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कैसे स्क्रैप होंगे 15 साल पुराने पेट्रोल और 10 साल पुराने डीजल वाहन? नहीं है कोई पॉलिसी

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में 15 साल पुराने पेट्रोल और 10 साल पुराने डीजल वाहनों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है. इस पर FE Hindi.com ने SIAM (सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स) के DG विष्णु माथुर से खास बातचीत की है.

November 1, 2018 7:16 AM
Old vehicles, old vehicles in delhi, scrapping old vehicles, 15-year-old vehicle, delhi 15 years old vehicles pollicy, air pollution, petrol vehicles, diesel vehicles life, indian expressसुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में 15 साल पुराने पेट्रोल और 10 साल पुराने डीजल वाहनों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है. (Photo source- Renuka Puri/IE)

सिर्फ दिल्ली में ही करीब 38 लाख वाहन ऐसे हैं जो सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले से प्रभावित होंगे जिसमें दिल्ली-NCR में 15 साल पुराने पेट्रोल और 10 साल पुराने डीजल वाहनों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया था. हालांकि, ये दिल्ली परिवहन विभाग के साथ पंजीकृत वाहनों की संख्या हैं. दिल्ली-एनसीआर में अभी कितने वाहन चल रहे हैं उनका कोई आंकड़ा नहीं हैं.

‘जल्द लागू करनी चाहिए स्क्रैप पॉलिसी’

ऐसे में ऑटो इंडस्ट्री का मानना है कि सरकार को जल्द ही स्क्रैप पॉलिसी लागू करनी चाहिए. जिससे लोगों के मन से ये सवाल हट सके कि उनकी पुरानी कार का क्या होगा. SIAM (सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स) के DG विष्णु माथुर ने FE Hindi.com से बताया कि देश में अभी स्क्रैप पॉलिसी नहीं है. सरकार नई स्क्रैप पॉलिसी पर काम कर रही है लेकिन, अभी उसका ऐलान नहीं किया गया है.

उन्होंने कहा कि देश में स्क्रैप पॉलिसी को जल्द लागू किए जाने की जरूरत है. इससे लोग अपनी पुरानी कार को स्क्रैप कराने के लिए ज्यादा आगे आ सकते हैं. इसके अलावा उन्होंने कहा कि प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिहाज से सुप्रीम का ये फैसला सराहनीय है. इससे दिल्ली-NCR में बढ़ते प्रदूषण पर कंट्रोल करने में मदद मिलेगी.

क्या नई कारों की सेल्स पर पड़ेगा असर?

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दिल्ली में नई कारों की सेल्स पर क्या असर पड़ेगा, इस बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि दिल्ली में नई कारों की सेल्स बढ़ जाएगी, ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी. ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा. बता दें, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में 15 साल पुराने पेट्रोल और 10 साल पुराने डीजल वाहनों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है.

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सोमवार को प्रतिबंध लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने परिवहन विभाग को आदेश दिया था कि अगर ऐसे वाहन चलते पाए गए तो उन्हें जब्त कर लिया जाएगा. न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर, न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने दिल्ली-NCR में प्रदूषण की स्थिति को ‘बहुत ही चिन्ताजनक’ बताते हुए ये आदेश दिया था. उम्मीद की जा रही है कि इससे प्रदूषण को कंट्रोल किया जा सकेगा.

स्क्रैप पॉलिसी पर क्या थी सरकार की प्लानिंग?

अगस्त 2015 में परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि “हम एक ऐसी स्कीम लेकर आ रहे हैं कि अगर आप अपना पुराना वाहन बेचते हैं तो आपको एक प्रमाणपत्र मिलेगा जिससे नए वाहन की खरीद के समय आपको 50,000 रुपये तक की छूट मिल जाएगी. कारों जैसे छोटे वाहनों के लिए, ये छूट 30,000 रुपये तक होगी. इसके अलावा, करों में छूट होगी और बड़े वाहनों के लिए कुल 1.5 लाख रुपये तक के लाभ मिलेंगे.”

कई देशों में है स्क्रैप पॉलिसी

US और UK में साल 2009 में स्क्रैप पॉलिसी को लागू किया गया. US में जो पुराने व्हीकल्स 7.7 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देते हैं उन्हें स्क्रैप कराने पर $2,500 and $4,500 तक का इनसेंटिव मिलता हैं. वहीं, UK में कार मालिक को स्क्रैपिंग पर £2,000 तक का इनसेंटिव मिलता है. ये इनसेंटिव नई और ज्यादा फ्यूल एफिशिएंट कार खरीदने पर लागू होता है.

चीन की राजधानी बीजिंग में प्रदूषण फैलाने वाली कारों को सड़कों से हटाने के​ लिए दो चरणामें में एक इंसेंटिव बेस्ड पॉलिसी लाई गई. साल 2011 में 1995 या उससे पहले रजिस्टर हुई कारों को स्क्रैप करने के लिए एक प्रोग्राम शुरू किया गया, जिसके तहत मालिक को $350 से $2,300 तक मिलते थे. वहीं साल 2014 में लागू हुई एक अन्य पॉलिसी में ‘yellow label’ कारों को स्क्रैप करने का नियम आया.

 

 

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