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  1. देश में 2030 तक रिफाइनिंग क्षमता में 77 प्रतिशत वृद्धि की योजना

देश में 2030 तक रिफाइनिंग क्षमता में 77 प्रतिशत वृद्धि की योजना

दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता देश भारत अपनी ऊर्जा जरूरत का 80 प्रतिशत आयात करता है. सरकार ने तेल आयात पर निर्भरता कम करने की योजना बनायी है.

February 8, 2018 5:50 PM
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देश में रिफाइनिंग क्षमता को 77 प्रतिशत बढ़ाकर 2030 तक 43.86 करोड़ टन करने की योजना है. इसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज तथा रोसनेफ्ट के नियंत्राण वाली एस्सार आयल की बड़ी हिस्सेदारी होगी. एक सरकारी रिपोर्ट में यह कहा गया है. रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाने को लेकर गठित कार्य समूह की रिपोर्ट के अनुसार देश में सालाना 24.76 करोड़ टन कच्चे तेल को ईंधन में बदलने की क्षमता है. वर्ष 2025 तक इसके 41.43 करोड़ टन तथा 2030 तक 43.86 करोड़ टन पहुंच जाने का अनुमान है.

मौजूदा रिफाइनिंग क्षमता 2016-17 में ही 19.37 करोड़ टन की ईंधन मांग को पार कर गयी है लेकिन अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने अनुमान जताया है कि 2040 तक मांग 45.8 करोड़ टन तक पहुंच जाएगी. दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता देश भारत अपनी ऊर्जा जरूरत का 80 प्रतिशत आयात करता है. सरकार ने तेल आयात पर निर्भरता कम करने की योजना बनायी है. रिलायंस इंडस्ट्रीज की निर्यात रिफाइनरी क्षमता 3.52 करोड़ टन से बढ़ाने की योजना नहीं है लेकिन कंपनी अपनी पुरानी रिफाइनरी की क्षमता 2030 तक 6.3 करोड़ टन करेगी जो फिलहाल 3.3 करोड़ टन है.

वहीं एस्सार ने गुजरात स्थित वडीनार रिफाइनरी की क्षमता मौजूदा 2 करोड़ टन से बढ़ाकर 4.5 करोड़ टन करने की योजना बनायी है. हालांकि, सबसे ज्यादा रिफाइनरी क्षमता प्रस्तावित 6 करोड़ टन सालाना की रिफाइनरी से आएगी. इसे महाराष्ट्र के पश्चिमी तट पर लगाया जाना है. इसके 2025 तक परिचालन में आने की उम्मीद है.

सार्वजनिक क्षेत्र की इंडियन आयल कारपोरेशन ने गुजरात, पानीपत, पारादीप और चेन्नई रिफाइनरी का विस्तार कर मौजूदा 8.07 करोड़ टन की क्षमता को बढ़ाकर 11.65 करोड़ टन पहुंचाने का लक्ष्य रखा है. ओएनजीसी ग्रुप की मौजूदा क्षमता 4.22 करोड़ टन में 2 करोड़ टन इजाफा करने की योजना है. वहीं भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन लि. अपनी मौजूदा क्षमता 3.65 करोड़ टन को बढ़ाकर 5.6 करोड़ टन करने का लक्ष्य रखा है.

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