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चीन से कारखाने बाहर ले जा रही हैं कई ऑटोमोबाइल कंपनियां, भारत कैसे कर सकता है आकर्षित

यह भारत के लिए मैन्युफक्चरिंग हब बनने की दिशा में एक अच्छा अवसर साबित हो सकता है.

Updated: Sep 07, 2020 1:46 AM
how india can attract Auto Firms Moving Facilities Out Of China, what measures can be tried, Kenichi Ayukawa, siam, 60th ACMA Annual SessionImage: Reuters

भू-राजनीतिक जोखिमों को कम करने के लिए कई ऑटोमोबाइल कंपनियां अब चीन से अपनी मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज को बाहर ले जा रही हैं और दूसरे देशों में विकल्प तलाश रही हैं. यह भारत के लिए मैन्युफक्चरिंग हब बनने की दिशा में एक अच्छा अवसर साबित हो सकता है. सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के नए प्रेसिडेंट केनिची आयुकावा का कहना है कि वाहन और कलपुर्जा क्षेत्र को मिलकर उन कंपनियों को आकर्षित करने या उस निवेश को भारत लाने का प्रयास करना चाहिए. या फिर उनके साथ गठजोड़ के जरिए देश में उत्पादन बढ़ाना चाहिए.

आयुकावा का कहना है कि चीन से कंपनियों का अपने कारखानों को हटाना भारत के लिए आपदा में भी अवसर है. हमें उस निवेश को भारत में लाने का प्रयास करना चाहिए. हालांकि चुनौतियां अभी कायम हैं. कंपोनेंट इंडस्ट्री को इस चुनौतीपूर्ण समय में अपने वर्कर्स की सुरक्षा व स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए उत्पादन बढ़ाना चाहिए.

जापान के मैन्युफैक्चरर्स से करेंगे बात

भारतीय वाहन कलपुर्जा विनिर्माता संघ (ACMA) के वार्षिक सत्र में आयुकावा ने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ को प्रोत्साहन देने के लिए वह जापान के मैन्युफैक्चरर्स के साथ कारोबार से संबंधित कुछ बैठकें आयोजित करने का प्रयास करेंगे. इस तरह के कदम दक्षिण कोरिया, अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ भी उठाए जाने चाहिए.

कंपोनेंट्स के लोकलाइजेशन को बढ़ाया जाए

आयुकावा ने कुछ और सुझाव भी दिए, जैसे कि कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स को आंतरिक पुर्जों व कच्चे माल का अधिकतम स्थानीयकरण करना चाहिए. यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के अनुकूल कदम होगा. उनका कहना है कि सियाम सोर्सिंग ग्रुप ने कंपोनेंट्स की ऐसी 4 कैटेगरी की पहचान की है, जहां इंपोर्ट को लोकल में तब्दील किया जाना चाहिए. ये कैटेगरी- इलेक्ट्रॉनिक्स, कुछ स्टील ग्रेड, टूलिंग और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स कंपोनेंट्स हैं. आयुकावा ने कंपोनेंट मेकर्स से अपील की है कि वे आगे आकर इन कंपानेंट्स के लोकलाइजेशन की जिम्मेदारी उठाएं. अगर हम ऐसा करने में सफल रहे तो भारत एक्सपोर्ट्स के लिए भी बेहद पावरफुल बन जाएगा. अगर कुछ चुनौतियां हुईं तो सरकार हमारी मदद करेगी क्योंकि यह एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय उद्देश्य है.

बता दें कि ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री द्वारा किए जाने वाले कुल इंपोर्ट में से एक चौथाई चीन से होता है. इंपोर्ट होने वाले टॉप 10 कंपोनेंट्स में गियर बॉक्स व पार्ट्स, ट्यूब्स, रेडिएटर्स व ऐक्सल्स, स्टी​यरिंग व्हील्स आदि शामिल हैं. ये सभी लो टेक प्रॉडक्टस हैं, जिनकी भारत में मैन्युफैक्चरिंग हो सकती है.

सरकार से मांगा यह सहयोग

आयुकावा ने डिमांड जनरेट करने के लिए एक्सपोर्ट के मामले में परफॉरमेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम की जरूरत की भी बात कही. इसके अलावा देश के अंदर मांग बढ़ाने के लिए सरकार से जीएसटी में कटौती और स्क्रैपेज इसेंटिव स्कीम की भी मांग की है. नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत के मुताबिक, वाहन और वाहन-कलपुर्जा बनाने वाले उद्योगों के लिए पीएलआई स्कीम योजना के निर्माण की दिशा में काफी बुनियादी काम किए जा चुके हैं. वाहन स्क्रैप नीति पर अंतर-मंत्रालयीय चर्चा में भी काफी प्रगति हो चुकी है.

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