बेस्ट टैक्सी एग्रीगेटर्स यानी ओला और उबर को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने कहा कि कारों की बिक्री में कमी का कारण अधिक संख्या में लोगों का मेट्रो और ऐप के जरिये टैक्सी सेवा देने वाली ओला और उबर का उपयोग करना है. इससे पहले, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी कहा था कि युवाओं की सोच बदल रही है और लोग अब खुद का वाहन खरीदकर मंथली ईएमआई भरने की बजाए ओला और उबर बुकिंग को तरजीह दे रहे हैं. उनकी इस टिप्पणी की विभिन्न तबकों ने आलोचना की थी.

केस स्टडी: अगर आप कार खरीदते हैं तो प्रति दिन का खर्च

  • एक नॉर्मल कीमत वाली कार: 6 लाख रुपये
  • 6 साल बाद स्क्रैप वैल्यू: 1 लाख रुपये
  • 6 साल में कार खरीदने पर नेट खर्च: 5 लाख रुपये
  • प्रति दिन का खर्च: 5,00,000/2200 = 230 रु/दिन
  • सालाना इंश्योरेंस का खर्च: 15 हजार रुपये
  • इंश्योरेंस पर प्रति दिन खर्च: 41 रु/दिन
  • रोज पेट्रोल का खर्च: 150 रु/दिन
  • हर 3 साल में टायर और बैटरी पर खर्च: 25 हजार रुपये यानी 23 रु/दिन
  • सालाना मेंटिनेंस: 9000 रुपये यानी 25 रु/दिन
  • इंटरेस्ट लॉस: 131 रु/दिन
  • ऐसे में नई कार खरीदने पर रोज का खर्च करीब 850 रुपये बैठेगा.

(नोट: यहां कार की औसत कीमत 6 लाख रुपये और औसत लाइफ 6 साल मानी गई है. मेंटिनेंस और पेट्रोल आदि का खर्च मध्य वर्ग को ध्यान में रखते हुए एक सामान्य खर्च के रूप में लिया गया है. खर्च इससे भी ज्यादा या कम हो सकता है.)

अगर Ola या Uber हायर करते हैं

ऊपर कार के केस में रोज पेट्रोल का खर्च 150 रुपये दिखाया गया है. इस लिहाज से यह मानकर चल सकते हैं कि रोज कार से 25 से 30 किलोमीटर ट्रैवल हो रहा है. वहीं, खुद ओला और उबर को दिए गए पेमेंट की स्टडी की गई तो इसमें यह निकलकर आया कि 15 किलोमीटर तक की जर्नी करते हैं तो इसका बिल 170 से 215 रुपये (फ्लेक्सी फेयर) के बीच हो सकता है. जो 30 किलोमीटर के लिहाज से 340 से 430 रुपये के बीच होगा. इसे औसतन 450 रुपये रोज का खर्च मान सकते हैं.

दोनों में तुलना

साफ है कि जहां कार पर रोल 850 रुपये खर्च हो रहा है, वहीं ओला और उबर पर यह खर्च 400 से 450 रुपये रुपये के बीच ही आएगा. यानी कार की बजाए टैक्सी सर्विस लेने पर कम से कम 400 रुपये रोज की बचत हो सकती है.

फाइनेंशियल एडवाइजर फर्म BPN फिनकैप के डायरेक्‍टर एके निगम का कहना है कि आज के दौर में जहां खर्चें बहुत ज्यादा हैं, बहुत से लोग इसे और नहीं बढ़ाना चाहेंगे. इस वजह से खासतौर से युवाओं को टैक्सी एग्रीगेटर्स की सर्विस लेना ज्यादा फायदेमंद लगेगा. इससे उन्हें सेफ्टी का भी अहसास होगा, वहीं पार्किंग या दूसरे कामों से समय की भी बचत होगी. उनका कहना है कि इससे जो बचत होगी, उसे सेविंग्स के कई विकल्पों मसलन SIP, एफडी या पीपीएफ जैसे विकल्पों में लगाया जा सकता है.

क्या कहा केंद्रीय मंत्री ने

नागर विमानन और आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री ने एक कार्यक्रम में कहा कि आर्थिक नरमी की बात की जा रही है और वह उनमें से हैं जो हमेशा समस्या को समझते हैं. पुरी ने कहा कि कार बिक्री के मामले में निश्चित रूप से कभी बढ़ोत्तरी होती है और कभी नरमी होती है. लेकिन पूरी तस्वीर को देखने पर सही स्थिति का पता चलता है. जब मैं शहरी मामलों का मंत्री बना, उस समय दिल्ली मेट्रो की सेवा लेने वालों की कुल संख्या 24 लाख रोजाना थी. अभी यह संख्या 60 लाख से अधिक हो गयी है. आज अगर आप कहीं जाना चाहते हैं, मेट्रो या कैब की सेवा लेते हैं.

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